उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के समसपुर गांव में देसी शराब ठेका खुलने से महिलाऐं गुस्से में दिखी। बुधवार 29 अप्रैल 2026 को महिलाओं ने दुकान में रखी शराब की बोतलें और पैकेट बाहर सड़क पर फेंक दिए। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है। शराब पीकर जो पुरुष आती जाती महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं और गाली देते हैं इससे तंग आकर महिलाओं ने यह कदम उठाया।
शराब पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है लेकिन इसका सबसे ज्यादा प्रभाव महिलाओं पर पड़ता है। चाहे घर में हो या बाहर नशे में धुत व्यक्ति खुद को ताकतवर समझने लगता है और महिलाओं के साथ हिंसा करने पर उतारू हो जाता है। इसके बावजूद आए दिन कई जगह शराब के ठेकों की दुकान धड़ल्ले से खोली जा रही हैं। शराब के ठेके खुलने से आसपास का माहौल भी खतरे से भर जाता है लेकिन महिलाऐं यदि ठान लें कि इस तरह की समस्या से कैसे निपटना है तो वह क्या नहीं कर सकती। समसपुर गांव की महिलाओं ने इस समस्या का समाधान खुद से निकाला और दुकान न बंद करने पर बोतलें तोड़ दी।
शराब के ठेका कर्मी और महिलाओं के बीच बहस और हाथापाई
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार बुधवार 29 अप्रैल को दोपहर करीब एक बजे 6 से अधिक महिलाओं ने देसी शराब की दुकान पर पहुंची। वे सभी महिलाऐं ठेका कर्मी से दुकान बंद करने की बात करने लगी। इस बात का ठेका कर्मी ने विरोध किया और महिलाओं से बहस करने लगा। देखते देखते यही बहस हाथापाई में बदल गई। ठेका कर्मी के व्यवहार से महिलाएं आक्रोशित हो गई। महिलाओं ने मिलकर दुकान में रखी शराब की बोतलें और डिब्बे (कार्टून) बाहर सड़क पर फेंकने शुरू कर दिए जिससे अफरा-तफरी मच गई। इस घटना का दृश्य सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया।
नारी क्या नहीं कर सकती जब ठान लेती है तो शासन तक हिला देती है…?
ऐसी ही यह घटना इटावा से देखने को मिली है जहां समसपुर गांव की महिलाओं ने इकट्ठा होकर शराब के ठेके को तहस नहस कर दिया।
महिलाओं का आरोप है कि शराब के ठेके की वजह से गांव के पुरुष शराबी होते जा रहे हैं और वह रोज… pic.twitter.com/Imcd8Bl273
— Uzma Parveen (@UzmaParveen94) April 30, 2026
इसकी सूचना मिलने पर क्षेत्रीय पुलिस व आबकारी टीम मौके पर पहुंच गई। अफसरों ने कार्रवाई का आश्वासन देकर महिलाओं को शांत कराया।
शराब के ठेके होने से महिलाओं के साथ बत्तमीजी का आरोप
रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं ने बताया कि शराब की दुकान होने से ठेकाकर्मी और शराब लेने आए लोगों में आए दिन देर रात तक लड़ाई- झगड़ा होता रहता है। दुकान के आसपास नशे में लोग खड़े रहते हैं। जिनके घर दुकान के पास है वे अपने घर के दरवाजे पर बैठ भी नहीं पाते हैं। शराब पीकर लोग गाली-गलौज करते हैं और महिलाओं को गंदे इशारे तक करते हैं।
शराब के ठेके को गांव से बाहर करने की मांग
महिलाओं ने बताया कि शराब ठेका की दुकान गांव से बाहर ले जाने की कई बार मांग की जा चुकी है लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रधान कृपाशंकर ने बताया कि गांव के बीच शराब का ठेका के पास में ही एक निजी स्कूल होने के कारण बच्चों पर बुरा असर पड़ रहा है। पुलिस व आबकारी विभाग की टीम ने ठेका दूसरे जगह स्थानांतरित करने का आश्वासन देकर महिलाओं को शांत करवाया। ठेका संचालक ज्ञानेंद्र सिंह निवासी खेड़ापति सराय, इकदिल ने पुलिस को तहरीर दी।
