खबर लहरिया National Bharat Tiwari Encounter: भरत तिवारी एनकाउंटर, विरोध कानून के लिए या जाति के लिए? The Kavita Show

Bharat Tiwari Encounter: भरत तिवारी एनकाउंटर, विरोध कानून के लिए या जाति के लिए? The Kavita Show

भरत तिवारी के एनकाउंटर के बाद अचानक पुलिस एनकाउंटर, संविधान और लोकतंत्र की बातें होने लगीं। लेकिन सवाल है- क्या यही संवेदनशीलता हर एनकाउंटर के समय दिखाई देती है? उत्तर प्रदेश में 2017 से अब तक हज़ारों पुलिस एनकाउंटर हुए हैं। अदालत ने भी पुलिस की कार्यप्रणाली और राजनीतिक जवाबदेही पर गंभीर टिप्पणियाँ की हैं। फिर भी वे मामले कभी राष्ट्रीय बहस का विषय नहीं बने। लेकिन भरत तिवारी के एनकाउंटर के बाद उन्हें भगत सिंह और चंद्रशेखर आज़ाद से जोड़ने की कोशिश शुरू हो गई। सोशल मीडिया पर “जिओ तिवारी जनेऊधारी”, “ब्राह्मण का खून है” जैसे नारे खुलेआम लगाए गए और एक जातीय पहचान को इस पूरे नैरेटिव का केंद्र बना दिया गया। ये वीडियो एनकाउंटर का समर्थन नहीं करता। सवाल है कि क्या लोगों को एनकाउंटर पर गुस्सा केवल तब आता है और पुलिस से जवाबदेही केवल तब याद आती है जब मृतक सवर्ण ब्राह्मण हो? इन्हीं सवालों पर आज की चर्चा।

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