बुंदेलखंड का नाम आते ही सूखा, जल संकट और प्यासे खेतों की तस्वीर सामने आती है। लेकिन बांदा जिले के छोटे से गांव जखनी ने जल संरक्षण की ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी चर्चा पूरे देश में हुई। इस बदलाव के पीछे हैं पद्मश्री सम्मानित जल योद्धा उमा शंकर पांडे। करीब 30 वर्षों से वे “खेत पर मेड़ और मेड़ पर पेड़” के जरिए पानी बचाने की मुहिम चला रहे हैं। बिना सरकारी मदद शुरू हुई इस पहल ने गांव की तस्वीर बदल दी। जहां कभी गर्मियों में कुएं और तालाब सूख जाते थे, आज वहां मई-जून की भीषण गर्मी में भी पानी उपलब्ध है।
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