खबर लहरिया Blog भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग बदल कर नीला से केसरिया कर दिया, हुआ विवाद, जताया विरोध 

भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग बदल कर नीला से केसरिया कर दिया, हुआ विवाद, जताया विरोध 

हॉकी वर्ल्ड कप 2026 से पहले ही भारतीय हॉकी महासंघ द्वारा टीम की जर्सी का रंग बदल कर नीला से केसरी रंग कर दिया गया। जिसके बाद वाद विवाद शुरू हो गए। हॉकी वर्ल्ड कप 2026 नीदरलैंड्स और बेल्जियम में होने वाला है। हॉकी इंडिया ने पुरुष और महिला दोनों टीमों के लिए पारंपरिक नीले रंग की जगह केसरिया रंग की नई जर्सी पेश की। नीले से केसरिया रंग में इस अचानक बदलाव के बाद सोशल मीडिया और खेल जगत में भी बहस शुरू हो गई है।

फोटो साभार: हॉकी इंडिया एक्स अकाउंट

पूर्व कप्तान विरेन रास्किन्हा ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि नीली जर्सी हमारी पहचान थी। एक और पूर्व कप्तान पटगट सिंह ने भी जर्सी का रंग बदलने पर नाराजगी जताई है। पूर्व कप्तान विरेन रास्किन्हा ने इस बदलाव को शर्मनाक बताया है। इधर हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने कहा है जर्सी का रंग खिलाड़ियों की पसंद पर बदला गया है। 

भारतीय हॉकी टीम के कप्तान विरेन रास्किन्हा का सवाल 

भारतीय हॉकी टीम के कप्तान विरेन रास्किन्हा ने इस पर अपना विरोध जताया और अपने एक्स अकाउंट में सवाल करते हुए लिखा है कि “ मुझे यह कहना पड़  रहा है @TheHockeyIndia ने भारत के लिए कई अच्छे काम किए हैं लेकिन यह शर्मनाक है। भारतीय टीम की विरासत और पहचान हमेशा से नीली रही है। मैंने कई वर्षों तक गर्व से नीली जर्सी पहनी है। प्रशंसक हमारी भारतीय टीम को नीली जर्सी में देखना चाहते हैं। नारंगी रंग का क्या मतलब है? मुझे इस विषय पर कई अनावश्यक राजनीतिक टिप्पणियाँ देखने को मिल रही हैं। मैं इनमें से किसी भी बहस में नहीं पड़ना चाहता। मेरा सीधा-सादा मुद्दा गौरव, पहचान और विरासत के बारे में है। अर्जेंटीना का फुटबॉल से यही संबंध क्या हम कभी अर्जेंटीना को नारंगी और सफेद धारियों वाली जर्सी पहने देखेंगे?”

उन्होंने लिखा है “मैं मानता हूं कि हॉकी इंडिया ने भारतीय हॉकी के लिए कई अच्छे काम किए हैं, लेकिन यह शर्मनाक है। भारतीय टीम की विरासत और पहचान हमेशा नीली रही है। मैंने कई वर्षों तक गर्व के साथ नीली जर्सी पहनी है। प्रशंसक भी भारतीय टीम को नीली जर्सी में देखना चाहते हैं। आखिर नारंगी रंग का तर्क क्या है?”

भारतीय हॉकी टीम के कप्तान परगट सिंह का सवाल 

पूर्व पुरुष हॉकी टीम के पूर्व कप्तानों परगट सिंह और वीरेन रस्किन्हा ने हॉकी इंडिया के फ़ैसले पर सवाल उठाए हैं। रस्किन्हा ने इसे ‘शर्मनाक’ बताया है। उन्होंने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा है और उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई को बताते हुए कहा भी है कि “दशकों से @TheHockeyIndia हमारी टीम ने गर्व से नीले रंग की जर्सी पहनी है जो हमारी खेल पहचान का हिस्सा बन चुका है। इसे केसरिया रंग में बदलना इस बात को दर्शाता है कि…@BJP4India सरकार हर जगह अपनी विचारधारा थोपने के लिए जुनूनी है। खेलों का राजनीतिकरण करने के बजाय, बेहतर बुनियादी ढांचा, विश्व स्तरीय प्रशिक्षण और हमारे खिलाड़ियों को अधिक समर्थन प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करें। खेलों को राजनीति से दूर रखें। खेलों का कोई धर्म या जाति नहीं होती – केवल खेल भावना होती है।” 

बता दें परगट सिंह पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किए गए हैं। वे जालंधर कैंट से कांग्रेस के विधायक हैं और परगट सिंह पंजाब के पूर्व शिक्षा और खेल मंत्री भी रहे चुके हैं।

