खबर लहरिया Hindi Bihar Gram Panchayats to levy and collect taxes: बिहार में अब ग्राम पंचायत भी वसूल सकेगी कर, बिहार कैबिनेट में मिली मंजूरी 

Bihar Gram Panchayats to levy and collect taxes: बिहार में अब ग्राम पंचायत भी वसूल सकेगी कर, बिहार कैबिनेट में मिली मंजूरी 

अब तक आपने सड़क, बिजली, पेट्रोल, जीएसटी, संपत्ति और आय जैसे कई तरह के टैक्स के बारे में सुना होगा। लेकिन अब बिहार के गांवों में रहने वाले लोगों के लिए एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। बुधवार 15 जुलाई 2026 को बिहार सरकार ने ग्राम पंचायतों को भी कुछ तय नियमों के तहत टैक्स लगाने और वसूलने का अधिकार दे दिया है। इसका उद्देश्य पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और गांवों के विकास के लिए उन्हें अपने स्तर पर संसाधन जुटाने में सक्षम बनाना है।

फोटो साभार: R.V. Moorthy

बिहार मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में “ग्राम पंचायत कर, दरें और शुल्क नियम, 2026” के मसौदे (ड्राफ्ट) को मंजूरी दी। इस फैसले के बाद ग्राम पंचायतें अपने क्षेत्र में सरकार द्वारा तय किए गए कुछ कामों, सेवाओं, दुकानों, व्यवसायों, होर्डिंग और भूमि जैसी चीजों पर कर (टैक्स) और शुल्क लगा सकेंगी।

कैबिनेट विभाग के अपर मुख्य सचिव, अरविंद चौधरी ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा “अब तक यह अधिकार कानून में तो था, लेकिन आवश्यक नियम नहीं बनने के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका था।”

कर (Tax) क्या होता है?

कर (टैक्स) वह राशि होती है जो नागरिक, व्यापारी या संस्थान सरकार या किसी स्थानीय निकाय को कानून के अनुसार देते हैं। इस पैसे का उपयोग सड़क, नाली, पानी, सफाई, स्ट्रीट लाइट, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के विकास और रखरखाव में किया जाता है। यानी टैक्स का उद्देश्य जनता से पैसा लेकर उसी क्षेत्र की सुविधाओं और विकास पर खर्च करना होता है।

बिहार में ग्राम पंचायत कौन-कौन से कर और शुल्क लगा सकेगी?

नए नियमों के अनुसार ग्राम पंचायतें अपने क्षेत्र में निम्नलिखित मदों पर कर या शुल्क वसूल सकेंगे। 

  • खेती की जोत (भूमि के कब्जे) पर जोत कर।
  • पंचायत क्षेत्र में चल रहे व्यापार और व्यवसाय पर शुल्क।
  • दुकानों, उद्योगों और छोटे-बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर निर्धारित शुल्क।
  • विज्ञापन, होर्डिंग और बैनर लगाने पर शुल्क।
  • पंचायत द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाओं, जैसे सफाई, पानी या अन्य सुविधाओं के लिए यूजर चार्ज (उपयोगकर्ता शुल्क)।

हालांकि किस वस्तु पर कितना कर लगेगा, इसकी अधिकतम सीमा और प्रक्रिया सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार तय की जाएगी।

सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?

सरकार का कहना है कि अभी तक ग्राम पंचायतें विकास कार्यों के लिए राज्य सरकार से मिलने वाले अनुदान पर काफी हद तक निर्भर थीं। अब पंचायतें अपने स्तर पर राजस्व जुटा सकेंगी।

इससे –

  • पंचायतों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
  • स्थानीय विकास कार्यों के लिए धन उपलब्ध रहेगा।
  • छोटी-छोटी जरूरतों के लिए बार-बार राज्य सरकार पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
  • गांवों में विकास कार्यों की गति तेज हो सकती है।

किसानों पर क्या असर होगा?

किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण विषय जोत कर है। जोत कर यानी खेती की जमीन पर लगाया जाने वाला टैक्स। जिस किसान या व्यक्ति के पास खेती करने के लिए जमीन है और वह उस जमीन का उपयोग करता है, उससे नियमों के अनुसार यह कर लिया जा सकता है। फिलहाल सरकार ने केवल नियमों को मंजूरी दी है। किस क्षेत्र में कितना कर लगेगा और किन लोगों पर लागू होगा, यह स्थानीय स्तर पर तय प्रक्रिया के अनुसार होगा।

यदि पंचायत इस कर से प्राप्त राशि का सही उपयोग करती है, तो किसानों को बेहतर ग्रामीण सड़कें, नालियां, सिंचाई से जुड़ी सुविधाएं, सफाई और अन्य स्थानीय विकास कार्यों का लाभ भी मिल सकता है।

बिहार पंचायत चुनाव को लेकर भी बड़ा फैसला

कैबिनेट ने पंचायत चुनाव नए परिसीमन के आधार पर कराने की मंजूरी भी दी है।

  • पंचायत चुनाव के लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाया जाएगा।
  • इसी के अनुसार ग्राम पंचायत, वार्ड, पंचायत समिति और जिला परिषद क्षेत्रों का गठन और पुनर्गठन होगा।
  • जहां जरूरत होगी वहां नए क्षेत्र बनाए जाएंगे और पुराने क्षेत्रों का परिसीमन किया जाएगा।
  • सरकार का कहना है कि इससे सभी क्षेत्रों को संतुलित प्रतिनिधित्व मिलेगा और विकास योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन हो सकेगा।

परिसीमन यानी गांव, वार्ड और पंचायत की सीमाओं को दोबारा तय करना, ताकि हर क्षेत्र के लोगों को अपनी आबादी के हिसाब से अपने प्रतिनिधि चुनने का समान मौका मिल सके। 

फिलहाल इन दोनों ही फैसले से एक ओर पंचायतों के पास विकास कार्यों के लिए अपनी आय जुटाने का रास्ता खुलेगा, वहीं दूसरी ओर नए परिसीमन के जरिए चुनाव क्षेत्रों का पुनर्गठन किया जाएगा ताकि स्थानीय निकायों का गठन मौजूदा जरूरतों के अनुरूप हो सके। हालांकि इन फैसलों का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कर किस तरह लागू किए जाते हैं, उनकी दरें क्या होती हैं। सवाल लेकिन यही है कि क्या लोगों से लिए गए कर राशि का वास्तविक इस्तेमाल लोगों की बुनियादी जरूरतों में हो पाएगा? क्या उन्हें गांव स्तर पर टूटी सड़कों, पानी की समस्या, बिजली और जर्जर स्कूल से छुटकारा मिल पाएगा? 

 

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