खबर लहरिया Hindi छत्तीसगढ़ में अनोखी राखी परंपरा: भाई ही नहीं, दरवाजे से बैलगाड़ी तक बांधते हैं राखी

छत्तीसगढ़ में अनोखी राखी परंपरा: भाई ही नहीं, दरवाजे से बैलगाड़ी तक बांधते हैं राखी

राखी का नाम आते ही हमारे मन में भाई-बहन का रिश्ता आता है, लेकिन छत्तीसगढ़ के कई ग्रामीण इलाकों में राखी की परंपरा इससे कहीं आगे है। यहां राखी सिर्फ भाई की कलाई पर नहीं, बल्कि घर के दरवाजे, संदूक, साइकिल, बैलगाड़ी और खेती-किसानी में इस्तेमाल होने वाले फावड़े, हंसिया और दूसरे औजारों पर भी बांधी जाती रही है। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि इन चीजों को परिवार का हिस्सा माना जाता था। दरवाजे पर राखी घर की सुरक्षा के लिए, संदूक पर उसमें रखी चीजों की सलामती के लिए और खेती के औजारों पर अच्छी फसल और खुशहाली की कामना के लिए बांधी जाती थी। लेकिन समय के साथ राखी का त्योहार भी बदला है। पहले कम खर्च में त्योहार मन जाता था, जबकि अब राखियों की कीमत, डिजाइन और उपहारों का चलन बढ़ गया है। देखिए छत्तीसगढ़ की इस अनोखी परंपरा में राखी का बदलता रूप और जानिए क्यों यहां राखी सिर्फ भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं रही।

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