जिला वाराणसी में जिला प्रशासन ने कचहरी परिषद जिला न्यायालय क्षेत्र के अंदर और और आसपास किसी भी प्रकार के राजनीतिक प्रदर्शन, धरना, पुतला दहन, जुलूस और ज्ञापन देने पर रोक लगा दी है। जिलाधिकारियों की ओर से जारी निर्देश के अनुसार अब ऐसे सभी कार्यक्रम केवल पहले से निर्धारित स्थल शास्त्री पुल की नीचे ही किए जा सकेंगे।
रिपोर्ट – सुशीला, लेखन – रचना
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उलंघन करने वालों के खिलाफ क़ानूनी कार्यवाही की जाएगी। जिला मुख्यालय लंबे समय से ऐसा स्थान रहा है जहां गांव और शहर के लोग अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर पहुँचते रहते हैं। छोटी-छोटी शिकायतों से लेकर बड़े जनहित के मुद्दों तक लोग धरना प्रदर्शन और ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन का ध्यान अपनी ओर खिचते रहे हैं। ऐसे में नए आदेश के बाद अब लोग अपनी बात सीधे जिला मुख्यालय तक नहीं पहुंचा सकेंगे।
लोगों की आवाज दबाने की कोशिश
इस मुद्दों पर लोगों की अलग-अलग राय भी सामने आ रही है। लोक चेतना समिति के नंदलाल मास्टर के मुताबिक वे अपने माँगों को लेकर जिला मुख्यालय पहुंचे हुए थे लेकिन पुलिस ने उन्हें वहां से हटाकर शास्त्री पुल की नीचे निर्धारित स्थल पर भेज दिया। उनका कहना है कि प्रशासन का तर्क यह है कि यह व्यवस्था उच्च अधिकरियों और जिलाधिकारियों के निर्देश पर लागू की गई है। नंदलाल मास्टर का मानना है कि नए नियम से आम लोगों की आवाज को सीमित करने की कोशिश हो रही है। हालाँकि प्रशासन का कहना है कि यह व्यवस्था क़ानून व्यवस्था बनाए रखने और न्यायालय क्षेत्र में अव्यवस्था रोकने के लिए लागू की गई है।
अब देखना होगा कि इस फैसले का आम लोगों के विरोध प्रदर्शन और अपनी माँगों को प्रशासन तक पहुँचाने के तरीकों पर क्या असर पड़ता है।
लोगों और मीडिया तक पहुँचती हैं बातें
सामाजिक कार्यकर्ता दुर्गा मैथुन के मुताबिक जिला मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन करने से उनकी आवाज आम लोगों, मीडिया और प्रशासन तक आसानी से पहुँचती थी।अब विरोध प्रदर्शन को शास्त्री पुल के नीचे निर्धारित करने से मांगों की समस्याएं और मांगें सीमित दायरे में रह जाएँगी। उनका आरोप है कि इससे आम जनता कि आवाज को दबाने और उसे व्यापक स्तर पर पहुंचने से रोकने की कोशिश की जा रही है।
वहीं सामाजिक कार्यकर्ता कुसुम वर्मा ने इस फैसले पर अपनी नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि इससे लोगों के मन में डर का माहौल बनाया जा रहा है और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार पर पूरा असर पड़ सकता है। आम नागरिकों को अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर प्रशासन के सामने आवाज उठाने का अधिकार मिलना चाहिए और वे इस मुद्दे को आगे भी उठाते रहेंगे।
कई संगठनों द्वारा इसके विरोध में प्रतिक्रिया दी गई
जिला मुख्यालय परिसर में धरना प्रदर्शन पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर और कई संगठनों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश सचिव एवं अधिवक्ता रामराज अशोक ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा कि जिला मुख्यालय ऐसा स्थान था, जहां लोग अपनी समस्याएं और मांगें सीधे प्रशासन और अधिकारियों तक पहुंचाते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध-प्रदर्शन को मुख्यालय से दूर निर्धारित स्थान पर भेजने से लोगों की आवाज पहले की तरह प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पाएगी। उनका संगठन आगे भी उठाएगा और लोगों के अधिकारों के रक्षा के लिए आंदोलन की रणनीति तैयार करेगा। नागरिकों को अपनी मांग प्रशासन तक पहुँचाने का अधिकार मिलना ही चाहिए।
हालाँकि इस फैसले को लेकर कुछ लोगों की राय अलग भी रहीं। एससीएम कर्मवीर का मानना है कि जिला मुख्यालय में परिसर में बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने से कई बार अव्यवस्था की स्थिति बन जाती थी। न्यायालय और प्रशासनिक कार्यालयों में आने वाले लोगों को भी इससे परेशानी होती है। इसी कारण जिला प्रशासन ने धरना प्रदर्शन और ज्ञापन के लिए अलग से जगह बनाई है। उनका मानना है कि इससे विरोध प्रदर्शन करने वालों को भी एक निश्चित जगह मिलेगी और जिला मुख्यालय में भीड़भाड़ कम होगी।
यदि आप हमको सपोर्ट करना चाहते है तो हमारी ग्रामीण नारीवादी स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें और हमारे प्रोडक्ट KL हटके का सब्सक्रिप्शन लें’