इस पर हॉकी इंडिया की प्रतिक्रिया 

वहीं दूसरी तरफ हॉकी इंडिया ने रंग बदलने के पीछे तकनीकी आधार का हवाला दिया है। बीबीसी के अनुसार हॉकी इंडिया ने कहा है कि “मुख्य विचार तकनीकी था। नीली खेल जर्सी अक्सर नीले सिंथेटिक मैदान में घुल-मिल जाती थी जो अब अंतरराष्ट्रीय हॉकी पिचों का मानक रंग है। इससे खिलाड़ियों के लिए मैदान पर स्पष्टता और दृश्यता प्रभावित होती थी।” हॉकी इंडिया ने एक बयान में कहा “यह पाया गया था कि नीले रंग की जर्सी अंतरराष्ट्रीय हॉकी में अब मानक बन चुकी नीली सिंथेटिक पिच के साथ घुल-मिल जाती है।” हॉकी महासंघ ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो में महासंघ ने कहा कि केसरिया रंग “साहस, बलिदान और विजय का प्रतीक है। ”इसमें कहा गया है कि नई रंग योजना राष्ट्रीय ध्वज और उगते सूरज से प्रेरित है और यह भी जोड़ा गया है कि नई जर्सी “नई शुरुआत को दर्शाती है”।

जर्सी का रंग कैसे तय होता है? 

भारतीय टीम की जर्सी के रंग को लेकर कोई आधिकारिक या लिखित नियम नहीं है। हर देश अपनी राष्ट्रीय पहचान, ध्वज, राष्ट्रीय प्रतीकों या अन्य प्रतीकों के आधार पर जर्सी का रंग तय कर सकता है। भारत के मामले में भी यही परंपरा देखने को मिलती है

दैनिक भास्कर के मुताबिक हॉकी इतिहासकार के. अरुमुगम के अनुसार भारतीय हॉकी टीम 1928 से लंबे समय तक मुख्य रूप से नीली और सफेद जर्सी पहनकर खेलती रही है हालांकि बीच-बीच में जर्सी के डिजाइन में बदलाव हुए लेकिन नीला रंग टीम की पहचान बना रहा। वहीं मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय क्रिकेट टीम ने 1992 में रंगीन जर्सी अपनाने के दौरान तिरंगे के अशोक चक्र से प्रेरित होकर नीले रंग को चुना। इसके बाद धीरे-धीरे भारतीय खेल टीमों की पहचान ‘मेन इन ब्लू’ के रूप में स्थापित हो गई।

बाद में भारतीय हॉकी टीम की जर्सी में ऑरेंज रंग को शामिल करने का फैसला खेल से जुड़ी व्यावहारिक जरूरतों को देखते हुए लिया गया। हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय हॉकी नीले सिंथेटिक टर्फ पर खेली जाती है। ऐसे में जब खिलाड़ी भी नीली जर्सी पहनते थे तो तेज रफ्तार मैच के दौरान साथी खिलाड़ियों और गेंद को पहचानने में मुश्किल होती थी। इसी कारण बेहतर दृश्यता के लिए जर्सी में ऑरेंज रंग का इस्तेमाल किया गया।

इस मामले को राजनीति में भी हलचल 

इस विषय में अब राजनीति में भी टिप्पणियाँ शुरू हो चुकी है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी टिप्पणी की है। उन्होंने इसे इतिहास फिर से लिखे जाने की कोशिश कहा है। एएनआई के एक वीडियो में जवाब देते हुए उन्होंने कहा है कि “दिल्ली: हॉकी इंडिया द्वारा राष्ट्रीय टीम की जर्सी का रंग नीले से बदलकर भगवा करने पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, “चाहे वे वर्दी बदलें या शिक्षा नीति के माध्यम से इतिहास को फिर से लिखने की कोशिश करें, वे कुछ भी करें… आपने देखा है कि हमारे देश के युवा इस बारे में क्या सोचते हैं। आपने जंतर-मंतर पर एकत्रित युवाओं की बातें सुनीं। यह राष्ट्र की आवाज है। इस देश की स्वतंत्रता का संघर्ष अहिंसा और सत्य पर आधारित थाइसमें आरएसएस की कोई भूमिका नहीं थी। पूरा देश सच्चाई जानता है, और जो लोग नहीं जानते थे, वे अब उनके असली इरादों को समझ रहे हैं। कांग्रेस पार्टी ने महात्मा गांधी के मार्गदर्शन में उस आंदोलन का नेतृत्व किया, और इस देश की आत्मा अहिंसा, सत्य और भाईचारे में निहित है। इसे कोई नहीं छीन सकता न आरएसएस, न कोई और। चाहे वे कितना भी विभाजन बोएं, हिंसा भड़काएं या नफरत फैलाएं, भाईचारे, आपसी प्रेम और एकता से परिभाषित देश की आत्मा अडिग रहेगी; वे इसे छीन नहीं सकते।”

