नत्थु और उनकी पत्नी दोनों देख नहीं पाते और उन्हें पानी बढ़ने का पता तब चला जब कमरा और कपड़े पानी से भीग चुके थे। घर का सामान, कपड़े और बिस्तर कुछ नहीं बच पाया। बस्ती में घर में रखे गेहूं, चावल जैसे बाकी अनाज भी बारिश में डूब गया और खराब हो गया। किसी भी तरह की प्रशासनिक मदद अभी तक नहीं मिल पाई है। अब परिवार के सामने घर को दोबारा संभालने की चिंता बनी हुई है।
देश के कई राज्यों में इन दिनों मानसून की तेज बारिश का दौर जारी है। लगातार हो रही बारिश से कई नदियां उफान पर हैं और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। उत्तर प्रदेश का चित्रकूट भी हाल ही 29 अगस्त 2026 में आई भीषण बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मंदाकिनी नदी का पानी बढ़ने से रामघाट, तरौंहा और आसपास की कई बस्तियां पानी में डूब गईं। फ़िलाहल पानी अब उतर गया है पर पीछे तबाही के निशान छोड़ गया है। कई घरों की दीवारों में दरारें हैं कुछ मकान बैठ गए हैं और घरों में रखा अनाज और सामान खराब हो गया है।
घरों के अंदर और बाहर कीचड़ और दलदल जमा है। कई जगह पैर जमीन में धंस रहा है। जिन घरों में पानी घुसा था वहां अब दीवारों में दरारें दिखाई दे रही हैं और कुछ मकान पूरी तरह बैठ गए हैं।
करीब छह से सात क्विंटल गेहूं, चावल और दूसरा अनाज पानी में खराब हो गया है
खबर लहरिया की जल भराव बस्ती की रिपोर्टिंग के दौरान टीम तरौंहा के दलित और मुस्लिम बस्ती में पहुंची। उन बस्तियों का बाढ़ के बाद स्थिति पूरी तहस – नहस हो चुकी थी।लोग मानो घर रह कर भी बेघर हो गए हैं। उसी बस्ती की लीलावती बताती हैं कि बाढ़ का पानी उनके घर की ऊपर वाली मंजिल तक पहुंच गया था। घर में रखा करीब छह से सात क्विंटल गेहूं, चावल और दूसरा अनाज पानी में डूबकर खराब हो गया। वह कहती हैं “पानी इतनी तेजी से आया कि हमें कुछ संभालने का मौका ही नहीं मिला। घर में थे लेकिन पानी इतना बढ़ गया कि सब कुछ छोड़कर निकलना पड़ा। अगर उस समय घर से नहीं निकलते तो हम डूब जाते।” उनका कहना है कि घर में रखा अनाज खराब हो गया और अब यह भी समझ नहीं आ रहा कि आगे परिवार का गुजारा कैसे होगा।
मुस्लिम बस्ती में रहने वाले रशिब ने खबर लहरिया को बताया कि बाढ़ के समय उनका घर गिरने लगा था। पानी अचानक बढ़ा तो उन्होंने बिना कुछ सोचे अपने बच्चों को लेकर घर से बाहर भागकर जान बचाई। “हमारा घर गिरने लगा था तभी बच्चों को लेकर बाहर भागे तब जाकर बच पाए।” उनके परिवार में सात लोग हैं। घर की निचली मंजिल पूरी तरह पानी में डूब गई और घर का ज्यादातर सामान बह गया। उनका कहना है कि पानी इतनी तेजी से आया कि सामान निकालने या सुरक्षित जगह पर रखने का समय ही नहीं मिला।
वहीं बस्ती में रहने वाले लोगों का कहना है कि यहां करीब ढाई से तीन सौ के बीच घर और बस्तियां हैं। सड़क की हालत खराब होने के कारण बारिश और बाढ़ का पानी आसानी से निकल नहीं पाया। अब पानी कम होने के बाद भी गलियों में कीचड़ भरा है और लोगों के पैर धंस रहे हैं।
इसी बस्ती के मोमना का घर भी बाढ़ के बाद पूरी तरह बैठ गया है। वे बताती है कि घर की मिट्टी अब पैर रखते ही धंसने लगी है। उनका घर और पूरा इलाका दूसरी जगहों के मुकाबले ऊंचाई पर बसा है। उन्होंने पहले कभी इस तरह की बाढ़ नहीं देखी थी इसलिए उन्हें लगा भी नहीं था कि पानी इतना बढ़ जाएगा। लेकिन अचानक तेज बहाव के साथ पानी आया और उन्हें घर छोड़कर बाहर निकलना पड़ा।
उनके बच्चे नदी के दूसरी तरफ फंसे हुए थे और बाद में किसी तरह सुरक्षित जगह तक पहुंच पाए। मोमन का आरोप है कि बाढ़ के बाद अब तक प्रशासन, किसी संस्था या समाजसेवी संगठन की तरफ से कोई व्यक्ति उनकी बस्ती में मदद या हालात देखने नहीं आया। दूसरी जगहों पर लोगों को बचाने के लिए हेलीकॉप्टर और राहत दल पहुंचे लेकिन उनकी बस्ती के लोगों को अब भी अपने हाल पर छोड़ दिया गया है।
