जिस घर में चार बार बेटी ने जन्म लिया, वहां हर बार जश्न नहीं बल्कि ताने और अपमान दिए गए और सवाल फिर वही उठता है, क्या आज भी समाज में बेटी होना एक अपराध माना जाता है?
मामला मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले का है। जहां एक मुस्लिम महिला को कथित तौर पर तलाक दे दिया गया क्योंकि हर बार महिला को बेटी ही पैदा हुई। जानकारी के मुताबिक 15 मई 2026 को महिला के पति ने महिला को क़ानूनी तौर से तलाक दे दिया। इसके बाद ने महिला ने पुलिस अधीक्षक कार्यालर्य में 25 मई 2026 को आवेदन दिया। महिला ने मांग की है कि उसके बच्चों की देखरेख और भरण पोषण के लिए खर्चा दिया जाए।
आज भी बेटी-बेटा के बीच भेदभाव
आज के आधुनिक समय में भी समाज की सोच कई जगहों पर पुरानी और रूढ़िवादी दिखाई देती है। बेटा और बेटी के बीच फर्क आज भी खुलकर देखा जाता है। किसी घर में बेटे के जन्म पर जहां ढोल-नगाड़े बजते हैं, मिठाइयां बांटी जाती हैं और खुशी का माहौल बनता है, वहीं बेटी के जन्म पर कई परिवारों में सन्नाटा छा जाता है। सबसे दुखद पहलू यह है कि ऐसे हालात में अक्सर महिला को ही दोषी ठहरा दिया जाता है, जबकि सच तो यह है कि बेटा या बेटी होना महिला के हाथ में नहीं होता कई मामलों में तो यह भेदभाव इतना बढ़ जाता है कि बात मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना तक पहुंच जाती है।
ऐसा ही एक गंभीर मामला मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से सामने आया है, जहां एक महिला को लगातार चार बेटियां होने पर प्रताड़ित करने का आरोप है।
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4 बेटी होने पर प्रताड़ना का आरोप
28 वर्षीय सबीना नूरी की शादी वर्ष 2018 में मुस्लिम रीति-रिवाज के अनुसार बमनौरा गांव के शाहिल अली से हुई थी। शुरुआती दिनों में सब कुछ सामान्य था, लेकिन पहली बेटी के जन्म के बाद से ही उसका जीवन बदलने लगा। पति और ससुराल पक्ष ने उसे ताने देना शुरू कर दिया।
जब दूसरी बेटी हुई तो प्रताड़ना और बढ़ गई। तीसरी बेटी के जन्म पर स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पति ने बच्ची को किसी और को देने तक की बात कह दी, जिसे सबीना ने सख्ती से मना कर दिया। इसके बाद उसे कुछ समय के लिए मायके भेज दिया गया। बाद में ससुराल पक्ष उसे वापस ले आया, लेकिन मानसिक प्रताड़ना जारी रही।
महिला का आरोप है कि चौथी बार इसी साल 2026 में बेटी होने पर पति ने गुस्से में आकर उसे तलाक दे दिया।
पति पर दूसरी शादी करने की धमकी का आरोप
सबीना की मां नूरी बेगम का कहना है कि उनकी बेटी को लगातार यह कहकर अपमानित किया जाता था कि वह सिर्फ बेटियां ही जन्म देती है। यहां तक कि पति दूसरी शादी करने की धमकी भी देता था। परिवार ने कई बार समझाने की कोशिश की, लेकिन कोई असर नहीं हुआ।
इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर भी संज्ञान लिया गया है। एसपी कार्यालय के एडिशनल एसपी आदित्य पोटली के अनुसार महिला की शिकायत प्राप्त हो चुकी है और पूरे मामले की जांच की जा रही है। दोनों पक्षों से पूछताछ के बाद कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि समाज में फैली उस गहरी सोच का आईना है जहां आज भी बेटियों को बोझ समझा जाता है। जरूरत इस बात की है कि समाज इस मानसिकता से बाहर निकले और यह समझे कि बेटा और बेटी दोनों बराबर हैं। बेटियां भी उतनी ही सक्षम हैं जितने बेटे -और कई बार उससे भी आगे।
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