पहले इस रास्ते से निकलने में डर लगता था। बरसात में पूरा रास्ता कीचड़ और पानी से भर जाता था। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते थे साइकिल निकालना मुश्किल हो जाता था। अब सड़क बन गई है तो बहुत राहत मिली है। यह कहना है वाराणसी जिले के शिवपुर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड नंबर 5 के सलारपुर की रहने वाली सविता का।
रिपोर्ट – सुशीला, लेखन – रचना
बस्तियों की मांगें हुईं पूरी
खालिसपुर और सलारपुर की आबादी करीब पांच हजार के आसपास है। यहां राजभर यादव, अनुसूचित जाति और अन्य समुदायों की बस्तियां हैं। गांव के लोगों की वर्षों से मांग थी कि गलियों को पक्का किया जाए क्योंकि सबसे ज्यादा परेशानी बरसात के दिनों में होती थी। कई बार लोगों ने प्रधान, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को आवेदन दिए। फिर अब नगर निगम में शामिल होने के बाद अलग-अलग योजनाओं के तहत कई गलियों का निर्माण शुरू हुआ। हालाँकि अभी भी कुछ गलियां बाकी हैं लेकिन उनके प्रस्ताव भी स्वीकृत हो चुके हैं और आगे काम होने की भी उम्मीद जताई जा रही है।
स्थानीय निवासी नंदू के मुताबिक पहले बच्चे स्कूल जाते समय कीचड़ में गिर जाते थे। उनकी यूनिफॉर्म गंदी हो जाती थी स्कूल नहीं जा पाते थे और लोगों को साइकिल या पैदल निकलने में भी परेशानी होती थी। अब सड़क बनने के बाद यह दिक्कत काफी हद तक खत्म हो गई है। वहीं गांव की रहने वाली सोना बताती हैं कि उनका खेत इसी रास्ते से पड़ता है। पहले खराब रास्ते के कारण सब्जियां लेकर खेत जाना भी मुश्किल था। अब सड़क बनने से खेती का काम आसान हो गया है। उनका कहना है कि एक और बदलाव देखने को मिला है। पहले लोग सड़क किनारे कूड़ा फेंक देते थे लेकिन अब सड़क साफ-सुथरी रहने लगी है। हालांकि वे चाहती हैं कि सड़क के साथ-साथ पानी और जल निकासी की व्यवस्था भी बेहतर की जाए।
इस पर वार्ड नंबर 5 के सभासद हनुमान प्रसाद बताते हैं कि पहले यह पूरा इलाका गांव था और अब ये नगर निगम में शामिल होने के बाद विकास कार्यों में तेजी आई है। उनके अनुसार 2025 और 2026 के दौरान नगर निगम, पार्षद निधि, मुख्यमंत्री नगर विकास योजना और अन्य योजनाओं के जरिए कई गलियों का निर्माण कराया गया। उन्होंने बताया कि खालिसपुर में लगभग 80 प्रतिशत गलियां बन चुकी हैं और बाकी 20 प्रतिशत के प्रस्ताव भी मंजूर हो चुके हैं। कुछ स्थानों पर टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और जल्द काम शुरू होने की उम्मीद है।
सभासद हनुमान प्रसाद के मुताबिक अलग-अलग योजनाओं के तहत इस क्षेत्र में करीब चार करोड़ रुपये की लागत से विकास कार्य हुए हैं। वहीं बाढ़ प्रभावित हिस्सों में भी सड़क निर्माण की तैयारी चल रही है हालांकि ठेकेदार की ओर से देरी होने के कारण कुछ काम अभी शुरू नहीं हो पाया है।
इस रिपोर्टिंग की सबसे खास बात यह रही कि तीन साल पहले जिन लोगों ने टूटी गलियों, कीचड़ और जलभराव की शिकायतें की थीं आज वही लोग नई सड़कें दिखाते हुए खुशी जाहिर कर रहे थे। गांव की तस्वीर पहले से काफी बदली है लेकिन लोगों का कहना है कि अभी भी कुछ गलियां बननी बाकी हैं। साथ ही पानी की व्यवस्था, जल निकासी और सफाई जैसे मुद्दों पर भी काम होना चाहिए। गांव वालों को उम्मीद है कि जिस तरह वर्षों पुरानी सड़क की मांग पूरी हुई है उसी तरह बाकी बुनियादी सुविधाएं भी जल्द मिलेंगी। तब जाकर उन्हें लगेगा कि उनके गांव का विकास सच में पूरा हुआ है।
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