आज 5 जून 2026 को विश्व भर में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है। इस अवसर पर पटना के गांधी मैदान के पास स्थित श्रीकृष्ण विज्ञान केंद्र में पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए पेंटिंग एवं रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद द्वारा किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रोफेसर गोपाल शर्मा उपस्थित रहे।
आज पर्यावरण गंभीर संकट का सामना कर रहा है। बढ़ता प्रदूषण, पेड़ों की कटाई, ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन मानव जीवन तथा प्रकृति दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं। यदि समय रहते पर्यावरण की रक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, शुद्ध पानी और सुरक्षित वातावरण मिलना कठिन हो जाएगा। इसी उद्देश्य से लोगों को जागरूक करने के लिए हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। पर्यावरण के प्रति स्कूलों में भी बच्चों को जागरूक करने के लिए प्रतियोगिता की जाती है। इसी तरह की प्रतियोगिता पटना के श्रीकृष्ण विज्ञान केंद्र में आयोजित की गई।
इस वर्ष 2026 की प्रतियोगिता में पटना के लगभग 15 से 20 स्कूलों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। इस प्रतियोगिता में फुलवारी शरीफ के पेठिया बाजार के रहने वाले बच्चों ने भी भाग लिया। इनमें अधिकांश निजी विद्यालयों के छात्र-छात्राएं थे, लेकिन फुलवारी शरीफ प्राथमिक विद्यालय के 13 विद्यार्थियों ने भी अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक आयोजित की गई।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश
विश्व पर्यावरण दिवस का उद्देश्य लोगों को प्रकृति संरक्षण, वृक्षारोपण, जल संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के प्रति जागरूक करना है। इसी संदेश को ध्यान में रखते हुए बच्चों ने अपनी पेंटिंग और प्रस्तुतियों के माध्यम से हरित पृथ्वी, स्वच्छ पर्यावरण और पेड़ों के महत्व को दर्शाया। बच्चों की रचनाओं में प्रकृति के प्रति प्रेम और पर्यावरण बचाने का संदेश साफ दिखाई दिया।
बच्चों का उत्साह और उपलब्धियां
15 वर्षीय दिव्या, जो कक्षा 7 की छात्रा हैं। उन्होंने पहली बार प्रतियोगिता में भाग लिया। उन्होंने बताया कि अच्छे प्रदर्शन के लिए उन्हें प्रमाण पत्र और उपहार मिला, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है।
13 वर्षीय दीपा कुमारी, कक्षा 5 की छात्रा, पिछले दो वर्षों से इस प्रतियोगिता में भाग ले रही हैं। इस बार उन्हें द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि लगातार प्रयास के बाद पुरस्कार मिलना उनके लिए गर्व की बात है। दीपा का मानना है कि सरकारी स्कूल के बच्चों को भी अवसर मिलने पर वे किसी से कम नहीं हैं।
7 वर्षीय दीप ने पर्यावरण के मुद्दे पर रचनात्मक प्रस्तुति में पेड़ का रूप धारण किया। उन्होंने बरगद के पत्तों, रंगों और हस्तनिर्मित सामग्री का उपयोग कर अपनी प्रस्तुति तैयार की। उनकी अनूठी प्रस्तुति को देखकर उपस्थित अतिथि और निर्णायक काफी प्रभावित हुए। उन्हें भी प्रमाण पत्र और उपहार देकर सम्मानित किया गया।
शिक्षक की मेहनत लाई रंग
विद्यालय की शिक्षिका नीतू ने बताया कि वे कई वर्षों से बच्चों को इस तरह की प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए प्रेरित करती रही हैं। पहले वे अपनी बेटी को लेकर विज्ञान केंद्र आती थीं और अब अपने विद्यालय के बच्चों को ऐसे मंचों तक पहुंचा रही हैं।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष 13 बच्चों की टीम को प्रतियोगिता में लेकर आई थीं। बच्चों की तैयारी पिछले एक महीने से चल रही थी, जबकि पेंटिंग और अन्य गतिविधियों की विशेष तैयारी अंतिम पांच दिनों में की गई। सीमित संसाधनों के बावजूद बच्चों ने शानदार प्रदर्शन किया और पुरस्कार जीतकर विद्यालय का नाम रोशन किया।