नत्थु और पत्नी रेखा जो देख नहीं पाते इस बाढ़ में सबसे बुरा हाल रहा
नत्थू और उनकी पत्नी रेखा की मुश्किल और भी ज्यादा है। दोनों देख नहीं पाते हैं और चार बच्चों के साथ इसी इलाके में रहते हैं। रेखा से बात चीत की गई उन्होंने बताया कि बाढ़ की रात उन्हें पानी बढ़ने का अंदाजा ही नहीं हुआ। “जब पानी से कपड़े भीगने लगे और धीरे-धीरे पानी भरता गया तब नींद खुली और पता चला कि बाढ़ आ गई है।” परिवार किसी तरह घर से बाहर निकला और सुरक्षित जगह नहीं मिलने पर दूसरे व्यक्ति के घर के बरामदे में रात गुजारी। सुबह जब पानी कम हुआ और वे घर लौटे तो घर का सामान बिखरा पड़ा था। उनके पास अब सिर्फ वही कपड़े बचे हैं जो उन्होंने बाढ़ के समय पहन रखे थे। बाकी कपड़े, बिस्तर और घर का सामान पानी में बह गया या खराब हो गया है। घर की दीवारों में दरारें पड़ गई हैं और जमीन भी धंस गई है।
वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि रामघाट और आसपास के कुछ इलाकों में प्रशासन और बचाव दल ने लोगों को बाहर निकाला, लेकिन तरौंहा की इन बस्तियों तक मदद उस तरह नहीं पहुंची। खासकर मुस्लिम और दलित बस्ती के लोगों का कहना है कि उन्हें राहत सामग्री और नुकसान के आकलन का इंतजार है। जिलाधिकारी पुलकित गर्ग के मुताबिक, मंदाकिनी नदी का जलस्तर करीब 135 मीटर तक पहुंचा था, जो सामान्य स्तर से करीब 13 मीटर ज्यादा और 2003 की बाढ़ से भी करीब एक मीटर अधिक था। प्रशासन के मुताबिक करीब दो सौ लोगों को रेस्क्यू किया गया और प्रभावित लोगों को भोजन के पैकेट और पीने का पानी दिया गया। लेकिन बस्ती के लोगों की बात सुनने पर साफ है कि पानी उतरने के बाद उनकी असली चिंता अब घर, अनाज और रोजमर्रा की जिंदगी को दोबारा खड़ा करने की है।
चित्रकूट में बाढ़ के चलते गांवों में हालात लगातार मुश्किल होते जा रहे हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचकर खबर लहरिया की चीफ रिपोर्टर नाज़नी और सीनियर रिपोर्टर सुनीता ने गांवों के ज़मीनी हालात को करीब से देखा और लोगों से बात की। बाढ़ का पानी गांवों तक कितना पहुंचा है? लोगों को किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है? बाढ़ के बीच गांवों में जीवन कैसा है? देखिए चित्रकूट से हमारी ग्राउंड रिपोर्ट।
चित्रकूट के जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने खबर लहरिया को बताया कि मंदाकिनी नदी का जलस्तर करीब 135 मीटर तक पहुंच गया था। यह सामान्य जलस्तर से करीब 13 मीटर अधिक था और 2003 में आई अब तक की सबसे बड़ी बाढ़ के जलस्तर से भी करीब एक मीटर ज्यादा रहा। यह मंदाकिनी में अब तक दर्ज सबसे अधिक जलस्तर है। उनके मुताबिक बाढ़ के दौरान प्रशासन ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर करीब 200 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। इसी के साथ प्रभावित लोगों को खाने के पैकेट और पीने का पानी बांटा गया। प्रशासन की टीमें भी राहत और बचाव के लिए मौके पर तैनात हैं और बिजली विभाग को भी सतर्क कर दिया गया है।
जिलाधिकारी के मुताबिक बाढ़ से जहां-जहां नुकसान हुआ है वहां क्षति का आकलन कर सूची तैयार की जा रही है। प्रशासन की पूरी टीम को भी अलर्ट पर रखा गया है। उन्होंने बताया कि उन्हें 12 गांव में भी जलभराव की सूचना मिली थी जहां लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित इलाकों में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत के मुताबिक राहत और बचाव का काम किया जा रहा है।
लेकिन बात सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती जितने भी प्रशासन के तरफ से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया है उसे जानने के लिए खबर लहरिया ग्राउंड में उस इलाके में पहुंची थी जहां काफी ज़्यादा जल भराव रहा और जहां लोगों के पास जान के अलावा कुछ नहीं बचा है।
तरौंहा की दलित और मुस्लिम बस्ती तक क्यों नहीं पहुंची राहत?
