बिहार के पटना जिले के परसा थाना के अंतर्गत आने वाला गांव महुआ बाग में एक 15 साल की लड़की 21 मई को घर से चली गई। लड़की का नाम खुशी है जो बोल नहीं पाती है। बताया जा रहा है कि लड़की अभी तक घर वापस नहीं लौटी है। परिवार वालों का आरोप है कि प्रशासन खोजबीन करने के बजाय परिवार वालों को उल्टा लड़की को ढूँढ कर लाने की बात कही है। परिवार कहना है कि उन्हें किसी के ऊपर शक भी नहीं है।
रिपोर्ट – सुमन, लेखन – रचना
खबरों की जानकारी लेने के लिए लड़की की नानी ललिता देवी से बात की गई उनके द्वारा बताया गया है कि
खुशी रोज की तरह है घर पर सो रही थी लेकिन सुबह करीब जब 4:00 से 5:00 बजे के बीच देखा तो घर पर नहीं थी घर वालों को लगा कि शायद वह बाथरूम के लिए गई होगी। जब परिवार ने उठते ही सबसे पूछा तो किसी से कोई जानकारी नहीं मिली। फिर खुशी को दो दिन तक ढूंढते रहे। जब परिवार खुशी को ढूंढ कर हार गए तो 24 मई को परसा थाना में जाकर रिपोर्ट दर्ज करवाया।
परिवार वालों ने आरोप लगाते हुए कहा कि “प्रशासन सिर्फ हमको दौड़ा रहा है और कहता है कि अपने रिश्तेदारों के यहां ढूंढो जहां आप जा सको वहां ढूंढो और हम रोज हर जगह जाते हैं ढूंढते हैं और फिर लौटकर अपने घर आ जाते है पर अभी तक हमारी लड़की हमें नहीं मिली है।”
पुलिस का पक्ष
वहीं परसा थाना प्रभारी मेनका कुमारी ने बताया कि इस मामले में नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है और गुमशुदगी प्रकरण दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि युवती के पास मोबाइल फ़ोन नहीं होने के कारण तकनीकी माध्यमों से उसकी लोकेशन ट्रेस करना संभव नहीं है। ऐसे मामले में पुलिस सार्वजनिक स्थानों पर फोटो और सूचना जारी कर खोजबीन करती है। थाना प्रभारी के अनुसार लड़की की तस्वीर सभी संबंधित थानों में भेज दी गई है और कई जगहों पर पोस्टर और बैनर भी लगाए गए हैं। पुलिस लगातार उसकी तलाश कर रही है और जैसे ही कोई जानकारी मिलेगी परिवार को तुरंत सूचित किया जाएगा।
गुमशुदा लड़की के भाई का बयान
लड़की का भाई सुजीत कुमार बताते हैं उनके माता पिता का देहांत हो चुका है। अब उनके दो भाई दो बहन हैं इसमें से एक बहन की शादी हो गई है और खुशी छोटी बहन है और एक छोटा भाई है। उन्होंने लड़की को अपनी मौसी और नानी के घर छोड़ रखा था। जब वह रोज की तरह अपना काम कर रहे थे तभी नानी का फोन आया कि खुशी नहीं मिल रही है।
वे बताते हैं “कि वह दर-दर भटक रहे हैं और हर जगह ढूंढ रहे हैं। हर जगह ढूंढ करके मैं थक चुका हूं अब मैं तो यही कहूँगा कि भगवान मेरी बहन को मिला दे अब तो मुझे ऐसे ऐसे ख्याल आने लगे हैं कि मैं बता नहीं सकता।”
उन्होंने बताया कि ऐसा नहीं है कि खुशी बचपन से नहीं बोल पा रही (मूक) थी। जब वह 8 साल की थी तो वह छत से दो बार गिर गई थी जिसकी वजह से उसका बोलना बंद हो गया और सुन भी कम पाती है। उसका बहुत इलाज करवाया गया पर कुछ नहीं हो पाया। एक समय बाद पैसों की दिक्कत होने की वजह से उसका इलाज बंद हो गया जिसकी वजह से वह अब ज्यादा सुन भी नहीं पाती। “मेरी बहन तो बोल नहीं पाती उसे लोग घर कैसे पहुंचाएंगे इसीलिए मैंने हर जगह पर जाकर के पोस्टर लगाया है। पटना के वार्ड नंबर 9 और 10 में पोस्टर लगाया है, पटना के हर बस स्टैंड चौक चौराहे पर मैंने पोस्टर लगवा दिया है ताकि मेरी बहन किसी को भी मिल जाए तो वह मुझे मेरे घर तक पहुंचा दे।”
परिजनों के अनुसार पुलिस ने शिकायत स्वीकार कर उन्हें रसीद और केस नंबर तो दिया लेकिन अब तक लड़की का कोई पता नहीं चल पाया है। घटना को लगभग दो सप्ताह होने वाले हैं और इस बात की चिंता सात रही है कि लड़की न जाने किस हालत में होगी।
लापता लड़की की नानी ने आरोप लगाया कि पुलिस की ओर से पर्याप्त प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि जब जानकारी लेने वे थाने पहुंचे तो पुलिस द्वारा उन्हें खुद खोजबीन करने की बात कही गई। उन्होंने प्रशासन से मामले में तेजी से कार्रवाई करने और युवती को सुरक्षित वापस लाने की मांग की है।
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