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कांग्रेस सांसद अमर सिंह ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनके द्वारा आरोप लगाया गया है कि भाजपा हर चीज़ का भगवा करण करना चाहती है उन्होंने चेतावनी दी है कि हॉकी की जर्सी के रंग बदलने के बाद वे सेना की वर्दी के साथ भी ऐसा कर सकते हैं। उन्होंने कहा “चाहे शिक्षा का क्षेत्र हो या अन्य क्षेत्र, हर जगह एक विशेष विचारधारा थोपने का प्रयास किया जा रहा है। यह विवाद उसी संकीर्ण सोच का प्रतीक है।”

न्यूज़ एजेंसी IANS के अनुसार अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शिशिर चौधरी ने कहा है कि कोई हरा रंग है कोई भगवान का रंग नहीं है, कोई सफेद रंग का रंग नहीं है। तिरंगे का रंग, जो हमारा भगवान वहां से नहीं चुना गया, यह सूरज के प्रकाश का रंग है। यह किसी राजनीतिक दल का रंग नहीं है किसी भी रंग का रंग नहीं है किसी धर्म का रंग नहीं है।” सूर्य का प्रकाश है जो सभी को एक जैसे तरीके से दुनिया में दीप जलाने का काम करता है… भगवान को रंग से जोड़कर कुछ लोगों के पेट में दर्द हो रहा है, उनका बयान इस तरह से आ रहा है।” 

ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने हॉकी इंडिया पर खेल के राजनीतिकरण का आरोप लगाया है। उन्होंने एक्स पर अपनी बात लिखी है कि “मुझे यह जानकर गहरा दुख हुआ है कि भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का प्रतिष्ठित रंग बदलकर केसरिया कर दिया गया है। भारतीय हॉकी टीम का नीला रंग सिर्फ एक रंग नहीं है। यह राष्ट्र की खेल विरासत से जुड़ी एक भावना है। दशकों से, इस रंग ने हमें आशा, विजय, हार और खेल में उत्कृष्टता की खोज में एकजुट किया है। हमने नीली जर्सी पहने अपने खिलाड़ियों के साथ रोया है, हँसा है, जश्न मनाया है और गर्व से खड़े रहे हैं। नीली जर्सी पहनकर हमारी टीमों ने विश्व मंच पर राष्ट्रगान की ध्वनि के बीच ओलंपिक पदक जीते हैं। नीला रंग हमारे राष्ट्रीय ध्वज में स्थित नीले चक्र से लिया गया है। यह हमारे राष्ट्रीय गौरव और पहचान का प्रतीक है। नीला रंग हर भारतीय का है। जब राष्ट्रीय हॉकी टीमें प्रायोजकों के लिए संघर्ष कर रही थीं, तब ओडिशा ने हमारी राष्ट्रीय टीमों और हमारे प्रिय खेल का समर्थन करने वाला पहला और एकमात्र राज्य बनकर इतिहास रचा। दुनिया भर में हर ओडिया को राष्ट्रीय हॉकी को दिए गए राज्य के इस उपहार पर गर्व था। 41 लंबे वर्षों के बाद, हमारी पुरुष टीम ने ओलंपिक पदक जीता। अब इसी सरकार ने हमारी राष्ट्रीय टीम के रंग बदल दिए हैं। मैं भाजपा ओडिशा द्वारा हॉकी जैसे राष्ट्रीय खेल का राजनीतिकरण करने के इस प्रयास की कड़ी निंदा करता हूं। इसने देश भर के लाखों खेल प्रेमियों की भावनाओं को गहरी चोट पहुंचाई है और उस गौरव को ठेस पहुंचाई है जिसके साथ ओडिशा ने राष्ट्रीय हॉकी का समर्थन किया है।” 

केसरी रंग का जर्सी 

हॉकी इंडिया ने नई जर्सी के हर डिजाइन और रंग के पीछे विशेष महत्व बताया है। जर्सी का प्रमुख रंग केसरिया (भगवा) रखा गया है जिसे साहस, बलिदान और जीत का प्रतीक बताया गया है। जर्सी के मध्य भाग में मंडला (Mandala) से प्रेरित एक डिजाइन दिया गया है। हॉकी इंडिया के अनुसार यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कला को दर्शाता है। गले और बाजुओं पर गहरे नेवी ब्लू रंग की पतली पट्टी बनाई गई है जो अशोक चक्र से प्रेरित है। इसे प्रगति शांति और एकाग्रता (फोकस) का प्रतीक माना गया है। जर्सी के ऊपरी हिस्से पर बना ग्राफिक सुदर्शन चक्र की आधुनिक व्याख्या पर आधारित है। हॉकी इंडिया के मुताबिक यह शक्ति, एकता और गति का संदेश देता है। इसके अलावा गले से कंधे तक तिरंगे के तीन रंगों केसरिया, सफेद और हरे की पतली पट्टी (ट्राईकलर पाइपिंग) दी गई है जिसे राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बताया गया है। जर्सी के बीच में अंग्रेजी में INDIA लिखा गया है। इसके अक्षरों की डिजाइन देवनागरी लिपि से प्रेरित है जिसे भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाने वाला तत्व बताया गया है।

 

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