दो घटनाएँ अलग-अलग राज्यों की हैं लेकिन इनमें एक समानता है। एक मामले में महिला सार्वजनिक जगह पर यौन हिंसा का शिकार हुई जबकि दूसरे मामले में उसे उसके ही परिवार के भीतर अपमान और हिंसा झेलनी पड़ी। यानी खतरा सिर्फ बाहर से नहीं घर के अंदर से भी है।
बीते 18 जून 2026 को देश के दो राज्यों से महिलाओं के खिलाफ हिंसा की झकझोर देने वाली घटनाएँ सामने आई हैं। एक मामले में महिला के साथ बलात्कार किया गया जबकि दूसरे मामले में एक महिला को उसके ही पति ने अमानवीय यातनाएं दीं। उसके बाल काट दिए गए और बच्चों से महिला के ऊपर पेशाब करवाया गया। दोनों घटनाएँ अलग-अलग राज्यों की हैं लेकिन इनमें एक समानता है। एक मामले में महिला सार्वजनिक जगह पर यौन हिंसा का शिकार हुई जबकि दूसरे मामले में उसे उसके ही परिवार के भीतर अपमान और हिंसा झेलनी पड़ी। यानी खतरा सिर्फ बाहर से नहीं घर के अंदर से भी है।
बिहार की घटना
एनडीटीवी के खबर अनुसार बिहार के बेगूसराय के चकिया पुलिस स्टेशन के पास की है जहां कथित तौर पर पांच अंजान लोगों द्वारा एक महिला का सामूहिक बलात्कार किया गया। यह घटना 11 जून की है लेकिन यह मामला 18 जून को सामने आया। 11 जून की रात जब महिला शौचालय गई तो पांच लोग अचानक घर में घुस गए और उनके पति को दूसरे कमरे में बंद कर दिया गया जिसके बाद महिला को पांच व्यक्तियों द्वारा महिला को बाहर सुनसान जगह पर ले जाकर बलात्कार किया गया। जब महिला द्वारा शोर मचाने की कोशिश की गई तो उन लोगों द्वारा ब्लेड से जाँघ और छाती पर वार किया गया। घटना के बाद जब महिला को अस्पताल ले जा गया और इलाज शुरू हुआ। कुछ समय बाद महिला के पेट के नीचे हिस्से में दर्द शुरू हुआ जिसमें चिकित्सक जांच के दौरान पता लगा कि महिला के शरीर से एक गोली, एक पत्थर और लकड़ी का टुकड़ा निकाला गया जो महिला के साथ हुई क्रूरता को दर्शाता है।
घटना की सूचना मिलने के बाद डीएसपी समेत कई अधिकारी महिला से मिलने अस्पताल पहुंचे। पुलिस का कहना है कि इस मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और घटना में शामिल आरोपियों को जल्द गिरफ़्तार किया जाएगा। डीएसपी द्वारा कहा गया है कि अगर जांच के दौरान इस मामले पर किसी भी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित कर्मियों के खिलाफ भी कार्यवाही की जाएगी।
छत्तीसगढ़ का मामला
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के के रूनियाडी में जितेंद्र नाम के व्यक्ति द्वारा कथित तौर पर पत्नी के साथ प्रताड़ता किया गया। दोनों की 15 साल पहले लव मैरिज शादी हुई थी। वर्तमान में दोनों के चार बच्चे हैं। कुछ समय पहले दोनों के बीच विवाद शुरू हुआ जिसके बाद पत्नी पति से अलग किसी दूसरे गांव में रह रही थी।
महिला ने घटना के बाद पुलिस को शिकायत में बताया है कि वे अपने एक परिचित से काम माँगने की मदद से गई हुई थीं। पति महिला को खोजते हुए दूसरे गांव तक पहुंच गया और अचानक बेरहमी से मारपीट शुरू कर दी गई। पहले महिला के कपड़े फाड़े और फिर जूते से मारा गया। इसके बाद पति द्वारा महिला के बाल काट दिए गए और मुंडन कर दिया गया और बच्चों से भी महिला महिला को थप्पड़ मरवाए। पति ने बच्चों से कहकर पत्नी के चेहरे पर पेशाब करवाया गया। इसके बाद महिला के चेहरे पर कालिख पोत कर दोबारा पिटाई की गई। ये पूरा घटना पति द्वारा पत्नी पर चरित्र शंका (शक के कारण) को लेकर हुआ। इस पूरे मामला का खुलासा सोशल मीडिया में हुए वायरल वीडियो के बाद हुआ। जिसके बाद से आरोपी पति फरार बताया जा रहा है।
