खबर लहरिया खेती जब अन्नतादा के अन्न का नही हुआ भुगतान, दर दर भटकने को मजबूर

जब अन्नतादा के अन्न का नही हुआ भुगतान, दर दर भटकने को मजबूर

उत्तर प्रदेश के बुन्देलखण्ड का किसान वैसे भी देवीय आपदाओं और सरकार की नीतियों से त्रस्त है| इसके बाद भी किसी तरह खून पसीने से कड़ी मेहनत करके फसल उगाता है.पर उसको सरकारी क्रय केंद्रों में बेचने के बाद पैसे के लिए दर-दर भटकता रहता है| ऐसा ही कुछ हाल है बांदा जिले के किसानों का उन्होंने कृषि उत्पादन मंडी अतर्रा में लगभग छह महीने पहले चान बेचा था |
लेकिन अभी तक भुगतान नहीं हुआ। जहाँ एक तरफ कोरोना जैसी भयंकर महामारी की मार पूरा देश झेल रहा है. वहीं गरीब खेतिहर किसान गरीबी की मार झेल रहा| इसके बावजूद सैकड़ो किसानों को चना बेचने के बाद आज तक  समिति द्धरा भुगतान नहीं किया गया।
किसानों द्वारा पी सी यू चना खरीदी केन्द्र नरैनी में चना विक्रय किया गया था, लेकिन आज तक भुगतान नहीं हुआ। जब अन्नदाता ही भूखों मरने की कगार पर है, इलाज कराने के लिए पैसे तक नही है| अपने पैसे का भुगतान पाने हेतु किसान लगातार इधर उधर हाथ पैर पटक रहे| लेकिन  भुगतान नहीं हो पा रहा।
इस लिए वह काफी परेशान हैं.एक ओर उत्तर प्रदेश सरकार किसान गरीब हितैषी बताने से नही चूकती और दूसरी ओर किसानों के खुद के अनाज का पैसा दवा पढाई और खाद बीज के काम नहीं आ रहा।इस बात की फरियाद किसानों ने सांसद से भी की है, लेकिन सिर्फ कागजी कार्यवाही कागजों तक सीमित रह गई है।तो ऐसे में किसान कहां जाएगा और कैसे उसकी आय दोगुनी होगी|

कर्ज लेकर कर रहे गुजारा

गाजीपुर के किसान बद्री प्रसाद पिता रामकिशुन का कहना है कि हमने 15 मई को अपना चाना सरकारी क्राय केंद्र नरैनी में  25 कुंतल बेचा था| जिसका एक लाख से ऊपर पैसा होता है.लेकिन अभी तक भुगतान नहीं हुआ| जबकि चने की दूसरी फसल बोवाई का काम शुरु हो गया है| अब हमारे पास खाने खर्चे और दवा तक का पैसा नहीं है। कर्ज लेकर किसी तरह गुजारा कर रहे हैं|
खेती जोतने बोने को पड़ी है,तो उसके लिए भी किसी के सामने कर्ज के लिए हांथ फैलाने पड़े गें| ऐसे में कहाँ से हम किसान अपनी आये दुगोनी कर पायें| जब हमें अपने खुद के अनाज के बेच का पैसा काम के समय नहीं मिल पाता है| हम किसानों के पास तो खेती ही एक सहरा है दूसरी तो कहीं से आय नहीं है| उसी में कडी़ मेहनत के साथ खेतों में काम करके रातो दिन खुन पसीना एक करते हैं| तब गल्ला देखने को मिलता है और जैसे ही घर गल्ला आता है, तो इतने खर्च होते हैं की तुरंत बाजार दिखाना पडता है| लेकिन गल्ला बिकने के बाद भी हमारी स्थिति जैसी की तैसी है,क्योंकि समय से भुगतान नहीं मिलता|

इस मामले को लेकर एसडीएम से भी कर चुके हैं शिकायत

शहबाजपुर गांव के किसान लल्लू बताते हैं कि मेरे पास 10 बीघा जमीन है परिवार में पांच लोग हैं| जिसका खाना खर्चा उसी खेती से चलता है| पिछले साल चना की फसल अच्छी हुई थी तो हमने सोचा सरकारी क्रय केंद्र में चना बेच ले तो भाव अच्छा मिलेगा| इस लिए 12 मई  को नरैनी के सरकारी केन्द्र में चना बेचा था,लेकिन उसका आज तक भुगतान नहीं हुआ| इस मामले को लेकर 20 जुलाई को उन्होने एसडीएम नरैनी को ज्ञापन भी दिया था कि उनका जल्दी भुगतान कराया जाये,पर कोई सुनवाई नहीं हुई|
जबकि फसल खेतों से आकर तैयार होते ही वह बाजार इस लिए दिखाते हैं कि खर्च में रुकावट न आये| अगर उनके पास इतना ही पैसा होता तो क्यों तुरंत बेचते,जबकि उस समय तो सरकारी रेट जरुर तय रहता है| पर फिर भी मद्दी होती है और  प्राइवेट में तो औने पौने दाम में ही खरीद लिया जाता है| लेकिन रेट के चक्कर में बच तो दिया| अब पैसे के लिए भटकना पड़ रहा है और अब पछता रहे हैं|
क्योंकि अब एक एक पैसा मुश्कील है और चिन्ता सता रही है कि इस साल कैसे  बोवाई जुताई और खाद बीज के लिए जुटाएं| साथ ही घर खर्च में दिक्कत आ रही है, पर पैसा नहीं मिल रहा प्राइवेट में भले ही कम रेट मिलता था पर नगद मिल जाता था| इस तरह की दिक्कत नहीं होती थी पर चार पैसा अधिक मिलने के चक्कर में फंस गये हैं और अब परेशान है| इधर उधर से कर्ज लेकर किसी तरह काम चला रहे हैं| किसी का 1 लाख पडा है, तो किसी का 80 और 40 हजार  किसान हर तरह से पीस रहा है|
पहले तो खेत से घर तक फसल तैयार करके लाने में ही खुन पसीना एक करना पड़ता है और दिन रात जानवरों से रखवाली करनी पड़ती है| जब घर से बाजार तक लाने के लिए आनाज पैदा कर पाते हैं,तो बाजार में पहले सरकारी केंद्रों में बेचने के लिए हफ्तों चक्कर लगाने पड़ते हैं और  घर का काम काज छोड़कर केंद्रों में पड़े रहना पड़ता है| अनाज की रखवाली के लिए और जब बिक जाता है, तो पैसे के लिए भटकना पड़ता है| यही कारण है की उनके सर से कर्ज का बोझ खत्म नहीं हो रहा और सरकार आय बढ़ाने का ढिंढोरा पीट रही है|