खबर लहरिया Blog यूपी विधानसभा चुनाव नज़दीक, चुनाव से पहले कांग्रेस का फोकस दलित समाज 

यूपी विधानसभा चुनाव नज़दीक, चुनाव से पहले कांग्रेस का फोकस दलित समाज 

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल धीरे-धीरे गर्म होने लगा है। सभी बड़ी पार्टियां अपनी चुनावी तैयारी में जुट गई हैं और खास तौर पर दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही हैं।- 

फोटो साभार: नव भारत टाइम्स

इसी सिलसिले में 20 मई 2026 को राहुल गांधी दो दिन के दौरे पर रायबरेली पहुंचे थे संसदीय क्षेत्र रायबरेली के लोधवारी गांव में स्वतंत्रता सेनानी महाबली वीरा पासी की प्रतिमा का अनावरण (उद्घाटन) किया। यहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते दिखे। दौरे के दौरान राहुल गांधी ने 1857 की क्रांति के नायक महाबली वीरा पासी की मूर्ति का उद्घाटन भी किया। माना जा रहा है कि इसके जरिए कांग्रेस ने आने वाले चुनाव को देखते हुए दलित समाज तक अपनी पहुंच मजबूत करने का संदेश देने की कोशिश की है। 

राहुल गांधी ने कहा “आज हम वीरा पासी जी को याद कर रहे हैं, जो विचारधारा अंबेडकर और वीरापासी की थी उसकी रक्षा ठीक से नही हो रही है। हमारे सामने संविधान पर हमला हो रहा है। संविधान कोई मामूली किताब नही है यह किताब एक विचारधारा है जोकि अंबेडकर, वीरा पासी, महात्मा गांधी के खून में थी। हमारे आंखों के सामने इस विचारधारा का अपमान होता है तो हम चुप हो जाते हैं।”

उन्होंने कहा कि “नरेंद्र मोदी आपसे कहते हैं कि विदेश मत जाओ, आपसे कहते हैं सोना मत ख़रीदो, आपसे कहते हैं इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदो। आने वाले समय में किसान के पास खाद नहीं होगा, आप लोग देखना महंगाई कहां जाती है। वे कहते हैं विदेश मत जाओ और फिर हज़ारों करोड़ों रुपए के जहाज़ में विदेश चला जाता है, आप एक शब्द नहीं बोलते हो। अगर हम अंबेडकर की बात करें वीरा पासी जी की बात करें तो हमारी जिम्मेदारी है कि उनके विचारों की  हम रक्षा करें।” 

रायबरेली और अमेठी की करीब छह विधानसभा सीटों पर दलित वोटर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इनमें पांच सीटें रायबरेली लोकसभा क्षेत्र में आती हैं जबकि एक सीट अमेठी में है। विधानसभा स्तर पर देखें तो बछरावां सीट सुरक्षित मानी जाती है क्योंकि वहां दलित मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा है। इसके अलावा सदर, हरचंदपुर, ऊंचाहार और सरेनी सीटों पर भी दलित वोटरों का असर काफी मजबूत माना जाता है। वहीं अमेठी लोकसभा क्षेत्र में सलोन और जगदीशपुर सीट दलित उम्मीदवारों के लिए सुरक्षित हैं।

रायबरेली और अमेठी को लंबे समय तक कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा लेकिन समय के साथ विधानसभा चुनावों में पार्टी की स्थिति कमजोर होती चली गई। फिलहाल रायबरेली में कांग्रेस के पास एक भी विधानसभा सीट नहीं है। यही वजह है कि राहुल गांधी लगातार इन इलाकों में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। लोकसभा चुनाव जीतने के बाद यह उनका रायबरेली का सातवां दौरा था। इससे पहले वे मान्यवर कांशीराम जयंती कार्यक्रम में भी पहुंचे थे। मान्यवर कांशीराम जयंती के अवसर पर लखनऊ में आयोजित कांग्रेस के कार्यक्रम में राहुल गांधी ने बहुजन समाज पार्टी (BSP) संस्थापक कांशीराम के संघर्षों को याद किया और उन्हें ‘भारत रत्न’ देने की मांग की।

