नगर परिषद बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि अब उनके मोहल्ले की तस्वीर बदलेगी, कच्ची गलियां पक्की होंगी, नालियां बनेंगी और बरसात में कीचड़ से राहत मिलेगी। लेकिन पटना जिले के मसौढ़ी नगर परिषद के वार्ड नंबर 8 और 9 स्थित भदौरा मोहल्ले के कई परिवारों के लिए यह उम्मीद आज भी अधूरी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्ष 2003 के बाद से कई गलियों में न तो सड़क बनी और न ही नाली। हर साल नाप होती है, योजनाओं की चर्चा होती है लेकिन काम शुरू होने का इंतजार खत्म नहीं होता।
रिपोर्ट – सुमन, लेखन – सुचित्रा
मसौढ़ी, जिसे तारेगना के नाम से भी जाना जाता है। भारतीय राज्य बिहार के पटना जिले में एक शहर और नगर परिषद है। मसौढ़ी पटना जिले के 6 अनुमंडलों में से एक है। यह बिहार राज्य की राजधानी पटना से 30 किमी दूर स्थित है। मसौढ़ी नगर परिषद में मसौढ़ी प्रखंड के पांच राजस्व गांवों को साल 2020 में शामिल किया गया है। इनमें सरवां, दहीभत्ता, बरनी, भदौरा और दीघवा महादेवपुर राजस्व गांव को शामिल किया गया है।
नगर परिषद बनने के बावजूद विकास अधूरा
पटना जिले के मसौढ़ी नगर परिषद के वार्ड नंबर 8 और 9 में स्थित भदौरा मोहल्ले की कई गलियां आज भी बदहाल हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार बिहारी पंडित के घर से बुद्ध पंडित के घर तक का पूरा रास्ता खराब है। इस हिस्से में दोनों ओर मिलाकर लगभग 50 घर हैं।
गांव के मुख्य रास्ते तक पहुंचने का रास्ता तो है लेकिन अंदर की 3 से 4 गलियां और नौबतपुर की ओर जाने वाला मार्ग पूरी तरह जर्जर और कच्चा है। कई जगह सड़क की हालत खड़ंजे जैसी हो चुकी है। लोगों ने बताया कि वर्ष 2003 के बाद से इन गलियों में न तो सड़क का निर्माण हुआ और न ही नाली बनाई गई। उन्हें उम्मीद थी जब मसौढ़ी को 2020 में नगर परिषद में शामिल किया गया था कि अब विकास कार्य तेजी से होंगे। लेकिन छह साल बाद यानी आज 2026 में भी कई गलियां उसी हालत में हैं।
बरसात में सबसे ज्यादा परेशानी
कच्ची सड़क और नाली नहीं होने से बरसात के दिनों में हालात और खराब हो जाते हैं। बच्चों को स्कूल जाने, लोगों को काम पर निकलने और महिलाओं को रोजमर्रा के घरेलू काम करने में काफी दिक्कत होती है। कई घरों का निकास इसी रास्ते से है लेकिन सड़क नहीं होने के कारण हर बारिश में लोगों को कीचड़ और गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है।
कच्ची सड़क के किनारे रहने वाली रिंकू देवी बताती हैं कि “हमारे घर के ठीक सामने तक सड़क बनी हुई है लेकिन हमारी तरफ का हिस्सा छोड़ दिया गया। अब पता नहीं मुखिया पैसे खा जाते है या क्या करते हैं। हर साल अधिकारी नापी करने आते हैं और काम कराने का भरोसा देते हैं लेकिन निर्माण शुरू नहीं होता।”
वहीं पूनम देवी कहती हैं कि जब भी अधिकारी नाप करने आते हैं तो वह उनसे अनुरोध करती हैं कि जहां करीब आठ फीट जगह उपलब्ध है वहीं सड़क बना दी जाए। लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिलता है।
उनका कहना है, “खुली नाली की वजह से यहां हर समय बदबू रहती है। इसी रास्ते से करीब 6 से 10 घरों का आवागमन होता है लेकिन आज तक इस गली का निर्माण नहीं हुआ।”
पूनम देवी आगे बताती हैं कि उनकी गली और उससे आगे की कई गलियां अब भी कच्ची हैं। पीपल के पेड़ और सामुदायिक भवन के पास की गली समेत करीब 5 से 6 गलियां आज भी सड़क का इंतजार कर रही हैं। उनका कहना है कि सरकार और जनप्रतिनिधि सड़क बनाने की बात तो करते हैं लेकिन जमीन पर काम दिखाई नहीं देता।
2003 के बाद दोबारा सड़क नहीं बनी
