खबर लहरिया Blog UP Panchayat Elections: यूपी में छह महीने के लिए बढ़ाया गया प्रधानों का कार्यकाल 

UP Panchayat Elections: यूपी में छह महीने के लिए बढ़ाया गया प्रधानों का कार्यकाल 

   

यूपी सरकार ने ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ा दिया है और अब प्रधान ही प्रशासक बनेंगे। इस कार्यकाल को अगले छह महीने तक के लिए बढ़ाया गया है। इसका कारण प्रदेश में पंचायत चुनाव समय से न होना बताया जा रहा है।

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फोटो साभार : News Mischief)

उत्तर प्रदेश में जून और जुलाई के आस पास पंचायत चुनाव होना था जो अब अगले साल ही हो सकेंगे। दरअसल उत्तर प्रदेश में 26 मई 2026 को प्रधानों का कार्यकाल खत्म हो रहा था। जिसके बाद पंचायत चुनाव होते। लेकिन यूपी सरकार ने ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ा दिया है और अब प्रधान ही प्रशासक बनेंगे। इस कार्यकाल को अगले छह महीने तक के लिए बढ़ाया गया है। इसका कारण प्रदेश में पंचायत चुनाव समय से न होना बताया जा रहा है।

यूपी सरकार के अनुसार पंचायतों में ओबीसी आरक्षण के लिए गठित आयोग कम से कम छह माह बाद अपनी रिपोर्ट देगा। इस कारण यह तय किया गया कि पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के पहले संभव नहीं होगा। तब तक पंचायत का कार्य कैसे चलेगा इस कारण से इस बात को ध्यान में रखते हुए ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाया जा रहा है ताकि ग्राम पंचायतों में विकास कार्य जारी रह सके। 

प्रदेश के सभी 57,694 ग्राम पंचायतों के के प्रधान पहली बार प्रशासक की जिम्मेदारी संभालेंगे। प्रधान संगठनों की लंबे समय से यह मांग थी कि कार्यकाल खत्म होने के बाद भी प्रधानों को पंचायत के काम से जोड़ा रखा जाए। इसी मांग को ध्यान में रखते हुए पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने यह प्रस्ताव रखा था जिसे बाद में योगी कैबिनेट ने मंज़ूरी दे दी। अब सवाल यह है कि प्रधान से प्रशासक बनने के बाद उन्हें क्या अधिकार और लाभ मिलेंगे। 

26 मई 2026 को प्रधानों का कार्यकाल खत्म हो गया। वहीं क्षेत्र पंचायतों का कार्यकाल 19 जुलाई और जिला पंचायतों का 11 जुलाई को खत्म होगा। ऐसे में जुलाई में इन संस्थाओं में भी प्रशासक नियुक्त किए जाने की संभावना बढ़ गई है। 

बता दें अब तक प्रधानों का कार्यकाल पूरा होने के बाद पंचायत का काम काज संभालने के लिए एडीओ पंचायत को प्रशासक बनाया जाता था लेकिन इस बार सरकार ने व्यवस्था में बदलाव करते हुए मौजूदा प्रधानों की ही यह जिम्मेदारी देने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि इससे गांव का विकास और प्रशासनिक काम बिना रुकावट जारी रहेंगे। साथ ही यह फैसला राष्ट्रीय पंचायत राज ग्राम प्रधान संघ की मांग को ध्यान में रखते हुए ले लिया गया है। प्रशासक बनने के बाद भी प्रधान केवल रोज़मर्रा और जरुरी काम ही कर सकेंगे। यदि किसी बड़े खर्च नई योजना या महत्वपूर्ण निर्णय कि जरुरत होगी तो उसके लिए जिला पंचायत राज अधिकारी के ज़रिए जिलाधिकारी की अनुमती लेना अनिवार्य होगा। 

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