खबर लहरिया Gender & Caste Kahe ka Haq: छुआछूत खत्म हुई या सिर्फ कानून की किताबों में?,जाति भेदभाव की जमीनी हकीकत

Kahe ka Haq: छुआछूत खत्म हुई या सिर्फ कानून की किताबों में?,जाति भेदभाव की जमीनी हकीकत

अगर कोई व्यक्ति आपको आपकी जाति पूंछ ले, बोले मुझे छूना नहीं, तुम्हारे बच्चों को स्कूल में बाकी बच्चों से अलग बैठाए, तो…..? बहुत बुरा लगेगा न? सेम हम सबको यह व्यवहार बहुत हर्ट करता है जब कोई ऐसा व्यवहार करे। महोबा जिले के एक प्राथमिक विद्यालय में एक छात्रा ने टीचर के घड़े से पानी पी लिया जिससे टीचर ने उसकी बेरहमी से पिटाई कर दी। दोस्तों मैं हूँ कंचन शेंद्रे, स्वागत करती हूँ अपने इस एपिसोड में। दोस्तों, सीधी बात करें तो अगर भारत में कुछ चीज़ें बहुत धीरे बदली हैं, तो उनमें से एक है जाति के आधार पर भेदभाव। हमारी जाति व्यवस्था बहुत पुरानी है। 1950 में संविधान लागू हुआ और उसमें साफ लिखा गया—छुआछूत खत्म। लेकिन सच क्या है? इतने साल बाद भी कई लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ये भेदभाव आज भी दिख जाता है।

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