राजस्थान के जैसलमेर की डंपिंग साइट पर करीब पांच सौ से ज़्यादा गायों की सड़ी हुई लाशें देखी गई हैं जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। शहर के जिला मुख्यालय से करीब सात किलोमीटर दूर रामगढ़ रोड पर बने नगर परिषद के डंपिंग साइट में इतने सारे गायों के शव देखे गए।
आज तक के खबर अनुसार शनिवार 23 मई 2026 को कुछ लोग उस इलाके में पहुंचे हुए थे जिसके बाद अचानक चारों तरफ लाशें ही दिखने लगी।
बताया जा रहा है शवों से बदबू उठने लगी थी जिससे आसपास रहने वाले लोगों को काफी परेशानी हो रही थी। जब इस घटना का वीडियो सामने आया तो नगर परिषद के व्यवस्था पर सवाल उठने लगे।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर फैलते ही लोगों में ग़ुस्सा बढ़ गया। देखा जाए तो बड़े बड़े मंचो से गौ रक्षा का नारे लगाना अलग बात है और ज़मीन में गायों की स्थिति पूरी तरह अलग दिखाई देती है। सड़कों पर भूखी प्यासी घूमती गायें और उनकी देख भाल की कमी, अब प्रशासन और व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में कई दिनों से बदबू फैल रही थी लेकिन समय पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। गर्मी बढ़ने के साथ हालात और भी खराब हो गए थे। लोगों को डर था कि खुले में पड़े शवों से बीमारी फैल सकती है। इस मामले को लेकर कई संगठनों ने भी नाराज़गी जताई है।
वहीं जिला कलेक्टर अनुपमा जोरवाल ने इस पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है। नगर परिषद कमिश्नर लजपाल सिंह सोढा ने भी ठेकेदार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। फ़िलहाल परिषद ने शवों को हटाकर जगह साफ कर दिया है।
यह मामला जब सोशल मीडिया वायरल हुआ तब जाकर प्रशासन हरकत में आई । जांच में सामने आया है कि शवों के निस्तारण की जिम्मेदारी संभाल रहे ठेकेदार ने काम में बड़ी लापरवाही की है। नियमों के मुताबिक शवों का सही तरीके से निपटान नहीं किया गया और उन्हें खुले में छोड़ दिया गया। इसके बाद जैसलमेर नगर परिषद ने सख्त कदम उठाते हुए ठेकेदार का कॉन्ट्रैक्ट कैंसल कर दिया है।
अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि इतनी बड़ी संख्या में गायों की मौत आख़िर किस वजह से हुई है। लोग जानना चाहते हैं कि मौत की वजह भीषण गर्मी या फिर और कोई दूसरा कारण।
ऐसे ही कितने मामले
इस तरह की गौ शाला से जुड़ी खबरें सामने आती रहती हैं जहां गायों की हालात बाहर बताए जाने के हिसाब से बिलकुल अलग होता है। जैसलमेर का मामला अकेला नहीं है। देश के अलग-अलग हिस्सों से समय-समय पर गौशालाओं में बदइंतजामी, भूख और इलाज की कमी से गायों की मौत की खबरें सामने आती रही हैं।नवंबर 2025 को उत्तर प्रदेश के ललितपुर के मड़ावरा में कवरेज के दौरान एक पत्रकार सहित तीन लोगों पर जानलेवा हमला करने की खबर सामने आई थी। बताया गया कि पत्रकार आकांक्षी ब्लॉक मड़ावरा की ग्राम पंचायत गिरार स्थित डगडगी गौशाला में फैली अव्यवस्थाओं की शिकायत मिलने पर रिपोर्टिंग करने पहुंचे थे। इसकी जानकारी पता लगने पर पत्रकार के साथ मारपीट की गई और उन्हें की खिलाफ कार्यवाही भी की गई। सवाल उठता है कि आख़िर इससे क्या साबित होता है कि गौशाला में गायों की स्थिति सही नहीं है?
गौशाला की स्थिति को देखते हुए कई रिपोर्ट सामने आए हैं जहां गायों की स्थिति गंभीर हालत में दिखीं।
बांदा रिसौरा ग्राम पंचायत की अस्थायी गौशाला में 13 जनवरी को एक गोवंश की मौत हो गई। जब लोगों ने गोवंश को देखा तो कुत्ते उसके मांस को नोच रहे थे।
खबर लहरिया की चीफ रिपोर्टर गीता देवी ने बाँदा जिला के कई गांव में जाकर जाना की क्या गौशाला से किसानो को फायदा हो रहा है? और क्या यह गौशाला सही से चलाई जा रही है?
खबर को पुराना बताने की कोशिश
गायों की सुरक्षा और गौ रक्षा को लेकर देश में लगातार राजनीति होती रही है। राजस्थान में भाजपा सरकार भी गौ संरक्षण की बात करती रही है लेकिन जैसलमेर में बड़ी संख्या में गोवंश के शव मिलने की घटना ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर गौ रक्षा को लेकर इतने दावे किए जाते हैं तो फिर इतनी गायों की मौत एक साथ कैसे हो गई और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी किसकी थी और क्यों ढीली पड़ गई?
इस मामले में एक और बात सामने आई कि सोशल मीडिया पर खबर को झूठा साबित करने की कोशिश भी हुई। कुछ लोगों ने दावा किया कि यह वीडियो पुराना है ताकि मामले की गंभीरता कम दिखाई जा सके। हालांकि स्थानीय स्तर पर जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद साफ हुआ कि मामला नया था और इसे लेकर कार्रवाई भी की गई। जैसलमेर की घटना सिर्फ 500 गायों की मौत की खबर नहीं है। यह उस व्यवस्था पर सवाल है जो एक तरफ गौ संरक्षण के बड़े दावे करती है और दूसरी तरफ गायों की मौत के बाद उनके शव तक सम्मानजनक तरीके से नहीं संभाल पाती।
जांच और ठेकेदार पर कार्रवाई अपनी जगह है, लेकिन असली सवाल अब भी बाकी है कि क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यवस्था बदलेगी?
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