अयोध्या के टेढ़ी बाजार की रहने वाली 74 वर्षीय सुशीला श्रीवास्तव आज भी बच्चों को शिक्षा देने के लिए लगातार काम कर रही हैं। खास बात यह है कि वह किसी कोचिंग सेंटर या बड़े संस्थान में नहीं, बल्कि जरूरतमंद बच्चों के घर जाकर उन्हें पढ़ाती हैं। रास्ते में कोई बच्चा या बच्ची पढ़ाई से दूर दिखाई दे जाए तो सुशीला उसे रोककर समझाती हैं और पढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं। उनका मानना है कि एक शिक्षक का काम सिर्फ कुर्सी पर बैठकर पढ़ाना नहीं, बल्कि बच्चों के बीच जाकर, उनके साथ बैठकर और प्यार से उन्हें समझाना है। सुशीला श्रीवास्तव ने अपने जीवन में रेलवे में करीब 15 साल काम किया। इसके अलावा शिक्षा और पुलिस विभाग से भी जुड़ी रहीं। पारिवारिक परिस्थितियों के कारण सरकारी नौकरी छोड़नी पड़ी, लेकिन बच्चों को पढ़ाने का उनका जुनून आज भी जारी है। आज वह जरूरतमंद बच्चों को प्रतिदिन करीब 2 घंटे समय देती हैं। परिवार अपनी इच्छा से कुछ शुल्क दे दे तो स्वीकार कर लेती हैं, लेकिन पढ़ाने के बदले कोई तय फीस या मांग नहीं करतीं। उनके लिए शिक्षा सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि समाज को बदलने का जरिया है।
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