खबर लहरिया Blog वास्तुकला और शैली के लिए मशहूर मध्यप्रदेश का धार किला

वास्तुकला और शैली के लिए मशहूर मध्यप्रदेश का धार किला

जानिये मध्यप्रदेश के धार किले के बारे में।

                          साभार – गूगल

मध्यप्रदेश में अनेकों किलें और उनके इतिहास से जुड़ी कई पुरातत्व इमारतें हैं। उनमें से ही एक किले के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं। हम बात कर रहे हैं मध्यप्रदेश के धार किले के बारे में।

धार क़िला, मध्य प्रदेश के मालवा नगर में छोटी पहाड़ी पर आयातकार आकार में बना हुआ है। इस किले का निर्माण 1344 ई में महमूद तुग़लक़ ने करवाया था। यह विशाल क़िला लाल बलुआ पत्थर से बना है। कहते हैं कि यह किला अनेकों उतार-चढ़ावों को देख चुका है। किले में 15 वीं एवं 16 वीं शताब्दी के भवनों के अवशेष मौजूद हैं।

पेशवा बाजीराव द्वितीय का जन्म 1775 ई. में इसी किले में हुआ था। 1857 में किले पर रोहिला ने ब्रिटिश राज के खिलाफ आन्दोलन कर कब्ज़ा कर लिया था। जिसे ब्रिटिशों ने छः दिनों तक बमबारी कर दोबारा अपने नियंत्रण में ले लिया था। किले के तीसरे द्वार पर औरंगजेब के शासनकाल और शाहजहां के सौतेले भाई अशर बेग के राज के दौरान का एक शिलालेख मौजूद है।

स्वतंत्रता की लड़ाई के बाद बड़ा महत्व

1857 में हुई स्वतंत्रता की लड़ाई के दौरान इस किले का महत्व बढ़ गया था। उस दौरान भारतीय सेनानियों ने इसी किले को अपना गढ़ बनाया था और चार महीनों तक आज़ादी की जंग लड़ी थी। किले के अंदर और भी कई ऐतिहासिक इमारतें मौजूद हैं, जिनमें खरबूजा महल, शीश महल और विश्राम महल जैसी सरंचनाएं हैं।

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इन्होंने बनवाया था किला

14वीं शताब्दी के आसपास सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक ने यह किला बनवाया था। 1857 के विद्रोह दौरान इस किले का महत्व बढ़ गया था। क्रांतिकारियों ने विद्रोह के दौरान इस किले पर अधिकार कर लिया था। बाद में ब्रिटिश सेना ने किले पर दोबारा अपना अधिकार कर लिया। साथ ही यहां के लोगों पर अनेक प्रकार के अत्याचार भी किये थे।

हालाँकि 1731 ई. में इस किले पर पवाँर राजपूतों का अधिकार हो गया था। प्राचीन काल में यह धार नगरी के नाम से मशहूर था। मध्य प्रदेश के इस शहर की स्थापना परमार राजा भोज ने की थी। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से देखें तो यह मध्य प्रदेश का एक महत्वपूर्ण शहर है।

पर्यटकों को अपनी तरफ खींचने की क्या है वजह ?

                        साभार – गूगल

धार के प्राचीन शहर में अनेक हिन्दू और मुस्लिम स्मारकों के अवशेष देखे जा सकते हैं। एक ज़माने में यह शहर मालवा की राजधानी थी। यह शहर धार किला और भोजशाला मन्‍दीर की वजह से पर्यटकों को अपनी तरफ काफी आकर्षित करता है। साथ ही इसके आसपास अनेक ऐसे दर्शनीय स्थल हैं जो पर्यटकों का मनमोह लेने वाले हैं।

किस शैली में बना है किला?

यह किला हिन्दू, मुस्लिम और अफ़गान शैली में बना हुआ है जो आने वाले पर्यटकों को खूब लुभाता है। यहां बाग नदी के किनारे स्थित गुफाएं ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है। यहां पर 5वीं और 6वीं शताब्दी की चित्रकला भी मौजूद है। यहां भारतीय चित्रकला का एक अलग नज़ारा भी देखने को मिलता है।

यह किला वास्तुकला, इतिहास और जंग से लेकर हर एक चित्र को काफ़ी सुंदर तरह से प्रदर्शित करता है। तो आपको किसका इंतज़ार है। आइये इस किले में और खुद ही अपनों आँखों से देखिये इस किले की कहानी।

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