खबर लहरिया Blog Ken Betwa Project Movement: ग्रामीणों और पुलिस के बीच झड़प, चिता आंदोलन में बुलडोजर कार्रवाई

Ken Betwa Project Movement: ग्रामीणों और पुलिस के बीच झड़प, चिता आंदोलन में बुलडोजर कार्रवाई

मध्य प्रदेश में केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ चल रहे आंदोलन की रिपोर्टिंग और आंदोलनकारी नेता अमित भटनागर से बातचीत करने पर जानकारी मिली कि यहां  13 मई को जिस जगह ग्रामीण और प्रदर्शनकारी विरोध कर रहे थे वहां प्रशासन ने प्रदर्शन के लिए बनाई गई चिता को जला दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया। 

रिपोर्ट- कविता,गीता,अलीमा, लेखन – रचना 

फोटो साभार: खबर लहरिया

केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत विस्थापित किए जा रहे ढोड़न गांव में बीते बुधवार 13 मई 2026 को पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प हो गए। प्रशासन की टीम भारी पुलिस बल के साथ गांव पहुंची थी। जैसे ही गांव के बाहरी हिस्से में कुछ मकानों पर बुलडोजर चलना शुरू हुआ ग्रामीण नाराज हो गए। करीब 200 पुलिस जवानों के सामने बड़ी संख्या में ग्रामीण इकट्ठा हो गए और देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच टकराव की स्थिति बन गई। इस दौरान पथराव शुरू हो गया जिसके बाद पुलिस और प्रशासन की टीम को पीछे हटना पड़ा। इस घटना में कुछ पुलिसकर्मियों और जेसीबी चालक के घायल होने की बात कही जा रही है। वहीं गाड़ियों और जेसीबी मशीन में भी तोड़फोड़ हुई।

ग्रामीण बोले- बिना बताए घर तोड़ने पहुंच गया प्रशासन

दर असल केन बेतवा लिंक परियोजना का आंदोलन जारी ही है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने कार्रवाई से पहले गांव में कोई मुनादी नहीं कराई और न ही लोगों को पहले से नोटिस दिया गया। उनका कहना है कि अधिकारी अचानक बुलडोजर लेकर पहुंचे और घर गिराना शुरू कर दिया। इसी बात से गांव वालों में डर और गुस्सा फैल गया। कुछ ग्रामीणों का दावा है कि एक परिवार घर के अंदर मौजूद था तभी मकान तोड़ दिया गया जिससे लोग घायल हो गए। घटना के कुछ वीडियो भी सामने आए हैं जिनमें टूटे घर के बीच एक परिवार बैठा दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि लोग घायल हुए हैं जबकि प्रशासन इन दावों को गलत बता रहा है। 

जेल से आने के बाद अमित भटनागर का बयान 

खबर लहरिया की टीम मध्य प्रदेश में केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ चल रहे आंदोलन की रिपोर्टिंग और आंदोलनकारी नेता अमित भटनागर से बातचीत करने पहुंची। यहां बातचीत के दौरान सामने आया कि 13 मई को जिस जगह ग्रामीण और प्रदर्शनकारी विरोध कर रहे थे वहां प्रशासन ने प्रदर्शन के लिए बनाई गई चिता को जला दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया।

उससे पहले ठीक दो दिन पहले ग्रामीणों और आंदोलन में शामिल लोगों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान दो आदिवासी घायल हो गए जबकि एक व्यक्ति की मौत की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि प्रशासन की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। बता दें कि ग्रामीण पिछले करीब दो हफ्तों से चिता पर लेटकर अपना विरोध दर्ज करा रहे थे और परियोजना के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रहे थे।

इस मामले को लेकर 13 मई को जेल से लौटे प्रदर्शनकारी नेता अमित भटनागर से भी बातचीत की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि गांव को गैरकानूनी तरीके से खाली कराया जा रहा है और विरोध करने वालों को लोगों के बीच से हटाकर जेल भेज दिया जाता है। उनका कहना था कि लोगों पर जबरन घर खाली करने का दबाव बनाया जा रहा है।

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अमित भटनागर ने कहा “जब हम इतने सालों से अहिंसक तरीके से अपनी बात रख रहे हैं आंदोलन कर रहे हैं तो हमें लोगों के बीच से क्यों हटाया जाता है? लोगों को हिंसक दिखाने की कोशिश की जा रही है।” उन्होंने यह भी कहा कि सरकार पुलिस और जनता को आमने-सामने खड़ा कर रही है जिससे तनाव बढ़ रहा है। “अगर पुलिस को चोट लगती है तो वह भी समाज की चोट है और जनता को चोट लगना भी समाज की ही चोट है।”

उन्होंने मांग की कि ग्राम सभा से जुड़े दस्तावेज और जमीन अधिग्रहण की पूरी जानकारी लोगों के सामने रखी जाए। अमित भटनागर का कहना है कि कानून के तहत धारा 11 की प्रारंभिक अधिसूचना जारी होने के बाद सबसे पहले गांव वालों को सूचना दी जानी चाहिए। इसके बाद ग्राम सभा आयोजित कर लोगों से राय, सुझाव और आपत्तियां ली जाती हैं। उनका आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और यही वजह है कि लोग विरोध कर रहे हैं। उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई को गैरसंवैधानिक बताया।

