खबर लहरिया Blog Bnada News: तपते बाँदा में भीषण गर्मी में पानी के लिए भटक रहे लोग  

Bnada News: तपते बाँदा में भीषण गर्मी में पानी के लिए भटक रहे लोग  

इस समय यूपी में गर्मी अपने चरम पर है। ऐसे में पानी की समस्या लोगों के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर सामने खड़ी है। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के तिंदवारी ब्लॉक स्थित भवानीपुर गांव के लोगों की जिंदगी इन दिनों इसी चिंता के इर्द-गिर्द घूम रही है। भीषण गर्मी के बीच गांव में पिछले एक सप्ताह से न तो पानी की सप्लाई हो रही है और न ही नियमित बिजली मिल रही है। हालात ऐसे हैं कि लोग एक-एक बूंद पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं।

भरी दोपहरी में महिला पानी भरती हुई (फोटो साभार: शिव देवी)

रिपोर्ट – शिव देवी, लेखन – सुचित्रा 

बिजली न होने से पानी की समस्या बढ़ी 

भवानीपुर गांव में करीब 2000 की आबादी और 1200 से अधिक मतदाता है। इस गांव में बिजली न होने की वजह से लोगों को गांव में लगे सरकारी हैंडपंप पर निर्भर रहना पड़ रहा है। तीन सरकारी हैंडपंपों में से केवल एक ही चालू है, वह भी पर्याप्त पानी नहीं दे पा रहा। नतीजतन रोजाना सैकड़ों लोग उसी एक हैंडपंप पर पानी भरने के लिए लंबी कतारों में खड़े रहते हैं।

70 वर्षीय फूलमती कहती हैं, “इस उम्र में बाल्टी उठाकर दूर-दूर से पानी लाना बहुत मुश्किल हो जाता है। घर में चार जानवर हैं, जिनके लिए रोजाना 20 से 50 लीटर पानी की जरूरत पड़ती है। पानी की कमी से सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों को हो रही है।”

वहीं कुसुम कली बताती हैं, “मेरे घर में चार भैंसें हैं और परिवार में 10 सदस्य हैं। ऐसे में रोजाना 500 लीटर से कम पानी की जरूरत नहीं पड़ती। इस भीषण गर्मी में हैंडपंप चलाते-चलाते पसीना छूट जाता है और काफी थकान महसूस होती है। लेकिन मजबूरी में पानी भरना पड़ता है।”

सिया दुलारी का कहना है, “हम मजदूरी करके परिवार चलाते हैं। सुबह समय पर पानी नहीं मिलता तो खाना बनाने से लेकर दूसरे जरूरी काम भी प्रभावित हो जाते हैं। पानी हर काम के लिए जरूरी है। कई बार पानी भरने में इतना समय लग जाता है कि मजदूरी पर जाने में देर हो जाती है और कमाई का नुकसान उठाना पड़ता है।”

आर्थिक रूप से कमजोर परिवार ज्यादा प्रभावित 

लोगों का कहना है कि 27 मई 2026 से पानी समस्या बनी हुई है। लोग मजबूरी में दूसरे के निजी हैंडपंपों से पानी लेने पहुंचते हैं, लेकिन वहां भी कई बार उन्हें ताने, अपमान और धमकियों का सामना करना पड़ता है। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव आर्थिक रूप से कमजोर परिवार पर पड़ता है क्योंकि उनके पास इतने पैसे नहीं है कि वे अपना खुद का हैंडपपं लगवाएं। 

ग्रामीणों का कहना है कि पानी भरने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। मजदूरी करने वाले लोग समय पर काम पर नहीं पहुंच पाते, जिससे उनकी दिहाड़ी तक छिन जाती है। वहीं बुजुर्गों और महिलाओं के लिए पानी जुटाना रोज की सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

धूप से बचने के लिए सिर को ढककर पानी के लिए जाती हुई लड़की (फोटो साभार: शिव देवी)

हैंडपंप के लिए चंदा इकट्ठा करने का सुझाव – प्रधान 

ग्राम प्रधान सपना देवी का कहना है कि फिलहाल पंचायत के पास बजट नहीं है। यदि लोग चाहें तो आपसी सहयोग से हैंडपंप लगवा सकते हैं।

वहीं बिजली विभाग का कहना है कि क्षेत्र में खंभों और ट्रांसफॉर्मरों को नुकसान पहुंचा है, जिसकी मरम्मत का कार्य लगातार जारी है और जल्द आपूर्ति बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है।

गांव में लगा सरकारी हैंडपंप से पानी भरकर ले जाती हुई महिला (फोटो साभार: शिव देवी)

ग्रामीणों की मांग है कि गांव के खराब हैंडपंपों को तत्काल ठीक कराया जाए, नए हैंडपंप लगाए जाएं और बिजली आपूर्ति बहाल कर पेयजल संकट से राहत दिलाई जाए। क्योंकि पानी केवल जरूरत नहीं, जीवन की बुनियाद है और जब यही न मिले तो पूरा गांव संकट में घिर जाता है।

 

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