मज़दूर दिवस पर जहां देशभर में मेहनतकश लोगों के हक और सम्मान की बात होती है, वहीं उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के बेलाताल से एक अलग ही तस्वीर सामने आती है। यहां बसोर समुदाय के लोगों का आरोप है कि उनके पास मनरेगा के जॉब कार्ड होने के बावजूद उन्हें काम नहीं दिया जाता—और इसकी वजह जातिगत भेदभाव है। सवाल उठता है—क्या आज भी काम पाने के लिए पहचान और जाति मायने रखती है? क्या सरकारी योजनाएं भी भेदभाव से अछूती नहीं हैं? इस ग्राउंड रिपोर्ट में देखिए मजदूरों की सच्चाई, पंचायत का जवाब और वो सवाल—जो सिस्टम से जवाब मांगते हैं।
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