मध्य प्रदेश के सारणी गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 19 हितग्राहियों (सरकार द्वारा चलाई जाने वाली कल्याणकारी योजनाओं (जैसे – पेंशन योजना, आवास योजना आदि) के तहत लाभ पाने वाले नागरिक, श्रमिक या किसान) को पहले किस्त तो मिल गई लेकिन दूसरी किस्त अब तक जारी नहीं हुई। इसके कारण इन परिवारों के मकान अधूरे पड़े हैं और लोग आज भी कच्चे घरों और झोपड़ियों में रह रहे हैं।
रिपोर्ट – अलीमा, लेखन- रचना
प्रधानमंत्री आवास योजना का मकसद गरीब परिवारों को पक्का घर देना है लेकिन कई जगह यह योजना अधूरी नजर आ रही है। इस योजना की शुरुआत 25 जून 2015 को शहरी इलाकों में हुआ और ग्रामीण इलाकों में इसकी शुरुआत 1 अप्रैल 2016 में हुआ। कहीं लोगों के खातों में आवास के पैसे ही नहीं पहुंच रहे, कहीं मकान का निर्माण बीच बीच में रुक गया है तो कहीं दूसरी किस्त का इंतिज़ार खत्म नहीं हो रहा। ऐसी ही एक खबर मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के सारणी गांव से सामने आई है।
ग्रामीणों का कहना है कि पहली किस्त मिलने के बाद उन्होंने किसी तरह मकान का निर्माण शुरू किया। किसी ने उधार लेकर काम कराया तो किसी ने मजदूरी करके पैसे जुटाए लेकिन दूसरी किस्त नहीं मिलने से निर्माण बीच में ही रुक गया। अब कई जगह सिर्फ दीवारें ही खड़ी हैं और छत का काम अभी तक भी नहीं हो पाया है।
आज भी ग्रामीण कच्चे घर में रहने को मजबूर
सारणी गांव के रहने वाले मांकुर अख़बार द्वारा बताया गया कि उन्होंने वर्ष 2018 में मुख्यमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन किया था। फिर वर्ष 2022 में उन्हें योजना की पहली किस्त मिली जिसके बाद उन्होंने उधार लेकर अपनी जमा पूंजी से मकान का निर्माण शुरू करवाया। लेकिन पहली किस्त के बाद दूसरी किस्त उन्हें अभी तक नहीं मिली है और अब उनका मकान अधूरा पड़ा हुआ है। उनका आरोप है कि दूसरी किस्त जारी कराने के लिए उन्होंने गांव के सरपंच और संबंधित अधिकरियों से संपर्क किया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब उनका पूरा परिवार अधूरे और कच्चे मकान में रह रहे हैं।
उन्होंने अपनी परेशानी बताते हुए यह भी बताया कि बारिश शुरू होते ही उनकी परेशानी और भी बढ़ जाती है। कच्चे घर में पानी भर जाता है उस पानी को घर से बाहर निकालने के बाद ही वे घर में रह पाते हैं। “रात रात भर पानी निकालते हैं, छोटे छोटे बच्चे हैं सभी को एक रूम में सुरक्षित रखते हैं। हर समय में बारिश में घर गिरने का डर बना रहता है। दूसरी किस्त मिल जाए तो हम अपना मकान पूरा कर सकेंगे।”
मजदूरी करके परिवार चलाते हैं, अपने दम पर मकान बनाना मुश्किल
सारणी गांव की ही रहने वाली मालती रैकवार ने भी 2020 में आवास के लिए आवेदन किया था। और फिर एक साल बाद उन्हें आवास की पहली किस्त मिली जिसके बाद उन्होंने भी मकान का काम शुरू करवाया और दूसरा किस्त अब तक नहीं मिला और उनका भी मकान निर्माण का काम पूरा रुक गया है। “हमें उम्मीद थी कि इस बार पैसा आ जाए तो घर बन जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ और देखते ही देखते बारिश का मौसम शुरू हो गया और अगर अभी पैसा आता है तो इस बारिश में मकान कैसे बनवाएँगे? गांव में कई लगभग 19-20 परिवार हैं जिनके मकान का काम ऐसे ही अधूरा पड़ा हुआ है। अगर अभी पैसा मिल जाता है तो कम से कम छत तो ढलवा ही लेते। मजदूरी करके परिवार का खर्च चलाना बहुत मुश्किल है इसलिए अपने दम पर मकान बनाना संभव नहीं है।”
वहीं रानी अहिरवार जो मजदूरी करती हैं पति रिक्शा चलाते हैं और परिवार का गुज़ारा चलाते हैं उनका भी यही कहना है कि उनकी मेहनताना इतनी नहीं है कि मकान बनवाया जा सके।
सारणी गांव की सरपंच क्या कहते हैं?
इस मामले में सारणी गांव की सरपंच कल्लो बाली द्वारा बताया गया कि गांव में 19 हितग्राहियों की आवास योजना की दूसरी किस्त अभी तक नहीं आई है। ग्रामीणों के समस्या से संबंधित अधिकरियों को अवगत कराया गया है। उनके मुताबिक फिलहाल बजट उपलब्ध नहीं होने के कारण कई हितग्राहियों की पहली और दूसरी दोनों किस्तें रुकी हुई हैं।
वहीं सरपंच के अनुसार गांव में जिन लोगों को किस्त समय पर मिली थी उनके मकान बन कर तैयार हो चुके हैं। इनमें यादव, कुशवाहा, रैकवार और अहिरवार समाज के कई परिवार शामिल हैं। हालाँकि गांव के 19 हितग्राहियों के मकान अभी भी अधूरे हैं। इनमें 12 से 19 हितग्राही रैकवार समाज और 7 हितग्राही अहिरवार समाज के हैं। इन्हें पहली किस्त लगभग पचास हजार रुपए के रूप में वर्ष 2018 से शुरू हुई स्वीकृतियों के दौरान मिली थी लेकिन दूसरी किस्त अभी नहीं मिली।
जनपद पंचायत से मिली जानकारी
जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) संजय सिंह ने आश्वासन दिया है कि बजट मिलते ही लंबित किस्तें जारी कर दी जाएगी। उनके अनुसार कुछ लोगों द्वारा पूरी राशि मिलने के बाद भी मकान का निर्माण पूरा नहीं करवाया। इसी वजह से विभाग स्तर पर जांच चल रही है और फिलहाल भुगतान पर रोक लगाई गई है। अगर सब कुछ तय सीमा पर हुआ तो सितंबर तक आवास के पात्र हितग्राहियों के खातों में दूसरी किस्त भेजी जा सकती है।
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