इन दिनों देशभर में स्मार्ट मीटर को लेकर खूब चर्चा हो रही है। उत्तर प्रदेश छत्तीसगढ़ और बिहार जैसे कई राज्यों में इस मुद्दे पर तेजी से खबर देखने को मिल रही है। सरकार का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगाने से बिजली व्यवस्था ज्यादा पारदर्शी होगी और गड़बड़ियों पर लगाम लगेगी।
सरकार के मुताबिक इन मीटरों के जरिए बिजली चोरी और गलत बिलिंग को रोका जा सकेगा साथ ही तकनीकी और व्यावसायिक नुकसान (AT&C लॉस) को करीब 12–15% तक कम किया जा सकता है। प्रीपेड स्मार्ट मीटर में मीटर रीडिंग के लिए किसी कर्मचारी के आने की जरूरत नहीं होती। यह रियल टाइम में बिजली खपत की जानकारी देता है और समय के हिसाब से तय होने वाली दरों (ToD) के जरिए लोग अपनी खपत को बेहतर तरीके से नियंत्रित कर सकते हैं।
इसी दिशा में 2023 में ‘भारत स्मार्ट मीटर राष्ट्रीय कार्यक्रम’ (MSNP) शुरू किया गया जिसके तहत देशभर में करीब 25 करोड़ पुराने मीटरों को बदलने की योजना है।
राष्ट्रीय स्मार्ट ग्रिड मिशन विधुत मंत्रालय भारत सरकार के अनुसार अगस्त 2025 तक भारत में कुल 40 मिलियन (4 करोड़) स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं।
राष्ट्रीय स्मार्ट ग्रिड मिशन विधुत मंत्रालय के अनुसार ही 31 मार्च 2026 तक 6,48,27,683 स्मार्ट तक पहुँच हो गई है।
इस स्मार्ट मीटर के मुद्दे को ज़मीनी स्तर से समझने के लिए खबर लहरिया ने अलग-अलग राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ में ग्राउंड रिपोर्टिंग की है। इस दौरान लोगों से सीधे बात की गई जिससे कई अहम बातें और समस्याएं सामने निकलकर आईं।
उत्तर प्रदेश
स्मार्ट मीटर लगने के बाद बढ़ा बिजली का बिल
आज यानी 20 अप्रैल 2026 को उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से भी एक मामला आया कि यहां एक दूल्हा अपनी शादी के दिन ही सड़क पर उतरकर विरोध करता दिखा। यह पूरा मामला स्मार्ट मीटर और बढ़े हुए बिजली बिल से जुड़ा है। लोगों का आरोप है कि बिजली विभाग की तरफ से गलत और ज्यादा बिल भेजे जा रहे हैं जिससे आम लोगों पर खासकर नए परिवार शुरू करने वाले युवाओं पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
इसी को लेकर बुंदेलखंड इंसाफ़ सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए.एस. नोमानी ने बांदा के मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा। उनका कहना है कि पुराने मीटर फिर से लागू किए जाएं और नए स्मार्ट मीटर को बंद किया जाए।
वहीं दूल्हे कुलदीप का कहना है “बिजली का बिल इतना ज्यादा आ रहा है कि हम उसे भर ही नहीं पा रहे हैं।”
बांदा और वाराणसी में स्मार्ट मीटर को लेकर लोगों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि मीटर लगने के बाद उनके बिजली बिल अचानक कई गुना बढ़ गए हैं जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है।
इस मुद्दे को लेकर लोग सड़कों पर उतर आए हैं और प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं। उनका सवाल है कि क्या सच में स्मार्ट मीटर की वजह से बिल बढ़ रहा है या इसके पीछे कोई और कारण है।