निजी विद्यालयों के बीच सरकारी स्कूल की पहचान
प्रतियोगिता में फुलवारी शरीफ प्राथमिक विद्यालय के अलावा डीएवी पब्लिक स्कूल, सेंट कैरेंस स्कूल, नोट्रे डेम एकेडमी सहित कई प्रतिष्ठित विद्यालयों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। ऐसे माहौल में सरकारी विद्यालय के बच्चों का पुरस्कार प्राप्त करना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
बच्चों को संबोधित करते हुए प्रोफेसर गोपाल शर्मा ने कहा, “यह देखकर बहुत खुशी हो रही है कि फुलवारी शरीफ के पेठिया बाजार क्षेत्र से आए छोटे-छोटे बच्चे पर्यावरण के प्रति इतनी जागरूकता दिखा रहे हैं। यहां कक्षा 1 से लेकर कक्षा 8 तक के विद्यार्थियों ने भाग लिया है और सभी बच्चों ने अपनी-अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया है।”
पर्यावरण दिवस पर लगाए जाने वाले पेड़
पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण संरक्षण के लिए ऐसे पेड़ लगाए जाते हैं जो अधिक ऑक्सीजन दें, प्रदूषण कम करें, छाया प्रदान करें और स्थानीय जैव विविधता को बढ़ावा दें। सरकार द्वारा अधिकतर पेड़ जो लगाए जाते हैं –
- नीम
- पीपल
- बरगद
- अर्जुन
- आंवला
- जामुन
- शीशम
- अशोक
- कदंब
- अमलतास
विश्व पर्यावरण दिवस को बढ़ावा देने के लिए सरकार, स्कूल, कॉलेज, सामाजिक संस्थाएँ और आम नागरिक कई अभियान चलाते हैं।
पर्यावरण को स्वच्छ बनाने के लिए अभियान
“एक पेड़ माँ के नाम” अभियान – लोगों को अपनी माँ के सम्मान में एक पेड़ लगाने के लिए प्रेरित किया जाता है। यह भारत सरकार का राष्ट्रीय वृक्षारोपण अभियान है, जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व पर्यावरण दिवस 2024 पर की थी। यह अभियान उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड, छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य माँ के सम्मान में पेड़ लगाकर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है।
इसके आलावा वृक्षारोपण अभियान, स्वच्छता अभियान, प्लास्टिक मुक्त अभियान, जल संरक्षण अभियान, जागरूकता रैली और जन अभियान, जैव विविधता संरक्षण अभियान ऐसे कई अभियान है जो सरकार द्वारा चलाए जाते हैं। लेकिन इसके विपरीत पर्यावरण दिवस पर एक और सोचने वाली बात है जिस पर ध्यान देना बेहद जरुरी है। पर्यावरण दिवस एक तारीख नहीं, एक चेतावनी भी है।
आज जब हम चारों ओर देखते हैं, तो साफ दिखाई देता है कि पर्यावरण संकट में है। पेड़ कट रहे हैं, जंगल उजड़ रहे हैं, जानवरों का बसेरा छीना जा रहा है, और हवा–पानी ज़हर बनता जा रहा है। क्या यही विकास है? और अगर यही विकास है, तो क्या यह सही दिशा में है ? इस पर विचार करने के लिए खबर लहरिया द्वारा आर्टिकल लिखा गया है जिसे आप नीचे दिए गए लिंक में पढ़ सकते हैं।
5 June environment Day: पर्यावरण दिवस एक तारीख नहीं, एक चेतावनी है।
विश्व पर्यावरण दिवस को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा कई मंत्री, नेताओं द्वारा भी पेड़ लगाए जाते हैं लेकिन सोचने वाली बात यह है कि क्या कभी उन लगाए गए पेड़ों की स्थिति जानने की कोशिश की गई कि आज वे किस हाल में हैं? क्योंकि सरकार द्वारा पेड़ लगा तो दिए जाते हैं लेकिन उनकी देखभाल पर ध्यान नहीं दिया जाता। ऐसे कई पेड़ आपको सड़क किनारे दिख जायेंगे जो बिना पानी के सूख जाते हैं। तो पर्यावरण दिवस पर सिर्फ पेड़ लगाने से नहीं होगा बल्कि उन लगाए गए पेड़ों की नियमित रूप से देखभाल भी की जाए।
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