उन्होंने कहा “ अगर जवाहर लाल नहरू जिंदा होते तो कांशीराम जी कांग्रेश के चीफ मिनिस्टर होते। इंटरनेट पर जाइए और पांच सौ कंपनियो का नाम निकाल के देख लीजिए वहां पे दलित,आदिवासी, पिछड़ा कितने हैं आपको नहीं मिलेगा। अडानी की कंपनी में जाइए उनके सप्लायर के सिट्स निकालिए वहां एक भी दलित और एक भी आदिवासी नहीं मिलगे।” 

बता दें कांशीराम बहुजन समाज पार्टी (BSP) के संस्थापक और भारत के एक प्रमुख दलित राजनेता व समाज सुधारक थे। उन्होंने भारत में बहुजन (दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक) समुदायों को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें सत्ता में उनकी उचित भागीदारी दिलाने के लिए आजीवन संघर्ष किया।

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार उत्तर प्रदेश की राजनीति में पासी समाज को काफी अहम माना जाता है। राज्य की अनुसूचित जाति आबादी में पासी समुदाय की हिस्सेदारी करीब 7 प्रतिशत है और जाटवों के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा दलित समुदाय माना जाता है। हालांकि और राज्यों में भी उनकी मौजूदगी है लेकिन सबसे ज्यादा आबादी उत्तर प्रदेश में ही है।

पिछले कुछ वर्षों में समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बसपा जैसी पार्टियां दलित नायकों और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को प्रमुखता से उठाती रही हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद फैजाबाद से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने लोकसभा में शपथ लेते समय वीरांगना उदा देवी और महाराजा बिजली पासी का नाम लिया था। उदा देवी को 1857 के विद्रोह में बेगम हजरत महल की सेना के साथ अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने के लिए याद किया जाता है। नवंबर 2022 में समाजवादी पार्टी ने अपने मुख्यालय में उनकी पुण्यतिथि भी मनाई थी। 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के पांच पासी उम्मीदवारों की जीत को भी इस समुदाय के बढ़ते राजनीतिक असर के रूप में देखा गया जबकि भाजपा के केवल तीन पासी उम्मीदवार ही जीत सके थे।

वीरा पासी कौन हैं? 

1857 की क्रांति में वीरा पासी को रायबरेली इलाके के बहादुर योद्धाओं में गिना जाता है। वे रायबरेली की शंकरपुर रियासत के राजा राणा बेनी माधव बख्श सिंह के करीबी साथी और सेना के प्रमुख लोग में शामिल थे। वीरा पासी दलित समाज की पासी जाति से आते थे। उनका जन्म 11 नवंबर 1835 को रायबरेली जिले के लोधवारी गांव में एक गरीब परिवार में हुआ था। बचपन में ही माता पिता की मौत हो जाने के बाद वे अपने बहन के घर रहने लगे। गांव की बोली में बहन के घर रहने वाले भाई को ‘वीरना’ कहा जाता था जो आगे चल कर वीरा नाम से पहचाना जाने लगा। कहा जाता है कि उनकी ताक़त साहस और लड़ने की क्षमता को देखकर राणा बेनी माधव ने उन्हें अपनी सेना में शामिल किया था। 

लोककथाओं और स्थानीय कहानियो के अनुसार 1857 के विद्रोह के दौरान अंग्रेजों ने एक समय राणा बेनी माधव को पकड़ लिया था। उस समय वीरा पासी ने उन्हें अंग्रेजों के कैद से छुड़ा लिया था। इसके बाद अंग्रेज सरकार ने वीरा पासी को पकड़वाने या उनकी जानकारी देने वाले के लिए 50 हजार रुपए देने का इनाम घोषित कर दिया था। हलांकी इतिहास की किताबों में उनका नाम ज़्यादा देखने को नहीं मिलता लेकिन रायबरेली और आस पास के गांव में आज भी लोग उनकी बहादुरी की कहानियाँ सुनाते हैं। माना जाता है कि अंग्रेजों से लड़ाई के दौरान राणा बेनी माधव की रक्षा करते हुए वीरा पासी ने अपनी जान गंवा दी थी। 

 

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