खबर लहरिया Blog Bharat Tiwari Encounter Case: भरत तिवारी का पुलिस द्वारा एनकाउंटर, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर, क्या है पूरा मामला जानें

Bharat Tiwari Encounter Case: भरत तिवारी का पुलिस द्वारा एनकाउंटर, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर, क्या है पूरा मामला जानें

बिहार के भोजपुर जिले के एक छोटे से गांव बिलौटी में हुई एक पुलिस मुठभेड़ ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया। इस मुठभेड़ में 17 जून 2026 को 28 वर्षीय भरत भूषण तिवारी की मौत हो गई। पुलिस का दावा है कि यह एक वैध कार्रवाई थी, जबकि परिवार, ग्रामीण और कई सामाजिक संगठनों का आरोप है कि यह एक फर्जी एनकाउंटर था। भरत तिवारी कौन थे, वे किन मुद्दों को उठा रहे थे, घटना वाले दिन क्या हुआ और उनकी मौत के बाद क्यों पूरे बिहार में राजनीतिक तथा सामाजिक बहस छिड़ गई इन्हीं सवालों को समझने के लिए इस पूरे मामले को जानना जरुरी है। 

भरत भूषण तिवारी (फोटो साभार: भरत तिवारी फेसबुक अकाउंट)

पूरा मामला क्या है? 

यह घटना बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में स्थित एक गांव की  है, जो शाहपुर प्रखंड के अंतर्गत आने वाले की है। यह गांव गंगा नदी के किनारे के इलाके में पड़ता है और लंबे समय से बाढ़ और नदी कटाव की समस्या से प्रभावित रहा है।

बिलौटी उन गांवों में से है जहां हर साल बरसात और बाढ़ के दौरान लोगों को अपनी जमीन, घर और खेती के नुकसान का डर बना रहता है। भरत भूषण तिवारी का घर भी इसी गांव में था। कई स्थानीय लोगों का कहना है कि गंगा के कटाव की वजह से गांव का कुछ हिस्सा धीरे-धीरे नदी में डूबता चला गया और लोगों के सामने विस्थापन (घर छोड़ने की नौबत) का खतरा पैदा हुआ।

इसी वजह से गांव में बाढ़ सुरक्षा, तटबंध, पुनर्वास और मुआवजे जैसे मुद्दे अक्सर चर्चा में रहे हैं। 

भरत भूषण ने बाढ़ में तबाह हो रहे गांव की आवाज उठाई 

भरत भूषण तिवारी ने अपने गांव को बचाने के लिए अधिकारीयों से तक मिले लेकिन कोई करवाईं और हल निकलता नहीं दिखाई दिया जिसके बाद भरत ने सोशल मीडिया का सहारा लिया। वह इस समस्या को लेकर प्रशासन से सवाल उठाते थे और सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते थे, जिसके कारण उनका नाम राज्यभर में चर्चा में आया। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों ने उनकी इस गतिविधियों के एक अलग तरह से सामने लाया। भरत तिवारी पर आरोप लागए गई कि पिछले कई महीनों से, तिवारी लगातार रूप से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल प्रशासन और पुलिस की आलोचना करने के लिए कर रहे थे। 

 

भरत तिवारी की मांग 

भरत तिवारी की मुख्य मांग बिलौटी और आसपास के गंगा कटाव प्रभावित गांवों के लोगों के पुनर्वास (बसाने) और उनकी जमीन के अधिकारों से जुड़ी बताई जा रही है। भरत की सरकार और प्रशासन से मांग थी कि गंगा नदी के कटाव से जिन परिवारों की जमीन और घर खत्म हो गए हैं, उन्हें सरकार स्थायी रूप से बसाए।

  • कटाव पीड़ितों को वैध जमीन का पट्टा (मालिकाना अधिकार) दिया जाए।
  • विस्थापित परिवारों को मुआवजा और सरकारी सुविधाएं मिलें।
  • कटाव रोकने के लिए ठोस तटबंध और सुरक्षा कार्य कराए जाएं।
  • जवइनिया और आसपास के कटाव प्रभावित लोगों को सरकारी रिकॉर्ड में मान्यता देकर उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए।