दिव्या अहिरवार जो प्रदर्शनकारीयों  में से एक हैं उन्होंने जानकारी दी कि वे धरना स्थल से पलकुआँ गांव से नहाने के लिए गई थी जिसके बाद उन्हें अचानक पता लगा कि प्रशासन द्वारा धरना स्थल पर जो चिता आंदोलन चल रहा था वहां पर प्रशासन द्वारा चिताओं में आग लगा दी गई है। और लोगों के साथ लाठीचार्ज भी किया गया और कुछ लोगों के कुछ घर भी तोड़े गए। उन्होंने बताया ठीक दो तीन पहले आंदोलन के दौरान ही प्रभावित गांव के एक युवक की जान चली गई और दो गम्भीर रूप से घायल भी हैं। 

150 लोगों के ऊपर एफ़आईआर दर्ज

आंदोलनकारी नेता अमित भटनागर ने अपने ताज़ा बयान में कहा कि 13 मई को प्रशासन और ग्रामीणों के बीच हुई झड़प के बाद करीब 150 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है जिसमें उनका नाम भी शामिल है। उन्होंने प्रशासन की उस कार्रवाई पर सवाल उठाया जिसमें इसे “अतिक्रमण हटाने” की कार्रवाई बताया जा रहा है। अमित भटनागर ने कहा “यह किस तरह का अतिक्रमण है? उस गांव में लोग कई पीढ़ियों से रह रहे हैं। यह गांव आज़ादी से पहले का बसा हुआ है। अब सरकार केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत उस जमीन का अधिग्रहण कर रही है।”

उन्होंने कहा कि जब किसी गांव या जमीन का अधिग्रहण किया जाता है तो कानून के तहत लोगों का पुनर्वास किया जाता है और उन्हें उचित मुआवजा दिया जाता है। उनका आरोप है कि यहां यह प्रक्रिया सही तरीके से पूरी नहीं की गई। अमित भटनागर के मुताबिक 15 अप्रैल 2026 को प्रशासन के साथ उनकी आखिरी बातचीत हुई थी, जिसमें अधिकारियों ने परियोजना और पुनर्वास से जुड़े दस्तावेज तीन से पांच दिन के भीतर देने का भरोसा दिया था पर 14 मई तक भी कोई कागज नहीं दिए गए। उनका कहना है कि ग्रामीणों को भी अब तक जरूरी दस्तावेज नहीं मिले हैं।

अमित भटनागर ने आरोप लगाया कि प्रभावित लोगों का न तो सही तरीके से पुनर्वास हुआ है और न ही उन्हें उचित मुआवजा मिला है। उन्होंने ग्राम सभाओं को भी “फर्जी” बताया। उनके अनुसार सरकार ने सर्वे कराने की बात कही थी पर उस पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्हें “अनैतिक तरीके” से गिरफ्तार किया गया। एक मामले में जेल से बाहर आने के बाद उन्हें दोबारा गिरफ्तार कराया गया।

फिलहाल वह जेल से बाहर हैं लेकिन अभी तक उस गांव में नहीं पहुंचे हैं जहां आंदोलन चल रहा है। इसके बावजूद वहां प्रशासन की कार्रवाई जारी है। अमित भटनागर का आरोप है कि गांव वालों और आंदोलन में शामिल लोगों को डराया और धमकाया जा रहा है। “अगर प्रशासन की प्रक्रिया संवैधानिक और कानूनी है तो हम बातचीत के लिए तैयार हैं। हम आमने-सामने बैठकर बात करना चाहते हैं।”

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प्रशासन ने क्या कहा? 

इस मामले को लेकर कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट पार्थ जायसवाल ने प्रशासन की तरफ से अपना पक्ष रखा गया। उन्होंने बताया कि प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम बुधवार 13 मई को ढोड़न गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के लिए पहुंची थी। उनके मुताबिक यह कार्रवाई केवल उन मकानों और भवनों पर की जा रही थी जिनके मालिकों को जमीन का मुआवजा और अन्य सभी प्रकार की आर्थिक सहायता पहले ही दी जा चुकी है। प्रशासन का कहना है कि कई लोगों ने मुआवजा लेने के बाद दूसरी जगह अपने रहने की व्यवस्था भी कर ली है लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग अब भी अधिग्रहित जमीन पर रह रहे हैं। इसी वजह से सरकारी जमीन को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की गई।

कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने कहा कि गांव में कार्रवाई से पहले लोगों को सूचना दे दी गई थी। जिन लोगों को कोई शिकायत आपत्ति या समस्या है वे अधिकारियों से आकर बात कर सकते हैं। टीम को साफ निर्देश दिए गए थे कि किसी भी मकान को गिराने से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि घर के अंदर कोई मौजूद न हो। प्रशासन के अनुसार कार्रवाई के दौरान एक मकान हटाया जा रहा था तभी गांव के कुछ लोगों ने अचानक पुलिस और प्रशासन की टीम पर पथराव शुरू कर दिया। इस घटना में एडिशनल एसपी की गाड़ी, तहसीलदार का वाहन और एक जेसीबी मशीन समेत कई सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचा है। कलेक्टर ने कहा कि मौके पर मौजूद वीडियो फुटेज के आधार पर लोगों की पहचान की जाएगी और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

कलेक्टर ने ग्रामीणों के उन आरोपों को भी खारिज किया जिनमें लोगों के घायल होने और घर के अंदर दबने की बात कही जा रही है। उन्होंने दावा किया कि कुछ वीडियो में कृत्रिम रंग यानी आर्टिफिशियल कलर का इस्तेमाल कर हालात को ज्यादा गंभीर दिखाने की कोशिश की गई है। प्रशासन के मुताबिक इन वीडियो और दावों की जांच पुलिस करेगी। फिलहाल स्थिति को देखते हुए ढोड़न खरयानी और पलकुआं गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। गांव के आसपास निगरानी बढ़ा दी गई है और आने-जाने वाले रास्तों पर भी पुलिस नजर रख रही है ताकि दोबारा तनाव की स्थिति न बने।

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