खबर लहरिया Blog UP/Mahoba: उर्मिल बांध में डूबने से दो मासूमों की मौत, अगले दिन निकाला गया शव 

UP/Mahoba: उर्मिल बांध में डूबने से दो मासूमों की मौत, अगले दिन निकाला गया शव 

उत्तर प्रदेश के महोबा जिले से एक खबर सामने आई है जहां जिले के कबरई ब्लॉक के श्रीनगर थाना क्षेत्र के पिपरा माफ गांव के पास स्थित उर्मिल बांध में नहाने गए दो बच्चों की डूबने से मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है।

रिपोर्ट – श्यामकली, लेखन – रचना 

सीओ दीपक कुमार (फोटो साभार: श्यामकली)

यह हादसा बीते 30 अप्रैल 2026 की शाम हुआ। शाम के समय मौसम अचानक बदल गया और तेज आंधी चलने लगी। इसी दौरान आर्यन और रितेश नाम के दो बच्चे उर्मिल बांध में नहाने के लिए गए हुए थे। काफी देर तक जब दोनों बच्चे वापस नहीं लौटे तो परिवार वालों को चिंता हुई। दोनों मृतक बच्चे रितेश और आर्यन के साथ एक लड़की भी थी जिसने घटना के बाद घर आकर ये खबर आई। इसके बाद बच्चों की तलाश शुरू हुई लेकिन रात होने की वजह से उन्हें ढूंढने में दिक्कत आई। अगले दिन 1 मई 2026 की सुबह दोनों बच्चों के शव पानी में तैरते हुए मिले जिसके बाद परिवार में कोहराम मच गया।

मृतक बच्चे आदिवासी कुचबधिया बिरादरी से थे और आपस में चाचा-भतीजे के रिश्ते में बताए जा रहे हैं। परिवार काफी गरीब है और मेहनत-मजदूरी करके अपना गुजारा करता था। बच्चों के परिजनों का कहना है कि घर की हालत पहले से ही कमजोर थी और अब इस हादसे ने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया है।

मृतक आर्यन की मां गुड़िया के बारे में बताया गया कि करीब तीन साल पहले उनके पति की मौत हो चुकी है। इसके बाद से वह मेहनत-मजदूरी और छोटे-मोटे काम करके अपने बच्चों का पालन-पोषण कर रही थीं। परिवार के लोगों का कहना है कि बड़ी मुश्किल से घर चल रहा था लेकिन अब बेटे की मौत ने उनके दुख को और बढ़ा दिया है। परिजनों ने बताया कि घटना वाले दिन बच्चे घर से निकले थे और बांध की तरफ चले गए। उनके साथ एक छोटी लड़की भी थी जिसने घर आकर बताया कि बच्चे पानी में डूब गए हैं। 

इस मामले में चारखरी क्षेत्राधिकारी (सीओ) दीपक दुबे ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और गोताखोरों की मदद से सर्च अभियान चलाया गया। जांच में सामने आया कि रितेश और आर्यन अपने परिवार के साथ डैम के पास डेरा डालकर रहते थे और शाम के समय नहाने के लिए पानी में गए थे जहां संभवतः फिसलने या गहरे पानी में चले जाने से यह हादसा हो गया। पुलिस ने दोनों शवों को बाहर निकलवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

घटना के बाद सामाजिक संगठनों ने भी परिवार की आर्थिक मदद की मांग उठाई है। भारतीय हलधर किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष जनक सिंह परिहार ने कहा कि यह परिवार बेहद गरीब है और लंबे समय से मजदूरी कर अपना गुजारा कर रहा है। ऐसे में प्रशासन को आगे आकर परिवार को आर्थिक सहायता देनी चाहिए ताकि इस मुश्किल समय में उन्हें कुछ सहारा मिल सके।

यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि गर्मी के दिनों में तालाब, नदी या बांध जैसे गहरे पानी वाले इलाकों में बच्चों का अकेले जाना कितना खतरनाक हो सकता है। थोड़ी सी लापरवाही कई परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल सकती है। अभी महोबा के पिपरा माफ गांव में हर आंख नम है और हर जुबान पर बस यही सवाल है इन मासूमों की मौत का दर्द आखिर कौन कम करेगा? 

 

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