भरत तिवारी का पुलिस द्वारा घेराव 

इस मामले को बढ़ता देख पुलिस द्वारा 16 जून को बड़ी संख्या में पुलिस भरत के घर पहुंची। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल है। वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि पुलिस भरत को पकड़ने आई है लेकिन भरत के हाथ में बंदूक है और वह पुलिस पर अपनी नारजगी व्यक्त करते हैं। 

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भरत तिवारी को बताया मानसिक अस्वस्थ 

द हिन्दू की एक रिपोर्ट के अनुसार 16 जून 2026 के एक बयान में कहा गया कि “शाहपुर पुलिस स्टेशन को सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति हथियार लेकर घूम रहा है, लेकिन पुलिस टीम ने पाया कि वह मानसिक रूप से अस्थिर है। जनता की सुरक्षा के लिए, उसे इलाज और देखभाल के लिए मानसिक स्वास्थ्य केंद्र में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस टीम उसके पास से हथियार को सुरक्षित रूप से बरामद करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।” 

इसके अगले ही दिन बयान दूसरे तरीके से दिया गया। पुलिस ने एक बयान जारी किया जिसमें कहा गया “17 जून, 2026 को लगभग सुबह 9:00 बजे, पुलिस को सूचना मिली कि भरत भूषण तिवारी नामक एक व्यक्ति पिस्तौल लहराते हुए हवा में गोलियां चला रहा है। पुलिस और भोजपुर एसटीएफ टीम ने बार-बार उस व्यक्ति से आत्मसमर्पण करने का आग्रह किया। हालांकि, उसने अपने हाथ में पकड़ी पिस्तौल से पुलिस पर रुक-रुक कर गोलियां चलाना जारी रखा। उसके इस कृत्य से पुलिस टीम और आम जनता के जीवन और सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया।”

फेसबुक लाइव में आत्मसम्पर्ण करते दिखे भरत तिवारी 

पुलिस का ऊपर दिए गए बयान की सच्चाई भरत के वायरल वीडियो से सामने आई जिसमें भरत ने अपनी बंदूक फेंककर आत्मसम्पर्ण किया। वीडियो में भरत बोलते हुए दिख रहे हैं कि इसके बाद जो हमारा होगा उसके जिम्मेदार ये सब होंगे। इसके बाद का क्या हुआ इसकी कोई जानकारी सामने नहीं आई है। बताया जा रहा है कि पुलिस की घेराबंदी के दौरान भरत भूषण के अपनी पिस्तौल सौंप देने के बाद भी, पुलिस ने तीन राउंड गोलियाँ चलाईं। भरत भूषण की बुधवार 17 जून 2026 को पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) में मौत हो गई। 

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भरत की मौत के बाद जनता में आक्रोश और विरोध 

अगले दिन गुरुवार 18 जून को भरत भूषण तिवारी का शव शाहपुर पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत उसके पैतृक गांव बिलौटी लाया गया। इस पर विरोध जताते हुए गांव वालों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया। गुस्साए ग्रमीणों ने शहीद हुए युवक क्रोधित ग्रामीणों ने शव को आरा-बक्सर चार लेन वाले राजमार्ग पर रख दिया और सड़क जाम कर दिया, जिससे यातायात बाधित हो गया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब भरत ने पुलिस के सामने बंदूक डालकर आत्मसम्पर्ण कर दिया था इसके बावजूद गोली क्यों मारी गई? 

