नमस्कार साथियो! मैं मीरा देवी राजनीति, रस, राय के नए एपिसोड में आप सबका फिर से स्वागत करती हूं। इस बार चर्चा छत्तीसगढ़ की करूंगी जहां मुख्यमंत्री विष्णु देव साई ने स्कूलों के ‘युक्तिकरण’ का एलान किया है। अब शिक्षा को लेकर बड़ी राजनीति खेली जा रही है। सरकार का कहना है कि कहीं शिक्षक ज़्यादा हैं, कहीं एक भी नहीं और कहीं बच्चे ही नहीं हैं। तो अब जहां ज़रूरत है वहां शिक्षक भेजे जाएंगे और जिन स्कूलों में बच्चे कम हैं, उन्हें आसपास के स्कूलों में मिलाया जाएगा। सुनने में तो बात सही लगती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और कह रही है। विधानसभा चुनाव 2023 में बीजेपी ने चुनाव से पहले 57 हज़ार शिक्षक भर्ती का वादा किया था लेकिन अब उल्टा हो रहा है। युक्तिकरण की आड़ में दस हजार से ज़्यादा स्कूलों का दोबारा गठन और करीब 4 हज़ार स्कूल बंद करने की योजना है जिसमें सैंतीस हजार पद भी खत्म हो सकते हैं। अब हजारों शिक्षक सड़क पर हैं जो नौकरी बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार एक तरफ शिक्षा का स्तर सुधारने की बात कर रही है और दूसरी तरफ खुद ही स्कूलों पर ताला लगाने जा रही है। असल में यह फैसला कई लोगों की नौकरी पर भारी पड़ सकता है। नौकरी के खतरे के अलावा, शिक्षकों की एक और बड़ी चिंता नए नियमों को लेकर है। इन नियमों के तहत प्राथमिक, माध्यमिक और हाई स्कूल — तीनों स्तरों में से प्रत्येक में एक-एक शिक्षक की कटौती की जा रही है।
उदाहरण के तौर पर, प्राथमिक स्कूलों में 2008 के नियमों के अनुसार एक प्रधानपाठक और दो शिक्षक अनिवार्य थे, लेकिन अब नए दिशा-निर्देशों के अनुसार केवल एक प्रधानपाठक और एक शिक्षक ही नियुक्त किया जाएगा। इससे न सिर्फ शिक्षकों पर कार्यभार बढ़ेगा, बल्कि पढ़ाई की गुणवत्ता भी प्रभावित होगी। यह बदलाव केंद्र सरकार की 2020 की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के मूल सिद्धांतों के भी विरुद्ध है। जब शिक्षकों की संख्या कम होगी, तो बच्चों का समग्र विकास, कौशल निर्माण, मूल्य-आधारित शिक्षा और टेक्नोलॉजी का समावेश जैसे लक्ष्य केवल कागज़ों तक सीमित रह जाएंगे। वहीं दूसरी तरफ सरकार शराब की दुकानों के लिए दरवाज़े खोल रही है। छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव सरकार ने अप्रैल से नई आबकारी नीति 2025—26 लागू की। और इसी नीति के चलते अब इस महीने छत्तीसगढ़ सरकार ने 67 नई शराब की दुकान खोलने की मंज़ूरी दे दी है।
67 नए दुकानों के साथ प्रदेश में शराब दुकानों की कुल संख्या अब 741 हो जाएगी। जहां पहले शराब की सुविधा नहीं थी वहां भी अब दुकान खुलेगी। प्रशासन ज़मीन तलाशने में जुटा है और वजह? राजस्व बढ़ाना। सोचिए स्कूलों के लिए पैसे नहीं हैं लेकिन शराब बेचने से कमाई होगी। यह तर्क अब सरकारी नीति बन गई है। सबसे ज़्यादा मार लड़कियों की पढ़ाई पर पड़ेगी। गांव-देहात की लड़कियां वैसे ही पढ़ाई के लिए कई दिक्कतें झेलती हैं कि घर का काम, भाई से भेदभाव और स्कूल दूर होने पर पढ़ाई छुड़वा देना आम बात है। अब अगर छोटे-छोटे स्कूल बंद हो जाएंगे और बच्चों को दूर भेजा जाएगा तो सबसे पहले लड़कियों को ही स्कूल जाना बंद करवाया जाएगा। माता-पिता डर से भी रोकेंगे और सुविधाओं की कमी से भी।
मतलब साफ है कि सरकार का ये कदम लड़कियों की पढ़ाई को और पीछे धकेल देगा। बीजेपी जो खुद को संस्कृति और नैतिकता की ठेकेदार बताती है वही पार्टी अब शिक्षा से ज़्यादा ध्यान शराब पर दे रही है। जिस पार्टी के नेता गौ रक्षा के नाम पर मारकाट करते हैं वही अब शिक्षा के नाम पर कटौती और शराब की दुकान के नाम पर बढ़ोतरी कर रही है। स्कूल बंद होंगे मगर दारू की दुकान आपके गांव-गली तक ज़रूर पहुंच जाएगी। गांव-देहात के स्कूल सबसे पहले चपेट में आएंगे। दूरदराज़ इलाकों में जहां पहले से ही संसाधनों की कमी है वहां के छोटे स्कूल अब बंद होंगे। बच्चों को कई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाना पड़ेगा। ये दूरी बच्चों को पढ़ाई से और दूर कर देगी। मगर सरकार को इस बात की चिंता नहीं उसे चिंता है कि शराब हर जगह आसानी से मिले और सरकारी खज़ाना भरता रहे। सोचिए, सरकार की प्राथमिकता क्या है, स्कूल या शराब? राज्य सरकार ने अगले साल शराब से 12 हज़ार करोड़ कमाने का लक्ष्य रखा है मगर शिक्षा के हालात बद से बदतर हैं। 2021 के सर्वे में छत्तीसगढ़ के बच्चे पढ़ाई में राष्ट्रीय औसत से नीचे थे। अब जब शिक्षक कम होंगे और स्कूल बंद होंगे तो हालात और बिगड़ेंगे। सवाल बड़ा साफ है कि ये युक्तिकरण है या शिक्षा का कटौती योजना? क्या सरकार स्कूल सुधार रही है या सिर्फ ख़र्चा बचा रही है? क्या आपको लगता है कि सरकार वाकई बच्चों की पढ़ाई को लेकर गंभीर है?
ये भी देखें –
Patna: शराबबंदी के बाद ‘सूखा नशा’ की ओर बढ़ते पटना की बस्तियों के युवा
यदि आप हमको सपोर्ट करना चाहते है तो हमारी ग्रामीण नारीवादी स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें और हमारे प्रोडक्ट KL हटके का सब्सक्रिप्शन लें’