महिला की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और आरोपी की तलाश की जा रही है। पुलिस द्वारा बयान में सामने आया कि महिला ने पेशाब पिलाने की बात नहीं बताई थी यह बात बाद में वायरल वीडियो और बयान में सामने आई।
चिंता की बात यह है कि लगातार जागरूकता अभियानों, सख्त क़ानूनों और सरकारी दावों के बावजूद महिलाओं के खिलाफ हिंसा की घटनाएं कम होने के बजाय लगातार सामने आ रही हैं। देखा जाए तो महिलाएं न तो घर के बाहर सुरक्षित महसूस कर पा रही हैं और न ही घर के भीतर। बाहर उन्हें बलात्कार, छेड़छाड़, यौन हिंसा और एसिड अटैक जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ता है तो घर के अंदर घरेलू हिंसा, मानसिक प्रताड़ना और भेदभाव झेलना पड़ता है। कई महिलाओं को बच्चा न होने, शराब के नशे में पति की हिंसा, चरित्र पर संदेह, अंधविश्वास या फिर केवल उनकी शक्ल-सूरत को लेकर भी प्रताड़ित किया जाता है तो अब आख़िर महिलाएं सुरक्षित किस जगह पर है? एनसीआरबी की रिपोर्ट अनुसार साल 2024 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक 2024 में ऐसे 13,396 मामले सामने आए जबकि 2023 में यह संख्या 13,366 थी। यानी मामलों में बहुत बड़ा अंतर नहीं है लेकिन यह बताता है कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता अब भी बनी हुई है। चिंता की बात यह है कि ये रिपोर्ट 2024 की है और अगर 2024 तक इतनी इस मामले में बढ़ोत्तराई हुई है तो 2025-26 में और कितने आकंडे होंगे? हालांकि बढ़ोतरी बहुत बड़ी नहीं दिखती, लेकिन यह बताती है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध अब भी गंभीर चिंता का विषय बने हुए हैं।
कई मामलों में महिलाएं सामाजिक दबाव, परिवार की बदनामी के डर और पुलिस तक पहुंच की कठिनाइयों के कारण शिकायत भी दर्ज नहीं करा पातीं। ऐसी घटनाएँ यह सवाल खड़ा करती हैं कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे नारे आख़िर धरातल पर कितने असरदार साबित हो रहे हैं।
खबर लहरिया के रिपोर्टिंग में ही 2026 में महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा और बलात्कार के कई रिपोर्टिंग किए गए हैं। जिसका कुछ हिस्सा आप नीचे दिए गए लिंक से देख सकते हैं। इसके अलावा साल 2025 की बलात्कार और मारपीट की खबरें आप खबर लहरिया के चैनल और वेबसाइट पर देख सकते हैं।
– 25 अप्रैल 2026 रात 8 बजे घर में महिला को अकेले देख तीन व्यक्तियों ने छेड़छाड़ और बलात्कार किया। चिल्लाने पर बचाने परिवार वाले आए तो आरोपियों ने पति, सास और बेटे के साथ मारपीट की।
– उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले के एक गांव में 17 साल की दलित लड़की के साथ बलात्कार होने पर न्याय नहीं मिलने के कारण लड़की ने आत्महत्या कर ली।
– बिहार के पटना जिले के नौबतपुर थाना क्षेत्र में महिला की मौत, मृतका के परिवार वालों ने ससुराल पक्ष पर दहेज के लिए हत्या करने का गंभीर आरोप लगाया है।
हर घटना के बाद गिरफ्तारी, जांच और कार्रवाई की बातें होती हैं। लेकिन जब अलग-अलग राज्यों से एक जैसी खबरें बार-बार सामने आती हैं, तो सवाल सिर्फ अपराधियों पर नहीं, उस व्यवस्था और समाज पर भी उठता है जो महिलाओं को बराबरी और सुरक्षा का भरोसा अब तक नहीं दे पाया है।
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