खबर लहरिया असर बाँदा: 8 महीने बाद मिला पोषाहार, खबर लहरिया की खबर का असर

बाँदा: 8 महीने बाद मिला पोषाहार, खबर लहरिया की खबर का असर

जिला बांदा,ब्लाक नरैनी,ग्राम पंचायत रगौली भटपुरा,मजरा महराजपुर। यहां के लोगों ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र से मिलने वाले पोषाहार खाद्यान्न उनको 1 साल से नहीं मिला आंगनबाड़ी केंद्र में जब वह बात करती है तो वहां से पता चलता है कि अब समूह के द्वारा राशन आने लगा है और समूह वाली उस राशन को केंद्र में नहीं पहुंचा रही इस मामले को लेकर के मैंने 4 अगस्त को फेसबुक लाइक किया जब मैंने लाइक किया तो उस के दूसरे दिन ही समूह द्वारा आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचा दिया। तभी लोगों ने मुझे फोन करके बताया कि आपके खबर चलाने से समूह के लोगों ने केंद्र में राशन पहुंचा दिया है, लेकिन वह राशन खराब है इसलिए लोग नहीं ले रहे।

जब मैं इस खबर का फॉलोअप करने के लिए गई तुम लोगों ने बताया कि वह 1 साल से इस राशन के लिए दौड़ रही है लेकिन उनको राशन नहीं मिल रहा जब आप की खबर चली है तो दूसरे दिन के अंदर राशन पहुंच गया है इसलिए वह काफी खुश है कि कम से कम कुछ तो खबर का असर हुआ लेकिन वह राशन खराब है। इसलिए वह नहीं लेना चाहिए उनका कहना है कि जिस तरह से राशन आता है और हर महीने वितरण किया जाता है उसी तरह वितरण किया जाए।

स्वयं सहायता समुह की महिला के पति ने बतया की उनके यहां जितना राशन आया है रजिस्टर में दर्ज है। आंगनवाड़ी राशन नहीं ले रही थी जबकि कई बार राशन रिसीव करने के लिए कहा गयाहै।इस लिए राशन खराब हो गया है। उसमें उनकी कोई गलती नहीं है।

आंगनवाड़ी अनुसूया ने बताया कि उससे एक बार नहीं कहा गया और ना ही केंद्र पहुंचाया गया राशन ना ही उसकी सहायता से कहा गया। इसकी शिकायत भी वह बार-बार अपने कार्यालय में करती रही उसकी कोई गलती नहीं है और अगर अभी भी ये खबर खबर लहरिया चैनल में नही चलती तो जो राशन केन्द्र आया है नहीं तो अभी भी नहीं आता। अगर वह चाहता है कि आंगनबाड़ी उसके घर से राशन रिसीव करे तो वह नहीं करेगी।

नरैनी बाल विकास कार्यालय के ब्लॉक क्वाडनेटर कहते है कि आंगनवाड़ी और समूह की महिला का कुछ विवाद चल रहा है। इसमें दोनों की गलती है अगर समूह वालों के घर में राशन रखा गया है तो आंगनवाड़ी को राशन रिसीव करना चाहिए। अगर इतने दिन से राशन नहीं मिल रहा था तो, आंगनवाड़ी को शिकायत करनी चाहिए थी और अभी भी अगर आंगनवाड़ी लिख कर दे तो कुछ करवाई हो सकती हैं। आंगनवाड़ी और समूह महिल कि अगर नहीं बनती है,तो वहां के लिए दूसरे समूह से राशन भेजने के लिए सोचा जाएगा या फिर खुद आगनवाडी ले जाए। जिससे आगे से इस तरह की दिक्कत ना हो।

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