शराब की बोतल का नुकसान और महिलाओं पर आरोप
आरोप है कि इस दौरान जितनी शराब की बिक्री हुई थी उसके करीब 1,49,600 रुपये भी उठा लिए। साथ ही दुकान में रखे करीब 3009 पौवा शराब जिसकी कीमत करीब 2,40,720 रुपये बताई गई है। इसके अलावा दुकान में लगे इन्वर्टर व अन्य सामान में भी तोड़फोड़ की गई।
ठेका संचालक का कहना है कि इस घटना में कुल मिलाकर करीब 4,30,320 रुपये का नुकसान हुआ है। साथ ही सेल्समैन दिनेश कुमार के साथ भी मारपीट की गई। ठेका संचालक ने थाना पुलिस आरोपियों पर कार्रवाई की मांग की।
शराब का ठेका खुलने से चित्रकूट में मौत
खबर लहरिया शराब से जुड़े मुद्दों पर लगातार रिपोर्ट करता रहा है। शराब खुलने से जो ग्रामीण स्तर पर और खासतौर पर जो महिलाओं पर असर पड़ता है उसको जानने की कोशिश की गई है। खबर लहरिया की हाल की 13 अप्रैल की रिपोर्ट के अनुसार चित्रकूट जिले के हरिजनपुर गांव में सरकारी शराब ठेका खुलने के बाद गांव की महिलाओं की जिंदगी बदल गई है। महिलाओं का आरोप है कि शराब की आसान उपलब्धता से घरेलू हिंसा बढ़ी, बच्चों तक शराब पहुंच रही है और गांव की बेटियां असुरक्षित महसूस कर रही हैं। ग्रामीण महिलाओं ने पहले विरोध किया लेकिन घर में बन रही शराब बंद होने के बाद गांव में सरकारी ठेका खोल दिया गया। अब हालात ऐसे हैं कि शराब पीकर झगड़े, छेड़खानी और एक महिला की मौत तक का मामला सामने आया है। पूरी खबर देखने के लिए नीचे लिंक पर क्लिक कर सकते हैं।
महोबा में शराब के ठेके को गांव से बाहर ले जाने की मांग
खबर लहरिया की 3 अप्रैल की रिपोर्ट में महोबा में भी इसी तरह की समस्या देखने को मिली। महिलाओं का आरोप है की उनके घर के पुरुष दारू पीकर आते हैं और उनके साथ मारपीट करते हैं। अगर ठेका रखना ही है तो गांव के बाहर होना चाहिए। वहीं कुछ महिलाओं का कहना है कि दारू पीकर महिलाओं पर गन्दी नज़र रखते है युवा, पुरुष और बुजुर्ग भी। ऐसे में घर से बाहर जाने से भी डर लगता है। पूरी खबर देखने के लिए नीचे लिंक पर क्लिक कर सकते हैं।
चिटकूट में शराब ठेके को हटाने की मांग
खबर लहरिया की 29 मार्च 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक चित्रकूट जिले के भसौधा गांव के लोगों ने अपने गांव में स्थित शराब ठेके को हटाने की मांग को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा था। प्रशासन ने इस मांग को खारिज कर दिया है, जिससे ग्रामीणों में रोष है। गांववाले अब इस मुद्दे पर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने की योजना बना रहे हैं। पूरी खबर देखने के लिए नीचे लिंक पर क्लिक कर सकते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में शराब के ठेके कई तरह की सामाजिक और आर्थिक समस्याओं को बढ़ाते हैं। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और परिवारों में तनाव, झगड़े व हिंसा जैसी स्थितियां पैदा होती हैं। नशे की आदत के कारण कई घरों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो जाती है और अपराध भी बढ़ सकता है। इसका सबसे ज्यादा असर युवाओं पर पड़ता है, जिनका भविष्य प्रभावित होता है। इसलिए जरूरी है कि इस समस्या को समझते हुए समाज में जागरूकता बढ़ाई जाए और इसे रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
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