बिहार पटना जिले के मसौढ़ी नगर परिषद के वार्ड नंबर 6, 18 और 23 में इन दिनों गंदगी की समस्या बेहद गंभीर हो गई है। इन इलाकों में न तो कहीं डस्टबिन की व्यवस्था है और न ही कचरा उठाने की कोई पक्की व्यवस्था दिखाई देती है।
रिपोर्टिंग – सुमन, लेखन – रचना
ऐसे में लोग मजबूरी में सड़क, नालियों और खाली पड़ी जगहों पर कचरा फेंक देते हैं। धीरे-धीरे यही कचरा ढेर बन जाता है और आसपास रहने वाले लोगों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर देता है। खासकर गर्मी के मौसम में यह समस्या और भी ज्यादा बढ़ जाती है।
वार्ड 23, घर के सामने कचरा, बदबू से जीना मुश्किल
वहां के लोगों से खबर लहरिया टीम द्वारा जानकारी ली गई तो वार्ड नंबर 23 की रहने वाली विद्या देवी ने बताया कि उनके घर के सामने नाली में कचरा जमा है। कुछ दिन पहले सफाईकर्मी आए थे नाली की सफाई की और सारा कचरा बाहर निकालकर वहीं छोड़ गए लेकिन उसे उठाने के लिए दोबारा नहीं आए। अब वही कचरा सड़ रहा है और भयानक बदबू फैला रहा है। उनका कहना है कि दरवाजे पर बैठना भी मुश्किल हो जाता है। ऊपर से जानवर आकर उसी जगह गंदगी करते हैं जिससे स्थिति और खराब हो जाती है।
वहीं पास में खाली पड़ी जगह पर लोग कचरा फेंक देते हैं और कुछ लोग वहां खुले में पेशाब भी कर देते हैं। महिलाओं के लिए यह स्थिति और भी शर्मनाक हो जाती है। विद्या देवी कहती हैं कि अगर कोई बाहर बैठा हो और इस तरह की हरकतें होती दिखें तो उन्हें मजबूरी में मुंह फेरना पड़ता है या सिर झुकाना पड़ता है।
सुशीला देवी भी बताती हैं कि नगर परिषद और स्टेशन पास में होने के बावजूद इलाके में कहीं भी डस्टबिन नहीं है जिससे लोग कचरा इधर-उधर फेंकते हैं और गंदगी बढ़ती जाती है।
वार्ड 18, खुली नालियां और अधूरी सफाई व्यवस्था
वार्ड नंबर 18 के निवासी विनोद कुमार का कहना हैं कि उनके इलाके में बड़ी-बड़ी नालियां बनी हुई हैं लेकिन उन्हें ढंका नहीं गया है। नियम के अनुसार नालियों को ढकना चाहिए ताकि बदबू और मच्छरों से बचाव हो सके लेकिन यहां ऐसा नहीं किया गया। उनका आरोप है सफाईकर्मी भी केवल मुख्य सड़कों पर झाड़ू लगाते हैं जबकि छोटी गलियों में सफाई नहीं होती।
वह यह भी कहते हैं कि कचरा उठाने वाली गाड़ी का कोई तय समय नहीं होता। लोगों को पता ही नहीं चलता कि गाड़ी कब आई और कब चली गई। इसी कारण लोग जहां जगह मिलती है वहीं कचरा डाल देते हैं। नालियों की सफाई भी बहुत कम होती है और जब होती है तो कई बार लोगों को बार-बार शिकायत करनी पड़ती है। इससे गंदगी बढ़ती है और लोग बीमार पड़ने लगते हैं।
वार्ड 6, खुद सफाई करने को मजबूर लोग
वार्ड नंबर 6 में हालात और भी खराब हैं। यहां की महिलाएं बताती हैं कि नालियां पूरी तरह भर चुकी हैं और गंदा पानी सड़क पर बह रहा है लेकिन सफाई करने कोई नहीं आता। अगर कभी सफाई होती भी है तो कचरा निकालकर एक किनारे छोड़ दिया जाता है जो बाद में सड़ने लगता है और बदबू फैलाता है।
लोगों द्वारा यह भी कहना था कि उन्हें खुद ही झाड़ू लगानी पड़ती है और नालियां साफ करनी पड़ती हैं क्योंकि सफाईकर्मी छोटी गलियों में नहीं आते। उनका कहना है कि अगर हर गली में डस्टबिन रख दिया जाए तो लोग कचरा इधर-उधर नहीं फेंकेंगे और काफी हद तक समस्या कम हो सकती है।