बांदा के रहने वाले अमित कुमार कहते हैं “ये स्मार्ट मीटर हटा देना चाहिए ये बिल्कुल खराब है। इसमें बेवजह रीडिंग आ रही है। जीएनएस कंपनी ने लूट मचा रखी है। आम आदमी दिन-रात मेहनत करके आखिर सिर्फ बिजली का बिल ही कैसे भरे?” वे आगे बताते हैं कि पहले जहां एक बल्ब और एक पंखे पर करीब 500 रुपये बिल आता था अब वही बिल बढ़कर ढाई-ढाई हजार तक पहुंच रहा है। उनका कहना है कि वे इसका विरोध कर रहे हैं और चाहते हैं कि पुरानी व्यवस्था वापस लाई जाए। साथ ही वे बिजली विभाग के निजीकरण को भी खत्म करने की मांग कर रहे हैं।
वहीं बांदा की पुष्पा अपनी मुश्किल बताते हुए कहती हैं कि पिछले तीन महीने से उनके घर की बिजली काट दी गई है है क्योंकि वे एडवांस पैसा नहीं दे पाईं। “हम रोज मेहनत करते हैं लेकिन इतना पैसा कहां से लाएं कि बिजली का बिल भर सकें? हम अपना बच्चा पालें या बिल भरें?” वे बताती हैं कि उनके पति विकलांग हैं और घर की कमाई रोजाना 400 – 500 रुपये के आसपास ही होती है। ऐसे में 1 – 2 हजार रुपये का बिजली बिल भरना उनके लिए बहुत मुश्किल हो जाता है। पुष्पा का यह भी कहना है कि जब स्मार्ट मीटर लगाया गया तब उन्हें ठीक से जानकारी नहीं दी गई। बस इतना कहा गया कि अभी लगवा लो नहीं तो बाद में ज्यादा पैसे देने पड़ेंगे।
अयोध्या में भी स्मार्ट मीटर को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। अब आम लोगों की शिकायतें खुलकर सामने आ रही हैं। लोग बिजली बिल में गड़बड़ी और मीटर के काम करने के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं। जिले में कुछ स्थानीय लोगों और संगठनों ने इसके खिलाफ विरोध भी किया है। अयोध्या की रहने वाली मीना कहती हैं “हम स्मार्ट मीटर चाहते ही नहीं हैं लेकिन इसे ज़बरदस्ती लगाया जा रहा है।” वे बताती हैं कि कुछ समय पहले बारिश में उनके इलाके का बिजली का खंभा गिर गया था। इसके बाद से उनके घर का बिजली बिल बढ़कर करीब 20 हजार रुपये तक आ गया है। उनका कहना है कि इस वजह से ग्रामीण इलाकों के लोग सबसे ज्यादा परेशान हो रहे हैं। इसलिए उनका मानना है कि स्मार्ट मीटर को गांवों में नहीं लगाया जाना चाहिए।
उत्तर प्रदेश में इस विषय में सरकार का पक्ष
उत्तर प्रदेश में अब नए बिजली कनेक्शन लेने वालों के लिए एक नई व्यवस्था लागू की जा रही है। उत्तर प्रदेश विद्युत निगम लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने साफ कर दिया है कि आगे से सभी नए कनेक्शन सिर्फ प्रीपेड स्मार्ट मीटर के साथ ही दिए जाएंगे।
यूपीपीसीएल के चेयरमैन और ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव एके गोयल ने बताया है कि स्मार्ट मीटर को लेकर जो रोक लगी है वह केवल पुराने मीटरों को बदलने (आरडीएसएस योजना के तहत) पर लागू होती है। नए कनेक्शनों पर इसका कोई असर नहीं है। यानी जो भी नया बिजली कनेक्शन लेगा उसे प्रीपेड स्मार्ट मीटर ही मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में नियमों में बदलाव के बाद लोगों में थोड़ा भ्रम बन गया था जिसे अब साफ किया जा रहा है। दरअसल, सितंबर 2025 में यूपीपीसीएल ने केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) 2022 के नियमों के आधार पर नए कनेक्शनों के लिए प्रीपेड स्मार्ट मीटर अनिवार्य कर दिए थे।
