खबर लहरिया Hindi गोरखपुर में कॉन्स्टेबल पर बलात्कार की कोशिश और हत्या का आरोप और समस्तीपुर में 9वीं क्लास की लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार, जानें पूरा मामला

गोरखपुर में कॉन्स्टेबल पर बलात्कार की कोशिश और हत्या का आरोप और समस्तीपुर में 9वीं क्लास की लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार, जानें पूरा मामला

यूपी और बिहार से नाबालिग लड़कियों के साथ कथित यौन हिंसा की दो गंभीर घटनाएं सामने आई हैं। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में एक पुलिस कांस्टेबल पर 10 साल की लड़की के साथ कथित यौन उत्पीड़न के बाद उसकी हत्या करने का आरोप है, जबकि बिहार के समस्तीपुर में 9वीं कक्षा की एक लड़की के साथ कथित सामूहिक बलात्कार का मामला दर्ज किया गया है। दोनों मामलों में पुलिस जांच जारी है।

Image Credit: Aasawari Kulkarni/Feminism In India

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में पुलिस के मुताबिक 28 जुलाई को 10 साल की लड़की अपनी बड़ी बहन को खाना देने जिला अस्पताल गई थी, जहां उसकी बहन भर्ती थी। आरोप है कि अस्पताल से लौटते समय डायल-112 में तैनात कांस्टेबल अभिषेक यादव ने लड़की को घर छोड़ने के बहाने अपनी मोटरसाइकिल पर बैठाया और उसे करीब 15 किलोमीटर दूर एक श्मशान घाट के इलाके में ले गया।

पुलिस का कहना है कि वहां लड़की के साथ कथित तौर पर बलात्कार की कोशिश की गई और बाद में उसकी हत्या कर शव नदी में फेंक दिया गया। 100 से अधिक सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद पुलिस ने आरोपी कांस्टेबल को गिरफ्तार कर लिया।

अस्पताल में आरोपी पर हमला

गिरफ्तारी के बाद जब आरोपी को मेडिकल जांच के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया, तो वहां मौजूद डॉक्टरों, नर्सों और अस्पताल कर्मचारियों ने कथित तौर पर उस पर हमला कर दिया। पुलिस ने बीच-बचाव कर आरोपी को सुरक्षित बाहर निकाला। मामले की जांच जारी है और पुलिस पोस्टमॉर्टम व अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।

बिहार के समस्तीपुर जिले में सामूहिक बलात्कार

वहीं बिहार के समस्तीपुर जिले के मुसरीघरारी थाना क्षेत्र में 9वीं कक्षा की एक नाबालिग लड़की के साथ कथित सामूहिक बलात्कार का मामला सामने आया है। यह घटना मंगलवार 27 जुलाई की बताई जा रही है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार लड़की मंगलवार शाम घर से करीब 50 मीटर दूर बकरी के लिए घास लेने गई थी, लेकिन काफी देर तक वापस नहीं लौटी। तलाश के दौरान वह घायल अवस्था में मिली।

परिजनों का दावा है कि घटनास्थल से एक चिट्ठी भी मिली है, जिसमें तीन लोगों द्वारा घटना को अंजाम देने का उल्लेख किया गया है। पुलिस ने इस चिट्ठी को भी जांच का हिस्सा बनाया है।

लड़की को इलाज और मेडिकल जांच के लिए सदर अस्पताल भेजा गया। परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में इलाज शुरू होने में करीब दो घंटे की देरी हुई। घटना के समय पहने हुए खून से सने कपड़ों को पुलिस ने साक्ष्य के रूप में जब्त कर लिया है।

आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज

महिला थानाध्यक्ष प्रीति भारती ने लड़की के पिता की शिकायत पर दो नामजद और दो अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम छापेमारी कर रही है।

एनसीआरबी के आंकड़ें

मकतूब में छपे आर्टिकल के अनुसार राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक, 2017 से 2022 के बीच हिरासत में रेप के 270 से ज़्यादा मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में आरोपी पुलिसकर्मी, बल्कि लोक सेवक, सशस्त्र बलों के सदस्य, जेलों, सुधार गृहों, हिरासत केंद्रों और अस्पतालों में काम करने वाले कर्मचारी शामिल थे। इनमे सबसे ज़्यादा मामले उत्तर प्रदेश से थे।

इन दोनों घटनाओं ने एक बार फिर महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

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