बिहार के खगड़िया जिले के परबत्ता थाना क्षेत्र के तेमथा कराची पंचायत से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। आरोप है कि गुरुवार रात 14 मई को 23 वर्षीय युवक बिट्टू कुमार पर उसके ही दोस्तों ने चाकू से जानलेवा हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल युवक फिलहाल अस्पताल में जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहा है। फ़िलहाल हमले की वजह पता नहीं चल पाई है और पुलिस मामले की जाँच कर रही है।
रिपोर्ट – सुमन, लेखन – सुचित्रा
इस तरह की घटना सुनकर एक बार फिर दोस्ती के रिश्ते पर संदेह होने लगता है। एक दोस्त ही तो होता है जिससे हम अपनी हर बात शेयर करते हैं और सुख दुःख में याद करते हैं। लेकिन जब दोस्त ही दुख का कारण बन जाए तो दोस्ती पर से भरोसा उठना लाजमी है।
पूरा मामला
घटना गुरुवार रात करीब 8:30 से 9:00 बजे के बीच की बताई जा रही है। खबर लहरिया को जानकारी मिली कि बिट्टू कुमार शाम को अपने घर के काम में परिवार की मदद कर रहा था और बाद में अपने रिश्तेदार के साथ घर से निकला था। इसी दौरान घर से लगभग 50 मीटर की दूरी पर उस पर हमला कर दिया गया। ग्रामीणों के अनुसार हमले के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए, जबकि स्थानीय लोगों ने घायल युवक को बचाकर तुरंत अस्पताल पहुंचाया।
हालत गंभीर होने पर बेगूसराय रेफर
गांव के निवासी परवीन (बदला हुआ नाम) ने खबर लहरिया को बताया कि घायल बिट्टू को पहले परबत्ता प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से उसे खगड़िया सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों ने उसकी हालत गंभीर देखते हुए उसे आगे रेफर किया। इसके बाद परिजनों ने उसे बेगूसराय के एक निजी अस्पताल में रात करीब 10 बजे भर्ती कराया, जहां आज सुबह 4 बजे उसका ऑपरेशन किया गया।
पिता का दर्द और आरोप
बिट्टू कुमार के पिता केदार शर्मा बताते हैं कि उनका बेटा 23 वर्ष का था और मुंबई में रहकर काम करता था। करीब डेढ़ महीने पहले उसकी तबीयत खराब हो गई थी, जिसके बाद वह घर वापस आ गया था और तभी से गांव में ही रह रहा था। उस दिन बिट्टू रोज की तरह घर के कामों में उनकी मदद करता था। उन्होंने बताया कि वह खेती-किसानी करते हैं और पशुपालन भी करते हैं। घटना वाले दिन शाम के समय बिट्टू ने जानवरों को चारा डाला और इसके बाद गांव में ही रहने वाले अपने बहनोई अमरेश कुमार के साथ घर से निकल गया।
कुछ देर बाद परिवार को जानकारी मिली कि घर से करीब 50 मीटर की दूरी पर किसी ने बिट्टू पर चाकू से हमला कर दिया है। उनका आरोप है कि गांव के ही संजीव कुमार और संतोष कुमार ने मिलकर इस हमले को अंजाम दिया। घायल युवक ने भी अस्पताल में होश आने पर इन्हीं दोनों के नाम बताए।
गंभीर चोटों से जूझ रहा युवक
बिट्टू कुमार के पिता ने बताया कि हमले में उनके बेटे को कई गंभीर चोटें आई हैं। उनके अनुसार, उसके हाथ पर इतना गहरा वार किया गया कि हाथ लगभग कट गया और सिर्फ मांस के सहारे लटका हुआ है। इसके अलावा सिर, गर्दन और पेट पर भी गहरे घाव हैं। परिवार का कहना है कि पेट पर हमला इतना गंभीर था कि अंदरूनी हिस्से बाहर तक आ गए थे।
रोते हुए पिता ने बताया कि वह खुद शुगर के मरीज हैं और बेटे की हालत देखकर पूरी तरह टूट चुके हैं। उन्होंने कहा कि सुबह जब वह अस्पताल से लौट रहे थे, तब डॉक्टरों ने बताया कि बिट्टू के दाहिने फेफड़े के पास भी चाकू का गहरा घाव है। डॉक्टरों ने उसकी हालत बेहद नाजुक बताई है। पिता का कहना है कि शरीर पर लगी अन्य चोटें भी काफी गंभीर हैं, जिससे पूरा परिवार चिंता और निराशा में है।
हमले की वजह स्पष्ट नहीं
घटना के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है। बहनों और अन्य परिजनों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि बिट्टू कुमार का किसी से कोई पुराना विवाद नहीं था, जिससे यह घटना और भी रहस्यमयी हो जाती है।
वहीं दूसरे पक्ष से संजीव कुमार की मां अधिनास देवी ने बताया कि संजीव कुमार उनका दूसरा बेटा है और उसकी उम्र करीब 23 साल है। उन्होंने कहा कि बिट्टू कुमार और संजीव के बीच अच्छी दोस्ती थी। दोनों का साथ उठना-बैठना, खाना-पीना और आना-जाना था।
अधिनास देवी का कहना है कि उन्हें नहीं पता कि उनके बेटे ने इस घटना को अंजाम दिया है या नहीं। उन्होंने बताया कि घटना वाले दिन संजीव सुबह ही भागलपुर में एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए निकल गया था। जब से उन्हें पता चला कि इस मामले में उनके बेटे का नाम सामने आ रहा है, तब से वह घर वापस नहीं आया है। उन्होंने कहा कि फिलहाल उन्हें इस मामले में ज्यादा जानकारी नहीं है।
संजीव कुमार के भाई ने फोन कॉल पर बताया कि दोनों युवक अच्छे दोस्त थे और ऐसी घटना होना बेहद दुखद है। उन्होंने नाम सार्वजनिक न करने की बात कहते हुए कहा कि अगर उनका भाई इस मामले में शामिल पाया जाता है तो वे चाहते हैं कि गांव में आपसी समझौते से मामला सुलझ जाए और विवाद ज्यादा न बढ़े।
दूसरे आरोपी पक्ष से संतोष कुमार की मां सुमित्रा देवी ने बताया कि उनके बेटे की उम्र भी करीब 20 से 23 वर्ष के बीच है और वह भी बिट्टू कुमार का दोस्त था। उन्होंने कहा कि घटना वाले दिन शाम को संतोष गांव के पास स्थित बगीचे से लीची टेंपो में भरकर पहुंचाने गया था और उसके बाद से घर वापस नहीं लौटा है।
सुमित्रा देवी का कहना है कि गांव में हुई इस घटना में बेटे का नाम आने के बाद वह शायद डर गया है, इसलिए घर नहीं आ रहा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि उनका बेटा घटना में शामिल था या नहीं।
पुलिस की जांच जारी
परबत्ता थाना प्रभारी प्रभाकर कुमार ने बताया कि घायल के बयान के आधार पर दो लोगों के नाम सामने आए हैं, लेकिन अभी तक लिखित शिकायत नहीं मिली है। पुलिस का कहना है कि आवेदन मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी और पूरे मामले की जांच की जा रही है। घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और जल्द ही पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।
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