मध्य प्रदेश में भारत के दूसरे राज्यों से सबसे ज़्यादा वन आवरण है. पर जुलाई 2025 के केंद्र सरकार के डेटा के मुताबिक 2019 से 2023 के बीच मध्य प्रदेश में करीब 41,0000 hectare जंगल कट चूका है. यह देश में दूसरी सब्सि बड़ी कटौती है. जंगलों का संरक्षण और निरिक्षण मुख्य रूप से राज्य सरकार की जिम्मेदारी है. रिपोर्ट्स के अनुसार पिछले दो सालों मे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और कोल, हीरा आदि खदानों को बनाने के लिए सैकड़ों पेड़ और काटे जाने वाले हैं. काटने के बाद यह पेड़ सरकारी प्रॉपर्टी बन जाते हैं. इन पेड़ों पर निर्भर हैं छतरपुर का फेमस सागौन लकड़ी का फर्नीचर मार्किट जहां पीढ़ियों से हाथ की कलाकारी और बारी नक्काशी से फर्नीचर बनाये जाते हैं. लगभग 20,000 लोग इस कारोबार से जुड़े हुए है. कटते जंगल और बढ़ती लागत पर खबर लहरिया की छत्तरपुर फर्नीचर मार्किट से देखिये यह विशेष रिपोर्ट।
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