मध्य प्रदेश के छतरपुर शहर के सबसे व्यस्त चौराहों में शामिल चौबे तिराहा इन दिनों लोगों के लिए परेशानी और खतरे का कारण बना हुआ है। यहां लगा ट्रैफिक सिग्नल पिछले 2 महीनों से खराब पड़ा है। नतीजा यह है कि हर दिन हजारों लोग बिना किसी यातायात व्यवस्था के इस चौराहे से गुजरने को मजबूर हैं। सुबह स्कूल बसों से लेकर ऑफिस जाने वाले कर्मचारी, मरीजों को लेकर दौड़ती एंबुलेंस और बाजार जाने वाले लोग सभी को रोज जाम और दुर्घटना के खतरे का सामना करना पड़ता है।
रिपोर्ट – अलीमा, लेखन – सुचित्रा
खबर लहरिया की रिपोर्ट में पता चला कि चौबे तिराहे पर रोज सुबह और शाम सबसे ज्यादा भीड़ रहती है। ऐसे में चारों दिशाओं से आने वाले वाहन एक साथ निकलने की कोशिश करते हैं, जिससे कुछ ही मिनटों में लंबा जाम लग जाता है। दोपहिया चालक जगह-जगह से निकलने का प्रयास करते हैं, जबकि बस, ट्रक और ऑटो बीच सड़क में फंस जाते हैं। कई बार एंबुलेंस भी जाम में अटक जाती है जिससे मरीजों की जान तक खतरे में पड़ सकती है।
ट्रैफिक सिग्नल बंद न होने से ट्रैफिक पुलिस भी नहीं
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक ट्रैफिक सिग्नल चालू था तब तक यहां ट्रैफिक पुलिस की तैनाती रहती थी और यातायात काफी हद तक व्यवस्थित रहता था। लेकिन सिग्नल खराब होने के बाद पुलिसकर्मी भी नजर नहीं आते। अब हर वाहन चालक अपनी सुविधा के अनुसार निकलने की कोशिश करता है जिससे अव्यवस्था और बढ़ गई है।
छतरपुर निवासी लोकेश सिंह बताते हैं कि उनका ऑफिस चौबे तिराहे से करीब दो किलोमीटर दूर है और उन्हें रोज इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है।
उनका कहना है, “हर समय डर लगा रहता है कि कहीं बस या ट्रक की चपेट में न आ जाएं। यहां आसपास कई सरकारी कार्यालय हैं और बड़े अधिकारी भी रोज इसी रास्ते से गुजरते हैं लेकिन किसी की नजर इस खराब पड़े ट्रैफिक सिग्नल पर नहीं पड़ती। इसकी वजह से स्थानीय लोगों को रोज भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जब भी मैं यहां से गुजरता हूं, यही सोचता हूं कि सुरक्षित तरीके से कैसे निकलूं। सिग्नल बंद होने के कारण हर वाहन चालक अपनी मर्जी से आगे बढ़ने की कोशिश करता है, जिससे दुर्घटना का खतरा हमेशा बना रहता है। लेकिन मजबूरी है, क्योंकि यही एक मुख्य रास्ता है। मेरी प्रशासन और ट्रैफिक विभाग से अपील है कि इस सिग्नल को जल्द से जल्द ठीक कराया जाए ताकि लोगों को जाम और हादसों के खतरे से राहत मिल सके।”
ऑटो चालकों की भी बढ़ी मुश्किलें
ऑटो चालक निसार खान बताते हैं कि सिग्नल खराब होने से उनकी रोजी-रोटी भी प्रभावित हो रही है। वे कहते हैं, “सवारी को बाजार तक छोड़ने में पहले जहां कुछ मिनट लगते थे, अब कई बार आधा घंटा लग जाता है। लोग नियम नहीं मानते, इसलिए घंटों जाम लगा रहता है। पहले ट्रैफिक पुलिस रहती थी तो व्यवस्था बनी रहती थी, लेकिन अब हालात पूरी तरह भगवान भरोसे हैं।”
उनका आरोप है कि शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नहीं होती। उनका कहना है कि प्रशासनिक अधिकारी भी इसी रास्ते से गुजरते हैं लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा।
दुकानदार बोले “झगड़े रोज की बात”
चौराहे के पास दुकान चलाने वाले व्यापारियों का कहना है कि हर दिन वाहन चालकों के बीच बहस और विवाद की स्थिति बन जाती है। कई बार लोग खुद ट्रैफिक संभालने की कोशिश करते हैं, जबकि यह जिम्मेदारी प्रशासन की है।
एक दुकानदार ने बताया कि कुछ दिन पहले एक बुजुर्ग महिला सड़क पार कर रही थीं, तभी एक ई-रिक्शा ने उन्हें टक्कर मार दी। उनका कहना है कि यदि ट्रैफिक सिग्नल चालू होता तो शायद यह हादसा टल सकता था।
कुछ दुकानदारों ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत करने पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की धमकी मिलती है। इसी कारण अधिकांश लोग खुलकर शिकायत करने से बचते हैं।
पैदल राहगीरों और बच्चों की बढ़ी चिंता
सिर्फ वाहन चालक ही नहीं, बल्कि पैदल चलने वाले लोगों की परेशानी भी बढ़ गई है। सड़क पार करने के लिए लोगों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। कई बार मजबूरी में लोग दौड़कर सड़क पार करते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है।
स्कूल जाने वाले बच्चों के अभिभावकों का कहना है कि उन्हें रोज बच्चों की सुरक्षा की चिंता सताती है। उनका मानना है कि यदि ट्रैफिक सिग्नल चालू हो जाए और पुलिस की नियमित तैनाती रहे, तो दुर्घटनाओं का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है।
इस मामले में खबर लहरिया की रिपोर्टर में ट्रैफिक अधिकारी बृहस्पति साकेत से बात की। उन्होंने बताया कि ट्रैफिक सिग्नल पूरी तरह बंद नहीं थे, बल्कि बारिश के कारण तकनीकी खराबी आ गई थी। उन्होंने कहा कि इन सिग्नलों की मरम्मत स्थानीय स्तर पर नहीं होती, बल्कि उन्हें दिल्ली भेजना पड़ता है। सिग्नलों की मरम्मत का काम पूरा होने वाला है और अगले दो-तीन दिनों में उन्हें दोबारा स्थापित कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि सिग्नल खराब रहने के दौरान वहां दो ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी ताकि जाम की स्थिति न बने।
इस तरह की व्यवस्था सवाल खड़े करती है यदि सिग्नल महीनों से खराब था तो उसकी मरम्मत की प्रक्रिया समय पर क्यों शुरू नहीं की गई? यदि मरम्मत में समय लगना ही था, तो क्या वहां 24 घंटे ट्रैफिक पुलिस की स्थायी तैनाती नहीं होनी चाहिए थी? शहर के सबसे व्यस्त चौराहे पर व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। केवल खराबी की जानकारी देना पर्याप्त नहीं, बल्कि समय पर समाधान भी जरूरी है।