रास्ते के किनारे रहने वाली महिलाओं का कहना है कि यह सड़क वर्ष 2003 में बनी थी। उसके बाद दोबारा कभी निर्माण नहीं हुआ। अब यह इलाका नगर परिषद का हिस्सा है और लोगों से हाउस टैक्स भी लिया जाता है। घरों पर नगर परिषद के टैक्स बोर्ड भी लगे हैं लेकिन बुनियादी सुविधाएं अब तक नहीं पहुंची हैं।
“पूरे गांव में सड़क बनी, हमारी गली रह गई”
दीपा देवी बताती हैं कि बचपन से सुनते आ रहे हैं कि सड़क बन जाएगी लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। गांव के अधिकांश हिस्सों में सड़क बन चुकी है लेकिन उनकी गली अब भी कच्ची है। बरसात में पानी भर जाता है और निकलना मुश्किल हो जाता है।
उनका कहना है कि चुनाव के समय वादे किए जाते हैं। अधिकारी और जनप्रतिनिधि सर्वे भी करते हैं लेकिन काम शुरू नहीं होता।
स्थानीय निवासी उपेंद्र पासवान बताते हैं कि भदौरा की आबादी लगभग चार हजार के आसपास है। वार्ड 8 और 9 दोनों में यह मोहल्ला आता है। उनका कहना है कि कई बार सड़क निर्माण की चर्चा और टेंडर की जानकारी मिली लेकिन जमीन पर काम नजर नहीं आया।
मुख्य सड़क से ही सर्वे कर लौट जाते हैं अधिकारी – आरोप
वहीं नागेंद्र पासवान का कहना है कि पंचायत भवन से आगे तक सड़क का निर्माण कराया गया है और दूसरी दिशा में भी सड़क बनी हुई है लेकिन उनके मोहल्ले की कई गलियों को छोड़ दिया गया। उन्होंने कहा कि मुख्य सड़क पर आने-जाने वाले मार्गों का निर्माण तो कर दिया गया लेकिन गांव की अंदरूनी गलियां जो एक मोहल्ले को दूसरे मोहल्ले से जोड़ती हैं, आज भी नहीं बनी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब कोई अधिकारी सर्वे करने आता है तो आमतौर पर मुख्य सड़क तक ही निरीक्षण कर लौट जाता है। गांव के अंदर की गलियों की वास्तविक स्थिति देखने की कोशिश नहीं की जाती। उनका कहना है कि इसी वजह से वर्षों से इन गलियों का विकास नहीं हो पाया।
प्रस्ताव भेजा गया जल्दी काम शुरू करने का आश्वासन
वार्ड पार्षद मधु पाल जो की एक महिला है उनसे कॉल पर खबर लहरिया की रिपोर्टर से बात हुई। उन्होंने बताया कि गांव की तीन से चार गलियां ऐसी हैं, जहां सड़क बननी चाहिए। उन्होंने इस संबंध में नगर परिषद चेयरमैन को जानकारी दी है। उनका कहना है कि प्रस्ताव भेजा जा चुका है और उम्मीद है कि जल्द काम शुरू होगा।
नगर परिषद पर नहीं मिले अधिकारी
जब इस मामले में खबर लहरिया की रिपोर्टर ने नगर परिषद कार्यालय पहुंचकर अधिकारियों से बात करने की कोशिश की तो संबंधित अधिकारी मौजूद नहीं मिले। कई बार प्रयास करने के बावजूद किसी जिम्मेदार अधिकारी का स्पष्ट जवाब नहीं मिला।
हालांकि, बाद में नगर परिषद कार्यालय में जानकारी मिली कि अन्य इलाकों के साथ वार्ड नंबर 8 और 9 के कुछ हिस्सों के लिए भी टेंडर स्वीकृत हुआ है। बताया गया कि जल्द सड़क निर्माण का काम शुरू किया जाएगा और कुछ स्थानों पर काम शुरू भी हो चुका है।
ऐसा अक्सर देखा जाता है जब किसी समस्या को लेकर अधिकारी के पास जाते हैं तो वो या तो उस समय मिलते नहीं है या तो बातचीत करने को तैयार नहीं होते हैं। ऐसा ही इस मामले में हुआ अगर नगर परिषद के अधिकारी कार्यालय में ही उपलब्ध नहीं होंगे और लोगों को केवल आश्वासन मिलेगा, तो आम नागरिक अपनी समस्याएं किसके सामने रखें?
देखा जाये तो भदौरा नगर परिषद का हिस्सा है। यहां के लोग हाउस टैक्स भी देते हैं। यदि टैक्स वसूला जा रहा है, तो फिर बुनियादी सुविधाएं समय पर क्यों नहीं मिल रहीं? यदि हर साल गली बनने के लिए नाप होती है तो अभी तक गली क्यों नहीं बनाई गई। आखिर कब तक गलियों में लोग रोज कीचड़ से गुजरेंगे?
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