खबर लहरिया Blog Bihar News: ‘पाटलिपुत्र सैटेलाइट टाउनशिप’ परियोजना के खिलाफ किसानों का एकदिवसीय धरना

Bihar News: ‘पाटलिपुत्र सैटेलाइट टाउनशिप’ परियोजना के खिलाफ किसानों का एकदिवसीय धरना

बिहार सरकार ने जिस पाटलिपुत्र सैटेलाइट परियोजना के प्रस्ताव को 22 अप्रैल 2026 को मंजूरी दी थी, अब किसानों के बड़े विरोध का कारण बनती जा रही है। पटना जिले के पुनपुन प्रखंड में किसानों ने आज शुक्रवार 22 मई 2026 को एकदिवसीय धरना देकर सरकार के फैसले के खिलाफ आवाज बुलंद की। किसानों का कहना है कि सरकार विकास के नाम पर उनकी उपजाऊ जमीन छीन रही है, जबकि उनका पूरा जीवन खेती पर निर्भर है।

किसान सहभागिता विकास मोर्चा द्वारा आयोजित पाटलिपुत्र सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना के विरोध में लगाया गया बैनर (फोटो साभार: सुमन)

रिपोर्ट – सुमन, लेखन – सुचित्रा 

दरअसल, बिहार की नई सम्राट चौधरी सरकार ने राज्य के 11 शहरों में नए सैटेलाइट टाउन बनाने की घोषणा की है। 22 अप्रैल 2026 को हुई सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। कैबिनेट की मंजूरी के साथ ही इन परियोजनाओं के लिए चिन्हित गांवों में जमीन की खरीद-बिक्री पर तत्काल प्रभाव से 31 मार्च 2027 तक अस्थायी रोक लगाने का फैसला लिया है, ताकि भू-माफियाओं की गतिविधियों को रोका जा सके। हालांकि, इस परियोजना से किसान नाखुश है। किसानों का आरोप है कि सरकार ने बिना उनकी सहमति के यह फैसला लिया है।

पाटलिपुत्र सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना क्या है?

पाटलिपुत्र सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना बिहार सरकार की एक बड़ी शहरी विकास योजना है। इसका मकसद पटना शहर के बढ़ते दबाव को कम करना और राजधानी के आसपास आधुनिक तरीके से नए शहर बसाना है।
सरकार पटना के आसपास के इलाकों – जैसे पुनपुन, नौबतपुर, फुलवारी, मसौढ़ी, संपतचक और फतुहा में एक नया “मॉडर्न शहर” बनाना चाहती है। इसे ही सैटेलाइट टाउनशिप कहा जा रहा है। इसमें चौड़ी सड़कें, बड़े अस्पताल, स्कूल-कॉलेज, आईटी पार्क, मार्केट और मॉल, पार्क और खेल परिसर, बेहतर बिजली और पानी व्यवस्था जैसी सुविधा उपलब्ध होगी।

पाटलिपुत्र सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना के खिलाफ धरना प्रदर्शन

‘पाटलिपुत्र सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना’ को लेकर 100 गांव के किसानों ने आज 22 मई को पुनपुन प्रखंड पर धरना दे रहे हैं। यह धरना आज शाम 5 बजे तक है। खबर लहरिया को प्रदर्शन कर रहे किसानों ने बताया कि इस आंदोलन का कोई एक नेता नहीं है। सभी किसान अपनी इच्छा से आंदोलन में शामिल हुए हैं। पुनपुन प्रखंड की 12 पंचायतों से किसान यहां पहुंचे हैं। जिन किसानों की जमीन इस परियोजना में जा रही है, वे किसान तेज गर्मी में बैठकर धरना दे रहे हैं। उन्हें इस गर्मी और धूप की कोई परवाह नहीं उन्हें बस अपनी उपजाऊ जमीन को लेकर चिंता है। धरने में शामिल किसानों का कहना है कि उनकी पुश्तैनी और उपजाऊ जमीन अगर चली गई, तो उनके पास जीवनयापन का कोई साधन नहीं बचेगा।

धरने पर बैठे किसान (फोटो साभार: सुमन)

खबर लहरिया को जोल बिगहा गांव के किसान रौशन लाल गुप्ता ने बताया कि उनके गांव के लगभग 150 किसानों की जमीन इस परियोजना में आ रही है। उन्होंने कहा कि उनकी 10 बीघा उपजाऊ जमीन चली जाएगी, जिससे परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा।

किसान गजेंद्र सिंह, जिनकी करीब साढ़े तीन बीघा जमीन प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि इलाके के 80 प्रतिशत लोग खेती पर निर्भर हैं। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर किसान खेती नहीं करेंगे तो लोग खाएंगे क्या। उन्होंने सरकार से इस योजना पर पुनर्विचार करने की मांग की और आरोप लगाया कि किसानों की जमीन कॉर्पोरेट कंपनियों को देने की तैयारी की जा रही है।

जमीन ही किसानों के लिए सहारा

किसानों का कहना है कि खेती ही उनके परिवार का सहारा है। बच्चों की पढ़ाई, बेटियों की शादी और घर का पूरा खर्च खेती से चलता है। ऐसे में जमीन छिन जाने के बाद उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।

किसानों का आरोप

किसानों ने सरकार पर रोजगार को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि अगर सरकार यहां फैक्ट्री लगाती, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता, तो वे उसका समर्थन करते। लेकिन सरकार रोजगार देने के बजाय विदेशी कंपनियों को बसाने के लिए किसानों की जमीन जबरन लेने का काम कर रही है।

किसानों की मांग

धरने में मौजूद बहरामा पंचायत के मुखिया रवि ने भी सरकार से परियोजना रोकने की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर सरकार को टाउनशिप बनानी ही है तो बंजर जमीन पर बनाए, लेकिन किसानों की उपजाऊ जमीन को न छीना जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि जमीन की रजिस्ट्री पर लगी रोक हटाई जाए ताकि किसान अपनी जमीन का उपयोग अपनी इच्छा के अनुसार कर सकें। क्योंकि यदि इमरजेंसी में उन्हें जमीन बेचनी हो तो वो कहाँ से पैसा लाएंगे। एक जमीन तो उनके लिए पैसा है जिसे गिरवी रखकर या बेचकर पैसा का प्रबंध करते हैं।

किसानों ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर एक आवेदन तैयार कर रहे हैं, जिसे शाम पांच बजे तक बीडीओ, एसडीओ और अन्य अधिकारियों को सौंपा जाएगा, ताकि उनकी आवाज सरकार और मुख्यमंत्री तक पहुंच सके।
वहीं इस मामले पर जब बीडीओ शैलेश कुमार केसरी से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि प्रदर्शन चल रहा है, लेकिन अभी तक उन्हें कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर आवेदन मिलता है तो उसे संबंधित उच्च अधिकारियों को भेज दिया जाएगा। बीडीओ ने यह भी कहा कि यह मामला उनके अधिकार क्षेत्र से ऊपर का है और आगे का निर्णय वरिष्ठ अधिकारी ही लेंगे। उन्होंने इस मुद्दे पर अधिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

 

 

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