दिल्ली से एक बार फिर चलती बस में नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक 4 अगस्त को ग्रेटर नोएडा से दिल्ली के कश्मीरी गेट तक एक खाली स्लीपर बस में इस घटना को अंजाम दिया गया। हालाँकि मीडिया रिपोर्ट में आज 31 अगस्त 2026 को यह मामला हाईलाइट हो रहा है। इस मामले में पुलिस ने बस ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप को गिरफ्तार कर लिया गया है।

स्लीपर बस जिसमें 4 अगस्त 2026 को 16 साल की नाबालिग के साथ कथित तौर पर गैंगरेप किया गया (फोटो साभार: एएनआई)
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने बताया कि छात्रा यूपी के मैनपुरी की रहने वाली है और कक्षा 11 में पढ़ती है। यह घटना तब हुई जब लड़की किसी पारिवारिक विवाद के बाद बिना बताए घर से निकली थी। वह नोएडा सेक्टर-63 में अपने कजिन बहन से मिलने जा रही थी। भारी बारिश और अंधेरे के कारण वह गलती से परी चौक पर उतर गई।
मदद के बहाने बस में लड़की को चढ़ाया
इसके बाद वह मदद के लिए सड़क पर खड़ी रही। इसी बीच के निजी स्लीपर बस वहां से गुजरी। भारी बारिश में फंस जाने की वजह से लड़की ने मदद मांगी और बस को रुकने का इशारा किया, जिसके बाद बस रुक गई। ड्राइवर और कंडक्टर ने उसे यह कहकर बस में चढ़ने दिया कि बस नोएडा सेक्टर-63 जा रही है। लड़की ने पुलिस को बताया कि कुछ दूर जाने के बाद कंडक्टर ने कथित तौर पर अभद्र व्यवहार शुरू किया। ड्राइवर और कंडक्टर ने उसके साथ यौन हिंसा की और विरोध करने पर उसे पीटा और जान से मारने की धमकी दी।
आरोप है कि करीब 47 किलोमीटर के सफर के बाद बस दिल्ली के कश्मीरी गेट इलाके के पास पहुंची, जहां दोनों आरोपी छात्रा को छोड़कर फरार हो गए। इसके बाद छात्रा ने पुलिस से संपर्क किया।
ड्राइवर और कंडक्टर गिरफ्तार
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस उपायुक्त (उत्तर जिला) निहारिका भट ने बताया कि ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप को घटना वाले दिन (4 अगस्त 2026) ही तिमारपुर के एक पार्किंग इलाके से गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ सामूहिक बलात्कार, अपहरण और मारपीट की धाराओं में मामला दर्ज किया है। जांच के लिए स्लीपर बस को जब्त कर लिया गया है। फोरेंसिक टीम ने बस की जांच के दौरान कुछ बाल भी बरामद किए हैं।
#WATCH दिल्ली: एक स्लीपर बस में 16 साल की स्कूली छात्रा के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया है। पुलिस ने गैंगरेप के आरोपी ड्राइवर और कंडक्टर को गिरफ़्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि यह घटना 4 अगस्त की रात को हुई थी। पुलिस ने अपराध में इस्तेमाल की गई स्लीपर बस को ज़ब्त कर लिया है… pic.twitter.com/IsyHlGQbwc
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 31, 2026
पुलिस ने बस को जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है।
दिल्ली में नाबालिग लड़कियों के साथ बलात्कार के मामले
NCRB की 2023 रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में नाबालिग लड़कियों के साथ रेप के 1,052 मामले दर्ज किए गए थे। यह आंकड़ा POCSO Act के तहत दर्ज लड़कियों के साथ बलात्कार के मामले का है। 2022 में ऐसे 890 मामले दर्ज हुए थे, यानी 2023 में करीब 18% की बढ़ोतरी हुई।
सार्वजनिक परिवहन में महिला सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता जताई
इस मामले पर आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद ने चिंता जताते हुए सोशल मीडिया X पर आज 31 अगस्त 2026 को पोस्ट किया है। उन्होंने लिखा “माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों और मोटर वाहन नियमों के तहत, यात्री बसों में ऐसी व्यवस्थाओं पर रोक है जो अंदर की गतिविधियों को बाहर से देखने से रोकती हैं। इसके बावजूद, बस की खिड़कियों पर गहरे पर्दे लगे हुए थे, जिससे अंदर हो रही क्रूरता बाहर से पूरी तरह छिपी हुई थी। व्यावसायिक यात्री वाहनों में लाइव वीएलटीडी और पैनिक बटन जैसे सुरक्षा तंत्र अनिवार्य हैं और इन्हें एक नियंत्रण कक्ष से जोड़ा जाना चाहिए। सवाल यह है कि घटना के दौरान इन सुरक्षा तंत्रों से कोई अलर्ट क्यों नहीं मिला? इसी तरह, व्यावसायिक बसों के ड्राइवरों और कंडक्टरों के पुलिस सत्यापन और उनकी वर्दी पर नेमप्लेट लगाने के प्रावधान भी मौजूद हैं। लंबी दूरी की स्लीपर बसों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी जैसे निगरानी तंत्र अनिवार्य हैं।”
मैनपुरी की 16 वर्षीय नाबालिग छात्रा के साथ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ग्रेटर नोएडा से दिल्ली के कश्मीरी गेट तक चलती स्लीपर बस में ड्राइवर और कंडक्टर द्वारा सामूहिक दुष्कर्म की घटना न केवल बेहद शर्मनाक और भयावह है, बल्कि निर्भया कांड के बाद बनाए गए महिला सुरक्षा के नियमों और… pic.twitter.com/5Lw7Ncm542
— Chandra Shekhar Aazad (@BhimArmyChief) August 31, 2026
इसका मतलब यह घटना सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। बसों में CCTV, पैनिक बटन, ड्राइवर-कंडक्टर का पुलिस वेरिफिकेशन और निगरानी जैसे नियम होने के बावजूद अगर एक नाबालिग के साथ इतनी बड़ी वारदात हो जाती है, तो इन नियमों के पालन और सरकारी निगरानी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
2012 में निर्भया कांड के 14 साल बाद भी महिलाऐं सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षित नहीं हैं, तो सिर्फ नियम बनाना नहीं, बल्कि उनके सख्ती से पालन और जवाबदेही तय करने की जरूरत है।
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