लेकिन 1 अप्रैल 2026 को सीईए ने अपने नियमों में बदलाव करते हुए कहा कि उपभोक्ताओं को प्रीपेड या पोस्टपेड स्मार्ट मीटर, दोनों में से किसी एक को चुनने का विकल्प मिलना चाहिए। इसके बावजूद यूपीपीसीएल ने अब अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि राज्य में नए कनेक्शनों के लिए प्रीपेड सिस्टम ही लागू रहेगा।
इसके अलावा भी खबर लहरिया द्वारा उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों से स्मार्ट मीटर और बढ़े हुए बिजली बिल को लेकर कई ग्राउंड रिपोर्ट सामने आ चुकी हैं जिसे चैनल पर देखी जा सकती हैं। इन रिपोर्ट्स में लोगों की परेशानियां शिकायतें और विरोध साफ तौर पर सामने आ रहा है।
बिहार
“हम डर-डर कर बिजली इस्तेमाल करते हैं कि कहीं ज्यादा बिल न आ जाए”
बिहार के पटना ज़िले के कमला नेहरू नगर में स्मार्ट मीटर लगने के बाद लोगों की परेशानियां बढ़ती दिखने लगी। कई लोगों का कहना है कि उन्हें मीटर चलाने और रिचार्ज करने का तरीका ठीक से समझ नहीं आया है जिसकी वजह से दिक्कत हो रही है। कुछ लोग यह भी बता रहे हैं कि उनका बिजली बिल पहले से ज्यादा आ रहा है और रिचार्ज अचानक खत्म हो जाता है जिससे बार-बार बिजली कट जाती है।
वहीं बिजली विभाग का कहना है कि स्मार्ट मीटर का मकसद बिजली चोरी रोकना और सिस्टम को बेहतर बनाना है। विभाग का दावा है कि लोगों को इसके इस्तेमाल और फायदे के बारे में जानकारी दी जा रही है लेकिन लोगों से बात करने पर दूसरा पहलू सामने आया। इलाके की मीना खातून कहती हैं “पुराना मीटर ही ठीक था। अब बार-बार बिजली काट दी जाती है। हम डर-डर कर बिजली इस्तेमाल करते हैं कि कहीं ज्यादा बिल न आ जाए।”
सईदा खातून बताती हैं “हमारे घर में सिर्फ पंखा चलता है फिर भी दो हजार रुपये तक का बिल आ रहा है। घर चलाना ही मुश्किल है ऊपर से इतना पैसा बिल के लिए कहां से लाएं?”
अफरोज कुरैशी का कहना है कि उन्हें हर तीन-चार दिन में मीटर रिचार्ज कराना पड़ता है। “रिचार्ज करने के बाद भी कुछ ही दिन में बिजली बंद हो जाती है। इसका कोई तय समय नहीं है कभी भी लाइट चली जाती है।”
बिहार में जिन घरों में स्मार्ट मीटर (Smart Meter) हैं उनके लिए 25 मार्च को सरकार ने एक आदेश जारी किया। इस आदेश में बिजली का इस्तेमाल करने पर सुबह और शाम में अलग-अलग पैसे लगेंगे। लाइव मिंट की रिपोर्ट के अनुसार यदि आप सुबह के समय बिजली का इस्तेमाल कर रहे हैं तो कम पैसे लगेंगे वहीं शाम के समय में आपके ज्यादा पैसे लगेंगे। इस नियम को ‘टाइम ऑफ़ डे टैरिफ’ का नाम दिया गया है। यह नियम 1 अप्रैल से लागू हो गया।
छत्तीसगढ़
“सरकार ‘महतारी वंदन योजना’ के तहत हर महीने जो पैसा देती है उससे ज्यादा तो बिजली बिल में चला जाता है”