तरौंहा में दलित और मुस्लिमों की बस्ती है। उसी बस्ती में खबर लहरिया के टीम पहुंची। बस्तियों के लोगों का आरोप था कि बाढ़ के दौरान और उसके बाद उन्हें प्रशासन की तरफ से वह मदद नहीं मिली जो दूसरे प्रभावित इलाकों में पहुंची। स्थानीय लोगों के मुताबिक रामघाट और आसपास के इलाकों में लोगों को बचाने के लिए प्रशासन और राहत दल पहुंचे कई जगह हेलीकॉप्टर से भी मदद पहुंचाई गई और खाने-पीने का सामान बांटा गया। लेकिन तरौंहा की इन बस्तियों में रहने वाले परिवारों का आरोप है कि उन्हें अब तक न तो पर्याप्त राहत सामग्री मिली और न ही नुकसान देखने के लिए कोई अधिकारी या बचाव दल पहुंचा। कई घर बाढ़ में क्षतिग्रस्त हो गए हैं सामान और अनाज बह गया है फिर भी लोग मदद का इंतजार कर रहे हैं।
जब बाढ़ से प्रभावित दूसरे इलाकों तक प्रशासन की राहत और बचाव टीम पहुंची तो तरौंहा की दलित और मुस्लिम बस्तियों तक मदद क्यों नहीं पहुंच पाई? क्या दलित और मुस्लिम बस्ती होना यही एक कारण है? या फिर प्रशासन के पास इन इलाकों में हुए नुकसान की पूरी जानकारी ही नहीं पहुंची?
दूसरी ओर रिपोर्टिंग से ये भी जानकारी मिली कि चित्रकूट में डीएम की तरफ से आए आदेश के बाद बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के लिए 1000 खाने के पैकेट तैयार किए गए। पर इसकी भी पहुँच उस दलित और मुस्लिम बस्तियों तक नहीं गई।
इस बाढ़ से लोगों को काफी ज़्यादा नुक़सानें भी हुई हैं। बाढ़ का पानी बढ़ने से एक दुकानदार के 13 बकरे बह गए। अचानक आई बाढ़ के चलते पशुधन के नुकसान से दुकानदार को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। लगातार बारिश और बढ़ते जलस्तर ने स्थानीय लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
कहाँ कितनी बारिश, कहाँ अलर्ट जारी
उत्तर प्रदेश में आज बारिश को लेकर कई जिलों में अलर्ट जारी किया गया है। प्रयागराज, चित्रकूट, मीरजापुर, चंदौली और सोनभद्र में मौसम ज्यादा खराब रहने की आशंका है। यहां तेज बारिश के साथ गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने का खतरा भी बताया गया है। इन पांच जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
– प्रयागराज
– चित्रकूट
– मीरजापुर
– चंदौली
– सोनभद्र
वहीं कुछ अन्य जिलों में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इन इलाकों के लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है।
– वाराणसी
– प्रतापगढ़
– कौशांबी
– जौनपुर
– संत रविदास नगर
– बहराइच
– लखीमपुर खीरी
– शाहजहांपुर
– पीलीभीत
– बरेली
– रामपुर
आज सुबह से लखनऊ, वाराणसी, बरेली और मुरादाबाद समेत 15 जिलों में रुक-रुककर बारिश हो रही है। वहीं कानपुर और आगरा सहित करीब 20 शहरों में आसमान में बादल छाए हुए हैं। मौसम विभाग के बारिश के अलर्ट को देखते हुए अमेठी, सुल्तानपुर और मिर्जापुर में कक्षा 8 तक जबकि भदोही में कक्षा 12 तक के स्कूल बंद कर दिए गए हैं। प्रदेश के 58 जिलों में आज बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, इनमें 14 जिलों में भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।
बिहार, छतीसगढ़ और मध्यप्रदेश का भी बारिश से बुरा हाल
बिहार का मौसम – बिहार में आने वाले दिनों में भी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के अनुसार अगले सात दिनों तक राज्य में मानसून सक्रिय रह सकता है। इस दौरान कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है जबकि कुछ जगहों पर तेज या भारी बारिश भी हो सकती है। हालांकि हर दिन बारिश का असर एक जैसा नहीं रहेगा और अलग-अलग जिलों में इसकी तीव्रता बदल सकती है।
उत्तर बिहार के जिलों के अलावा मध्य और दक्षिण बिहार में भी बारिश की गतिविधियां बनी रहने का अनुमान है। कुछ इलाकों में आकाशीय बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की आशंका को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। खासकर बारिश और गरज-चमक के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचने की सलाह दी गई है।बता दें पिछले 24 घंटे में कई जिलों में बारिश हुई हैं।