नगर परिषद का जवाब, लोगों में जागरूकता की कमी
नगर कार्यपालक पदाधिकारी राजू रंजन से बातचीत में उन्होंने बताया कि मसौढ़ी के लोग अभी उतने जागरूक नहीं हैं कि नियमों का सही से पालन कर सकें। उन्होंने कहा कि काफी कोशिश की गई है कि लोग सुबह 6 बजे आने वाली कचरा गाड़ी में ही कचरा डालें लेकिन लोग समय का ध्यान नहीं रखते और अपनी गलती मानने के बजाय दूसरों को जिम्मेदार ठहराते हैं। इसलिए अब लोगों को जागरूक करने के लिए एक अभियान चलाने की योजना बनाई जा रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि नगर परिषद के कर्मचारी नियमित रूप से सफाई करते हैं झाड़ू लगाते हैं और कचरा उठाते हैं। नालियों की सफाई आमतौर पर तब की जाती है जब वह पूरी तरह भर जाती हैं या जब लोग कॉल करके शिकायत करते हैं। उनका कहना है कि हर दो-तीन दिन में नाली साफ करने का कोई तय नियम नहीं है लेकिन तीन से छह महीने के अंदर सफाई करवाई जाती है खासकर त्योहारों के समय भी।
राजू रंजन ने यह भी कहा कि कई बार लोग खुद ही नालियों में कचरा डाल देते हैं जिससे पानी रुक जाता है और गंदगी बढ़ती है। सफाई के दौरान नालियों से कांच और अन्य चीजें भी निकलती हैं, जिससे कर्मचारियों को दिक्कत होती है। इसलिए जरूरी है कि लोग खुद भी जिम्मेदारी समझें और कचरा सही जगह पर डालें तभी सफाई व्यवस्था बेहतर हो पाएगी।
गंदगी से बढ़ रहा बीमारियों का खतरा
गर्मी का मौसम शुरू होते ही गंदगी और कचरे की समस्या तेजी से बढ़ने लगती है। जगह-जगह पड़े कचरे के ढेर सड़ने लगते हैं जिससे तेज बदबू फैलती है और लोगों का वहां रहना तक मुश्किल हो जाता है। घर के दरवाजे पर जमा कचरा लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को भी प्रभावित करता है। ऐसे माहौल में मच्छर, मक्खी और तरह-तरह के कीड़े बहुत तेजी से पनपते हैं जो कई खतरनाक बीमारियों को जन्म देते हैं। कचरे के आसपास जमा गंदा पानी मच्छरों के लिए सबसे अच्छा ठिकाना बन जाता है जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रमण वाली बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है।
घनी आबादी वाले इलाकों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है क्योंकि वहां सफाई की व्यवस्था अक्सर कमजोर रहती है और कचरा जल्दी जमा हो जाता है। थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ी समस्या का रूप ले लेती है और बीमारियां तेजी से फैलने लगती हैं।
सरकारें स्वच्छता को लेकर बड़े-बड़े वादे करती हैं लेकिन कई जगहों पर यह सिर्फ नाम तक सीमित नजर आता है जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही होती है। असल में जरूरत है नियमित सफाई की कचरे के सही प्रबंधन की और लोगों में जागरूकता फैलाने की ताकि लोग खुद भी जिम्मेदारी समझें और कचरा इधर-उधर न फेंकें। जब प्रशासन और आम जनता मिलकर काम करेंगे तभी इस समस्या से राहत मिल सकती है और गर्मी के मौसम में फैलने वाली बीमारियों से बचाव संभव हो पाएगा।
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