उत्तर प्रदेश के जिला प्रयागराज से एक खबर सामने आई है जहां प्रयागराज के टकराई गांव में रहने वाले झल्लर द्वारा बताया गया कि गांव के करीब 25 किसानों की लगभग 400 बीघा जमीन एके इंफ़्रा ड्रीम लिमिटेड कंपनी को देने की बात हुई थी। जो किसानों की खुद की जमीन है। कंपनी उस जगह में सौर ऊर्जा लगाने के लिए जमीन खरीदना चाहती थी।
रिपोर्ट – सुनीता, लेखन – रचना
झल्लर के मुताबिक करीब दो साल पहले कंपनी के तरफ से किसानों को बयान दिया गया था। जिसका कोई लिखित में कागजात नहीं है। उन्हें जमीन के बदले पांच लाख रुपए मिले थे जबकि बाकी किसानों को एक-एक लाख रुपए दिए गए थे। उस समय कहा गया था कि बाकी का पैसा धीरे-धीरे दे दिया जाएगा और बाद में जमीन की रजिस्ट्री भी करवा ली जाएगी।
किसानों का कहना है कि जमीन का दाम हाईवे किनारे होने की वजह से दो करोड़ रुपए प्रति बीघा तय हुआ था। इसको लेकर किसानों और जमीन खरीदने वालों के बीच बैठक भी हुई थी लेकिन पूरी बात लिखित में नहीं हुई थी। सिर्फ बयान का पैसा स्टाम्प पेपर पर लिखा गया था। झल्लर के मुताबिक बयाना देने के बाद से कंपनी ने ना तो बाकी पैसा दिया है और न ही रजिस्ट्री करवाई है। अब कंपनी जमीन लेने से मना कर रही है और बयाने का पैसा वापस मांग रही है। किसानों का कहना है कि वे गरीब लोग हैं और दो साल बाद इतना पैसा वापस करना उनके लिए आसान नहीं है, कंपनी या तो जमीन खरीदे या फिर इस मामले का कोई समाधान निकाले।
जमीन का सौदा अधूरा
विश्वनाथ नाम के किसान ने अपनी तकलीफ़ें भी बयां की और कहा कि उन्होंने अपने घर की मरम्मत और बूढ़े बाप के इलाज के खर्च के कारण जमीन बेचने का फैसला किया था। उनके पिता कैंसर से पीड़ित हैं इसलिए पैसों की जरुरत थी लेकिन उस समय पर उतना पैसा नहीं मिला और इलाज ठीक से नहीं हो पाने की वजह से उनके पिता की मौत हो गई। उनकी हाईवे किनारे करीब चार बिस्वा जमीन थी। जमीन का सौदा करीब 40 लाख रुपए में डिलीट हुआ था लेकिन अब तक केवल एक लाख रुपए ही मिल पाया है। उन्होंने बताया जमीन अभी भी ख़रीदने वाले के कब्जे में है। जिन्होंने जमीन लिया है उन्होंने खेत में जीएसबी डलवाकर गड्ढा भी खुदवा दिया है।जबकि पहले वह बराबर खेत था जिसमें सरसों की खेती होती थी।
“हम लोग खेती के सहारे ही हैं और उसी से जीवन चलता है खेती में पैसा लगाने के बाद ही अनाज पैदा होता है और उसी से घर चलता है। हमारे पास कोई और नौकरी भी नहीं है। अब हमसे बयान का पैसा वापस मांगा जा रहा है, हम इतने पैसे कहाँ से वापस करेंगे।” उनका कहना है कि उनके साथ अन्याय हो रहा है।
किसान देवराज का कहना है कि अब कंपनी जमीन लेने से मना कर रही है और किसानों को धमकियाँ भी दी जा रही है। उनका आरोप है कि कंपनी के लोग कह रहे हैं कि अगर बयाने का पैसा वापस नहीं किया गया तो जान से मरवा देंगे। इस मामले में कई बार लिखित शिकायत भी उप जिला अधिकारी को दी गई है लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। 17 मई को किसानों ने प्रयागराज में पत्रकार वार्ता कर अपनी बात रखी और बताया कि उनके साथ अन्याय हो रहा है। “हम सिर्फ जमीन दे सकते हैं वह भी उसी रेट पर जो पहले तय हुआ था।”
हाईवे किनारे की जमीन का दाम दो करोड़ रुपए तय हुआ था जबकि सड़क से थोड़ी दूर की जमीन की कीमत का रेट करीब एक करोड़ तीस लाख रुपए तय किया गया था। उनकी करीब चार बिस्वा जमीन इस सौदे में शामिल थी। अब कंपनी का कहना है कि जितना बयाना मिला है उतने में ही जमीन की रजिस्ट्री कर दी जाए। “ऐसी कोई बात नहीं हुई थी कंपनी वाले हम किसान को डरा धमका रहे हैं शायद इसी दबाव में जमीन अपने नाम लिखवाना चाहते हैं।”
वहीं इस मामले पर जमीन ख़रीदने वाले हिमांशु से भी बात की गई तो उसने अपने पक्ष में कहा कि जब जमीन ख़रीदने का सौदा हुआ था तब हाईवे किनारे की जमीन का रेट एक करोड़ रुपए तय हुआ था लेकिन अब किसान दो करोड़ मांग रहे हैं इसलिए विवाद की स्थिति बन गई है। “हमने किसानों से कहा है कि अगर इस रेट पर जमीन नहीं देनी है तो हमारे बयाने का पैसा वापस कर दें और अपनी जमीन अपने पास रख लें।”
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