वाराणसी के खालिसपुर कपिलधारा के पास तकरीबन दो साल से सीवर की पाइपलाइन फटी हुई है। इसके कारण रोजाना हज़ारों लीटर सीवर का पानी लगातार बाहर निकल रहा है। गांव वालों का आरोप है कि ये सीवर का पानी खेतों से होते हुए वरुणा नदी में जा रहा है।
रिपोर्ट – सुशीला, लेखन – रचना
इतना ही नहीं सीवर का पानी खेतों में भरने से ज़मीन और जो फसल लगे हैं दोनों खराब हो रहे हैं। इन कारणों से कई लोग समय पर खेत की जुताई और बुवाई तक नहीं कर पा रहे हैं। इस निकलने वाले सीवर के पानी से बीमारी का खतरा भी बढ़ रहा है।
दिनापुर एसटीपी तक पहुँचना था सीवर का पानी
वाराणसी शहर के कई हिस्सों का सीवर पाइपलाइन के ज़रिए दिनापुर पहुँचता है। इसमें खंजापुर, हनुमानपुर, राजघाट और प्रह्लाद घाट समेत शहर के कई इलाके शामिल हैं। ये सीवर का पानी दिनापुर के 140 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी में पहुँचना था। यहाँ सीवर के पानी को ट्रिट (साफ) कर दोबारा वरुणा नदी में छोड़ा जाता है। लेकिन खालिसपुर कपिलधारा के पास पाइपलाइन फटने से पानी एसटीपी तक पहुंचने से पहले ही बाहर निकल रहा है। वो भी पानी भी गंदा है।
थोड़ा सीधे तौर पर समझे तो शहर के घरों और दूसरे इलाकों से निकलने वाला गंदा पानी पाइपलाइन के ज़रिए कहीं बाहर जाता है। वैसे ही पाइपलाइन के ज़रिए से सीवर का पानी दिनापुर के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) में पहुँचता है। वहां इस पानी को साफ किया जाता है और इसके बाद इसे नदी में छोड़ा जाता है। पर खालिसपुर के पास पाइपलाइन फटने से गंदा पानी प्लान तक पहुंचने से पहले बाहर निकलकर खेतों और नदी में जा रहा है।
गांव वालों के मुताबिक, खालिसपुर कपिलधारा, पूनिया और वरुणा पुल के पास से होकर जाने वाली इस पाइपलाइन से हर रोज हज़ारों लीटर सीवर का पानी वरुणा नदी में गिर रहा है। इस एसटीपी का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा साल 2018 में की गई थी।
शांति देवी बताती हैं कि पाइपलाइन के फटने से चार से पांच किसानों के खेत खराब और गंदा पानी के प्रभाव में है। मनीष मौर्य से पता चला कि सीवर का पानी लगातार गिरने से आसपास काफी ज़्यादा गंदगी फैल गई है। लगातार इलाके में बदबू फैली होती है। “यहां रहना मुश्किल है, मच्छर भी बहुत ज़्यादा है। ये समस्या पिछले तीन साल से झेल रहे हैं। सीवर का पानी हमारे खेतों में बह रहा है।”
राम लखन द्वारा जानकरी मिली कि जिन खेतों में सीवर का पानी जाता है उसमें बाजरा, गेहूं और हरी सब्ज़ियों की खेती की जाती है। “कई बार खेत में सीवर का पानी इतना भर जाता है कि ट्रैक्टर तक नहीं चलता।”
शिकायत के बाद भी नहीं हुआ काम
गांव वालों का कहना रहा कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार शिकायत की है। वे जलकल विभाग और गंगा प्रदूषण कार्यालय भी गए पर कोई जवाब नहीं न ही कोई कार्यवाही। एक बार विभाग के कर्मचारी मौके पर आए थे। उन्होंने पाइपलाइन की फोटो भी खिंची थी। इसके बाद कर्मचारी दोबारा नहीं आए। करीब दो साल से पाइपलाइन इसी तरह फटी पड़ी है। अगर समय रहते पाइपलाइन को ठीक नहीं करवाया गया तो खेत और ज़मीन को काफी नुक़सान हो सकता है।
इसकी जानकारी डीएम को भी दी गई थी। जिसमें पाइपलाइन को ठीक करने का मांग किया गया। पर काम शून्य का शून्य। गांव के कुछ लोगों से मिली जानकारी के मुताबिक गांव वाला द्वारा मौखिक रूप से तीन बार शिकायत की गई है।
इस मामले में विभाग का सचिव सुधीर कुमार वर्मा कहना है कि –
लोगों की शिकायत मिलने के बाद कर्मचारी मौके पर जाकर स्थिति देख चुके हैं। उनके अनुसार अभी तक नुक़सान को लेकर लोगों की तरफ से कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। हालाँकि लोगों से नुक़सान की जानकारी देने को कहा गया है। विभाग का ये भी कहना है कि पाइपलाइन को ठीक करने का काम करने की कोशिश की जा रही है। एक हफ़्ते से दस दिन के अंदर जल्द से जल्द पाइपलाइन को ठीक कराने की बात कही गई है।
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