उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले के राजापुर थाना क्षेत्र के भभेट गांव से पुलिस पर मारपीट का गंभीर आरोप सामने आया है। गांव निवासी शिव नारायण का आरोप है कि 13 मई 2026 को उनके भाई रज्जू प्रसाद को 112 नंबर पुलिस अपने साथ ले गई और रास्ते में बेरहमी से पीटा। परिवार का दावा है कि युवक के शरीर पर कई जगह गहरे नील और चोट के निशान थे।
क्या है पूरा मामला
परिवार के मुताबिक 13 मई की सुबह रज्जू प्रसाद और उनकी पत्नी के बीच घरेलू विवाद हो रहा था। इसी दौरान पत्नी ने पुलिस बुलाने की बात कही, जिस पर गुस्से में रज्जू प्रसाद ने खुद ही 112 नंबर डायल कर दिया। आरोप है कि दोपहर करीब 12 बजे पुलिस गांव पहुंची और रज्जू को अपने साथ ले गई। रज्जू के भाई शिव नारायण ने बताया कि रास्ते में पुलिस और रज्जू के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हुई होगी, हालांकि उस समय परिवार का कोई सदस्य मौके पर मौजूद नहीं था। उनका आरोप है कि इसी दौरान पुलिसकर्मियों ने रज्जू को बुरी तरह पीटा।
शरीर पर चोट और सूजन से मारपीट का पता चला
शिव नारायण के अनुसार जब दोपहर करीब 3 बजे परिवार रज्जू को लेने थाने पहुंचा तो पुलिस ने उसे नहीं छोड़ा। बाद में शाम करीब 5 बजे जब रज्जू घर पहुंचा तो वह ठीक से चल भी नहीं पा रहा था। शुरुआत में उसने कुछ नहीं बताया, लेकिन जब परिवार ने उसके शरीर पर सूजन और नील के निशान देखे तो पूछताछ करने पर उसने कथित तौर पर पुलिस पिटाई की बात बताई।
पुलिस पर डराने और धमकी का आरोप
परिवार का आरोप है कि पुलिस ने रज्जू को धमकाया था कि अगर उसने किसी को कुछ बताया तो उसे फिर से फंसा दिया जाएगा। इसी डर की वजह से वह चुप था। शिव नारायण ने बताया कि 14 मई को वह शिकायत लेकर राजापुर थाने पहुंचे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया कि शाम को आकर बात करें। उनका कहना है कि जिन पुलिसकर्मियों पर मारपीट का आरोप है, उनके नाम उन्हें नहीं पता। लेकिन जब वह थाने पहुंचे तब वे वहां मौजूद थे। हालांकि कुछ ही देर बाद, ड्यूटी का समय बाकी होने के बावजूद वे वहां से चले गए।
परिवार ने मजबूरी में किया पुलिस से समझौता
शिव नारायण के अनुसार पुलिस ने कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद परिवार वापस घर लौट आया। शाम करीब 5 बजे वह दोबारा थाने पहुंचे, लेकिन बाद में परिवार ने पुलिस से समझौता कर लिया।
उन्होंने कहा, “हम गरीब लोग हैं और पुलिस से लड़ नहीं सकते। कानून उनके हाथ में है। अगर मामला आगे बढ़ाते तो बार-बार थाने और कोतवाली के चक्कर लगाने पड़ते। हमें इसी इलाके में रहना है और आगे भी पुलिस की जरूरत पड़ सकती है। इसी मजबूरी में समझौता करना पड़ा। उन्होंने अपनी गलती मान ली, इसलिए हम चुप हो गए।”
वहीं राजापुर थाना प्रभारी लखन सिंह ने मामले को पति-पत्नी के बीच का विवाद बताते हुए कहा कि अब दोनों पक्षों में समझौता हो गया है। उन्होंने कहा कि शराब के नशे में विवाद हुआ था और मारपीट जैसी कोई बात नहीं थी। हालांकि थाना प्रभारी ने पुलिस पर लगे आरोपों को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
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