— Mausam Bihar- IMD Patna (@imd_patna) August 30, 2026
छत्तीसगढ़ का मौसम – छत्तीसगढ़ में पिछले डेढ़ हफ़्ते से तेज बारिश हो रही है। साथ ही मौसम विभाग ने सुबह 10 बजे तक कई जिलों में बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है।प्रदेश में अगले पांच दिनों तक बारिश की गतिविधियों में वृद्धि होने की संभावना है। मौसम विभाग ने कई जिलों में बारिश के साथ तेज हवाएं चलने और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
उत्तर बस्तर कांकेर, धमतरी, बालोद, राजनांदगांव, गरियाबंद, महासमुंद, रायपुर, बलौदा बाजार, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, बिलासपुर, कोरबा, जशपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, दुर्ग, बेमेतरा, कबीरधाम, मुंगेली, सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया, बलरामपुर
वहीं कुछ जिलों में हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है। इनमें बस्तर संभाग के साथ प्रदेश के मध्य और उत्तरी हिस्सों के कई जिले शामिल हैं।इन इलाकों में यलो अलर्ट एक्टिव है।
सुकमा, बीजापुर, दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव, उत्तर बस्तर कांकेर, धमतरी, बालोद, राजनांदगांव, गरियाबंद, महासमुंद, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, जशपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, कबीरधाम, मुंगेली, कोरिया, बलरामपुर।
मध्य प्रदेश का मौसम –मध्य भारत में भी आने वाले दिनों में बारिश का असर बना रहेगा। पूर्वी मध्य प्रदेश में 31 अगस्त से 5 सितंबर के बीच कई जगहों पर बहुत तेज बारिश होने की संभावना है। वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश में 3 से 5 सितंबर के दौरान मूसलाधार बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।
महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र और गोवा में भी 6 सितंबर तक लगातार बारिश जारी रहने का अनुमान है। हालांकि तटीय कर्नाटक और केरल के कुछ हिस्सों में तेज हवाओं के साथ बारिश होने की संभावना बनी हुई है।
और बाकी राज्य
मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक आने वाले दिनों में उत्तर भारत के और कई हिस्सों में बारिश का असर देखने को मिल सकता है। हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच कुछ स्थानों पर बारिश होने की संभावना है। वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश में 1 से 5 सितंबर तक बारिश का दौर ज्यादा सक्रिय रह सकता है।
पश्चिमी राजस्थान में भी 3 से 5 सितंबर के बीच कुछ इलाकों में बारिश होने का अनुमान है। पहाड़ी राज्यों में बारिश के साथ भूस्खलन का खतरा भी बना रह सकता है। उत्तराखंड में अल्मोड़ा, चमोली, रुद्रप्रयाग, हरिद्वार और नैनीताल जैसे जिलों में इसका असर देखने को मिल सकता है। यहां 31 अगस्त से 2 सितंबर के बीच तेज बारिश और गरज-चमक वाली स्थिति बनने की संभावना है।
*Under the influence of Well Marked low pressure area over Gangetic West Bengal & adjoining areas of north coastal Odisha and northwest Bay of Bengal*
*Heavy rainfall Warnings*
*Gangetic West Bengal*: Light to moderate rainfall at most places with heavy rainfall at isolated… pic.twitter.com/lwYnlN4sXs— India Meteorological Department (@Indiametdept) August 31, 2026
इस समय यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और दूसरे राज्यों में आने वाले दिनों में भी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है ऐसे में बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोगों के सामने अब राहत के साथ सुरक्षित रहने की चुनौती भी बनी हुई है।
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