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में रहने वाली एक महिला जिन्होंने नाम न बताने के शर्त पर बताया कि वे ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं हैं और अब सब कुछ ऑनलाइन हो गया है। बिजली का बिल भी। “हमें ऑनलाइन प्रक्रिया समझ में नहीं आती इसलिए काफी दिक्कत होती है।”
महिला बताती हैं कि वे घर में अकेले कमाने वाली हैं और उनके दो छोटे बच्चे हैं। वे कहती हैं “जितना हम कमा नहीं पाते उससे ज्यादा तो बिजली का बिल आ जाता है।” उनका यह भी कहना है कि कई बार बिजली चली जाती है लेकिन मीटर चलता रहता है जिससे बिल और बढ़ जाता है। यानी बिजली चले जाने पर भी मीटर चलता है जिसका पैसा भी बिजली बिल में जुड़ कर आता है। वे आगे कहती हैं कि इतनी गर्मी में उन्होंने पहली बार आधा पैसा देकर कूलर लिया है लेकिन घर के बाकी खर्च और गैस की दिक्कतें भी बनी हुई हैं। “हर तरफ से कर्ज में डूबे हैं काम करने के बाद भी कुछ बचता नहीं।”
सरकारी योजना पर भी वे सवाल उठाती हैं। उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार ‘महतारी वंदन योजना’ के तहत हर महीने जो पैसा देती है उससे ज्यादा तो बिजली बिल में चला जाता है। “अगर इतना ही वापस लेना है तो पैसा देने का क्या फायदा।” बिजली के बढ़ते बिल और स्मार्ट मीटर को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ी। इसी के विरोध में लोगों ने राज्य सरकार के खिलाफ कई प्रदर्शन किए सीएसईबी कार्यालय का घेराव किया और तालाबंदी भी की गई थी।
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छत्तीसगढ़ में अब एक बड़ा सवाल उठ रहा है। लोगों का कहना है कि जब राज्य में अपना पानी है अपना कोयला है और उसी जमीन से ये संसाधन निकलते हैं तो फिर यहां के लोगों के लिए बिजली इतनी महंगी क्यों है? यही कोयला जब दूसरे राज्यों, जैसे राजस्थान, भेजा जाता है और वहां बिजली महंगी होती है तो बात समझ में भी आती है लेकिन जहां से ये संसाधन निकल रहे हैं वहीं के लोगों को ही ज्यादा कीमत क्यों चुकानी पड़ रही है? यही बात अब लोगों के गुस्से और विरोध की बड़ी वजह बनती जा रही है।
सवाल है –
कुल मिलाकर स्मार्ट मीटर को बेहतर और पारदर्शी बिजली व्यवस्था के नाम पर लाया गया था लेकिन ज़मीन पर इसकी तस्वीर कुछ और ही दिख रही है। अलग-अलग राज्यों से सामने आई रिपोर्टिंग में साफ दिखता है कि बड़ी संख्या में लोग इससे परेशान हैं। कहीं बिल अचानक बढ़ रहा है कहीं बिना समझ के रिचार्ज खत्म हो रहा है तो कहीं लोग डर-डर कर बिजली इस्तेमाल कर रहे हैं।
अब सवाल यही खड़ा होता है कि क्या स्मार्ट मीटर सच में लोगों के लिए सुविधा लेकर आया है या फिर एक नई परेशानी बन गया है? जब लोग पहले से ही गैस की किल्लत, कमाई की दिक्कत और महंगाई से जूझ रहे हैं तब बढ़ते बिजली बिल उनकी मुश्किल और बढ़ा रहे हैं। सबसे अहम बात यह है कि इतनी गर्मी में भी अगर लोग कूलर या पंखा चलाने से डरें यह सोचकर कि बिल ज्यादा आ जाएगा तो फिर इस व्यवस्था को सुविधाजनक कैसे कहा जा सकता है? क्या तकनीक लोगों की जिंदगी आसान बना रही है या उन्हें और मुश्किल में डाल रही है यह सवाल अब सरकार और सिस्टम दोनों के सामने खड़ा है।
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