 

विरोध स्थल पर बड़ी संख्या में गाँव निवासी जमा हो गए और मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को नाकाबंदी समाप्त करने और सामान्य यातायात व्यवस्था बहाल करने के लिए मनाने के प्रयास शुरू किए।

परिवार और ग्रामीणों का पक्ष:

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मृतक भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी ने बताया कि ‘मेरा बेटा बिल्कुल सही था और वह समाज के लिए लड़ाई लड़ रहा था। उसने कोई अपराध नहीं किया था। न ही उस पर कोई चार्जशीट या FIR थी।’ भरत की बहनों ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा पुलिस को ये बात बर्दाश नहीं हुई कि भरत ने बंदूक उठा ली और पुलिस ने गोली चला दी। जो लड़का बचपन में गोली से डरता था उसे आखिर क्यों बंदूक उठाने की जरूरत पड़ी।

 

4 पुलिसकर्मी निलंबित 

मामला बढ़ जाने के बाद 19 जून को चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया जिनमें एक सब-इंस्पेक्टर और एक असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर शामिल थे। बताया जा रहा है कि प्रारंभिक जांच में कर्तव्य में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद यह कदम उठाया गया और यह कार्रवाई भोजपुर के एसपी राज के प्रस्ताव पर की गई। 

पुलिस का आरोप 

भरत तिवारी के गांव में मौके पर पहुंची पुलिस ने आरोप लगाया कि भरत तिवारी के पास अवैध हथियार था। भरत तिवारी ने पहले गोली चलाई लेकिन अब तक पुलिस ने कोई ऐसा स्वतंत्र सार्वजनिक सबूत जारी नहीं किया है जिससे यह स्पष्ट रूप से साबित हो जाए कि भरत तिवारी ने पहले गोली चलाई थी। दूसरी ओर, एक वायरल वीडियो में उन्हें हथियार फेंकते हुए दिखाए जाने का दावा किया जा रहा है, जिसके कारण पूरे एनकाउंटर पर सवाल उठे हैं। इसी वजह से जांच बैठाई गई है और बिहार पुलिस ने भी कार्रवाई में “चूक” होने की बात स्वीकार की है।

मामले की जाँच के आदेश 

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने X पर जानकारी साझा करते हुए कहा, “भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17.06.2026 को हुई पुलिस मुठभेड़ की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया गया है। न्यायिक जांच का उद्देश्य घटना के सभी पहलुओं की पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ गहन जांच सुनिश्चित करना है।”

 

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर 

इस मामले को लेकर आज 22 जून को अधिवक्ता विशाल तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की है। याचिकाकर्ता का कहना है कि कानून के शासन को बनाए रखने और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए इस पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। कोर्ट में दायर याचिका में इस मुठभेड़ को साफ तौर पर ‘फर्जी एनकाउंटर’ बताया गया है। अदालत से इसकी पूरी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश जारी करने की मांग की है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया 

घटना के बाद पूरे बिहार में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई। एक पक्ष इसे पुलिस की वैध कार्रवाई बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे फर्जी एनकाउंटर बताते हुए निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है। 

समजवादी पार्टी के प्रुमख अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा “लोकतंत्र में एनकाउंटर कल्चर नहीं होना चाहिए। हमारा संविधान कभी भी एनकाउंटर की इजाज़त नहीं देता; लोकतंत्र तभी मज़बूत होगा जब न्याय मिलेगा।”

 

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्वनी चौबे ने मीडिया से बातचीत में कहा कि “ब्रम्ह्मणों को लेकर टारगेट नहीं किया जा सकता है। मैं भी एक ब्रह्माण हूँ तो आओ मुझे गोली मारो।” 

 

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री हैं जीतन राम मांझी ने अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा “अगर आप गैर-कानूनी पिस्तौल दिखाकर पुलिस, या यूं कहें कि पूरे सिस्टम को चुनौती देते हैं, तो ठीक है; लेकिन अब जब पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उसे काबू में किया, तो यह गलत है। यह नहीं चलेगा…आपको करारा जवाब मिलेगा…बहुत बढ़िया भोजपुर पुलिस…”

 

देश में बढ़ते एनकाउंटरों को लेकर बहस लगातार तेज हो रही है। एक ओर सरकार और पुलिस इन्हें अपराध पर नियंत्रण तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने का प्रभावी माध्यम बताती हैं, वहीं दूसरी ओर मानवाधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया से पहले सजा देना संविधान और कानून के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। फ़िलहाल इस मामले के लिए बिहार के मुख्य मंत्री समार्ट चौधरी ने जाँच के आदेश दिए हैं और यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुँच गया है।  

 

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