खबर लहरिया Blog Hate Speech Report: 2025 में भारत में मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ नफ़रती भाषण, रिपोर्ट 

Hate Speech Report: 2025 में भारत में मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ नफ़रती भाषण, रिपोर्ट 

साल 2025 में देशभर में हुई प्रत्यक्ष रूप से दिए गए हेट स्पीच की घटनाओं का दस्तावेज़ीकरण किया है, जिनमें राजनीतिक रैलियां, धार्मिक जुलूस, विरोध प्रदर्शन और राष्ट्रवादी सभाएं शामिल हैं.रिपोर्ट के मुताबिक 21 राज्यों में धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाते हुए कुल 1,318 प्रत्यक्ष घृणास्पद भाषण की घटनाएं दर्ज की गईं।

फोटो साभार: CSOH                                                    

सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ ऑर्गेनाइज्ड हेट (CSOH) की परियोजना इंडिया हेट लैब (IHL) की वार्षिक रिपोर्ट में देशभर में घृणास्पद भाषण की चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। इंडिया हेट लैब ने सौ पन्नों के इस रिपोर्ट में साल 2025 में देशभर में हुई प्रत्यक्ष रूप से दिए गए हेट स्पीच की घटनाओं का दस्तावेज़ीकरण किया है, जिनमें राजनीतिक रैलियां, धार्मिक जुलूस, विरोध प्रदर्शन और राष्ट्रवादी सभाएं शामिल हैं.रिपोर्ट के मुताबिक 21 राज्यों में धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाते हुए कुल 1,318 प्रत्यक्ष घृणास्पद भाषण की घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें सबसे ज़्यादा निशाना मुसलमानों और ईसाइयों को बनाया गया। यह संख्या 2024 की तुलना में 13 प्रतिशत और 2023 की तुलना में लगभग दोगुनी यानी 97 प्रतिशत अधिक है। रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र की परिभाषा के आधार पर इन भाषणों को क्रम अनुसार किया गया जिनमें हिंसा के आह्वान, साजिशी थ्योरी, सामाजिक बहिष्कार, पूजा स्थलों को नुकसान पहुंचाने की मांग और अमानवीय भाषा शामिल है।  

फोटो साभार: इंडिया हेट लैब                                  

मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ ज़्यादा नफरत

रिपोर्ट बताती है कि कुल दर्ज घटनाओं में से 98 प्रतिशत भाषण मुसलमानों को निशाना बनाकर दिए गए। इनमें 1,156 मामलों में सीधे तौर पर मुसलमानों को निशाना बनाया गया जबकि 133 मामलों में मुसलमानों के साथ-साथ ईसाइयों को भी लक्ष्य किया गया। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में करीब 12 प्रतिशत अधिक है। वहीं ईसाइयों के खिलाफ 162 घृणास्पद भाषण दर्ज किए गए जो कुल घटनाओं का 12 प्रतिशत है। इनमें से 29 मामलों में सीधे ईसाइयों को निशाना बनाया गया। रिपोर्ट के अनुसार ईसाई विरोधी भाषणों में 2024 की तुलना में 41 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है जो धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए बढ़ते खतरे की ओर इशारा करती है।

भाजपा शासित राज्यों में ज़्यादा घटनाएं

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि घृणास्पद भाषण की अधिकांश घटनाएं भाजपा शासित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हुईं। कुल घटनाओं में से लगभग 88 प्रतिशत यानी 1,164 मामले ऐसे क्षेत्रों से आए जहां भाजपा या उसके नेतृत्व वाला गठबंधन सत्ता में है। यह संख्या 2024 की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली में सबसे अधिक घटनाएं दर्ज की गईं जो कुल मामलों का करीब 65 प्रतिशत हैं। इसके उलट विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों में 2025 के दौरान ऐसी घटनाओं में 34 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

चुनाव के दौरान भाषणबाज़ी का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल

रिपोर्ट में सामने आया है कि नफ़रत भरी भाषणबाज़ी का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल चुनावी माहौल और धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान किया गया। दिल्ली और बिहार के महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों के साथ-साथ स्थानीय निकाय चुनावों को भी हेट स्पीच फैलाने का ज़रिया बनाया गया जहां राजनीतिक भाषणों और सार्वजनिक आयोजनों में अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ बयान दिए गए।

आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल महीना नफ़रती भाषणों के लिहाज़ से सबसे ज़्यादा सक्रिय रहा। इस दौरान कुल 158 घटनाएं दर्ज की गईं। रिपोर्ट बताती है कि राम नवमी के जुलूसों और पहलगाम आतंकी हमले के बाद आयोजित रैलियों के चलते हेट स्पीच में तेज़ बढ़ोतरी हुई। सिर्फ़ 22 अप्रैल से 7 मई के बीच के 16 दिनों में ही 98 मामले सामने आए जो इस बढ़ते चलन को साफ़ दिखाते हैं।

इसके अलावा 141 मामलों में भाषणों के दौरान बेहद अपमानजनक और अमानवीय भाषा का प्रयोग किया गया। अल्पसंख्यक समुदायों को ‘दीमक’, ‘परजीवी’, ‘सुअर’, ‘पागल कुत्ते’ और ‘ज़हरीले सांप’ जैसे शब्दों से संबोधित किया गया, जो नफ़रत और हिंसा के माहौल को और गहरा करता है।

हिंसा के खुले आह्वान

रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि साल 2025 में नफ़रत भरी बयानबाज़ी का स्वर और ज़्यादा आक्रामक होता गया। कुल 308 भाषणों यानी करीब 23 प्रतिशत मामलों में खुलकर हिंसा करने की अपील की गई। इनमें से 136 भाषण ऐसे थे जिनमें लोगों से सीधे हथियार उठाने तक की बात कही गई जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। राज्यों के हिसाब से देखें तो महाराष्ट्र इस तरह के सबसे ख़तरनाक भाषणों का केंद्र बनकर उभरा। यहां 2025 में 78 हिंसक अपील वाले मामले दर्ज किए गए जबकि 2024 में इनकी संख्या 64 थी। रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र में दर्ज कुल 193 हेट स्पीच घटनाओं में से लगभग 40 प्रतिशत में हिंसा के लिए सीधा उकसाना शामिल था।

रिपोर्ट में कुछ प्रमुख नेताओं के नाम भी सामने आए हैं। महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नितेश राणे को हिंसा भड़काने वाले भाषण देने वाले शीर्ष पांच नेताओं में शामिल किया गया है। वहीं पिछले वर्ष उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 71 भाषणों के साथ सबसे अधिक हेट स्पीच देने वाले सक्रिय नेताओं में गिने गए।

      

फोटो साभार: इंडिया हेट लैब                                            

संगठन, सोशल मीडिया और हिंसा का बढ़ता खतरा

रिपोर्ट के अनुसार विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे संगठनों का नाम सबसे अधिक बार घृणास्पद भाषणों के आयोजकों में सामने आया। इसके अलावा कई हिंदू धार्मिक नेता भी ऐसे भाषणों में शामिल पाए गए जिससे नफरत को धार्मिक वैधता मिलती दिखी। 2025 में दर्ज लगभग आधे भाषणों में लव जिहाद, लैंड जिहाद और पॉपुलेशन जिहाद जैसी साजिशी बातों का ज़िक्र था। वहीं 308 मामलों में हिंसा के लिए खुले तौर पर आह्वान किया गया। रिपोर्ट यह भी बताती है कि ज़्यादातर वीडियो सबसे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर साझा किए गए जिससे यह साफ होता है कि नफरत फैलाने में सोशल मीडिया की भूमिका बेहद अहम हो गई है। 

 

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