खबर लहरिया Blog UP News: गोरखपुर में ‘अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम’ का शिलान्यास, वहीँ महोबा राजकीय स्टेडियम में लगे शुल्क का विरोध

UP News: गोरखपुर में ‘अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम’ का शिलान्यास, वहीँ महोबा राजकीय स्टेडियम में लगे शुल्क का विरोध

हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार 16 मई, 2026 को गोरखपुर में एक ‘अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम’ की आधारशिला रखी। वहीँ महोबा में खुले महोबा राजकीय स्टेडियम में जहां सालों से अब तक मुफ्त सुविधा थी वहां अब शुल्क लगाया गया है जिसे लेकर खिलाड़ियों में नाराजगी है। जहां एक तरफ सरकार खेल को बढ़ावा देने की बात करती है वहीं जो स्टेडियम पहले से बने हुए हैं वहां शुल्क लगाकर खिलाड़ियों के सपने को पूरा करने में अटकलें पैदा कर रही है। 

रिपोर्ट – श्यामकली, लेखन – सुचित्रा 

‘गोरखपुर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम’ गोरखपुर के ताल नादोर में लगभग 393 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सहयोग से इस अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम की आधारशिला रखी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिलान्यास के दौरान कहा, “46 एकड़ भूमि पर 30,000 दर्शकों की क्षमता वाला एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम बनाया जाएगा, वहीं उससे सटी 60 एकड़ भूमि पर एक विश्व स्तरीय खेल परिसर भी निर्मित किया जाएगा। वहां सभी इनडोर खेल सुविधाएं उपलब्ध होंगी और हॉकी जैसे आउटडोर खेल भी खेले जा सकेंगे। स्टेडियम और परिसर के निर्माण से क्षेत्र में होटलों, रेस्तरां और बाजारों की एक नई श्रृंखला विकसित होगी और बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे।”

गोरखपुर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के शिलान्यास के बीच स्पोर्ट स्टेडियम से जुड़ा मामला यूपी के ही मोहबा से सामने आया है। एक ओर मुख्यमंत्री Yogi Adityanath युवाओं को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करने और उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की बात कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर महोबा राजकीय स्टेडियम में राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचने का सपना देख रहे खिलाड़ियों के सामने नई मुश्किल खड़ी हो गई है। 

महोबा राजकीय स्टेडियम में पहले थी निशुल्क सुविधा

उत्तर प्रदेश के महोबा राजकीय स्टेडियम में अब तक खिलाड़ी सुबह-शाम मुफ्त में अभ्यास करते थे और स्थानीय लोग टहलने व व्यायाम के लिए आते थे। लेकिन अब 14 मई 2026 से वहां अब एंट्री, पार्किंग और ग्राउंड उपयोग के लिए शुल्क तय कर दिया गया है।

अरविंद पाल (स्पोर्ट्स ट्रेनर) ने आरोप लगाया कि जिला क्रीड़ा अधिकारी द्वारा स्टेडियम को ठेके पर दिए जाने के बाद नई फीस व्यवस्था लागू कर दी गई है। इस फैसले के विरोध में खिलाड़ी, युवा और स्थानीय नागरिक एकजुट होकर डीएम आवास पहुंचे और शुल्क वापस लेने की मांग की।

अरविंद पाल का कहना है कि अब तक स्टेडियम में न तो ग्राउंड फीस लगती थी और न ही पार्किंग शुल्क लिया जाता था, लेकिन 14 मई 2026 से अचानक पार्किंग और ग्राउंड उपयोग के नाम पर वसूली शुरू कर दी गई। उनके मुताबिक ग्राउंड फीस 200 रुपये तय की गई है, जबकि मोटरसाइकिल, साइकिल और फोर व्हीलर पार्किंग के लिए अलग-अलग शुल्क लिया जा रहा है।

 

महोबा राजकीय स्टेडियम में लगे पार्किंग शुल्क का बोर्ड (फोटो साभार: श्यामकली)

स्टेडियम में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं युवा 

इस स्टेडियम में गरीब परिवारों से आने वाले बच्चे यहां अग्निवीर, पुलिस और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की शारीरिक तैयारी करने आते हैं। ऐसे में यह शुल्क उनकी तैयारी पर असर डालेगा। खासकर लड़कियों के लिए पहले ही बाहर निकलकर अभ्यास करना आसान नहीं होता, ऊपर से फीस लागू होने से उनकी मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।

स्टेडियम ग्राउंड में दौड़ के लिए खड़ी युवा लड़कियां (फोटो साभार: श्यामकली)

स्टेडियम में बुंदेलखंड पूर्व सैनिक एकडमी द्वारा संचालित निःशुल्क वीर भूमि डिफेन्स एकडमी जनपद मोहबा से कई युवा प्रैक्टिस करने यहां आते हैं। ट्रेनिंग करवा रहे अरविंद पाल ने बताया कि वह वर्ष 2019 से लगातार स्टेडियम में युवाओं को प्रशिक्षण और अभ्यास कराते आ रहे हैं। 

उनका कहना है कि पहले कभी इस तरह की फीस नहीं लगाई गई, लेकिन नए जिला क्रीड़ा अधिकारी के आने के बाद शुल्क वसूली शुरू कर दी गई है। यहां तक कि एकडमी आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को निःशुल्क प्रैक्टिस के लिए हर चीज उपलब्ध करवाता है तो ऐसे में सरकार द्वारा शुल्क लेना सही नहीं है। यह बच्चे देश का नाम रौशन करने के लिए ही यहां मेहनत कर रहे हैं। इनके पास पैसे होते तो ये फ्री में थोड़ी सीखते कहीं किसी प्राइवेट और हाईफाई एकडमी में ट्रेनिंग के लिए जाते लेकिन ऐसे में शुल्क लगाएंगे तो ये बच्चे कैसे आगे बढ़ेंगे? 

सुधा, जो मौदहा की रहने वाली हैं। कहती हैं कि “मैं यहां फिजिकल की तैयारी कर रही हैं ताकि भविष्य में कुछ बन सकूं। स्टेडियम में लागू किया गया यह नया चार्जिंग सिस्टम गलत है। इस तरह के शुल्क के कारण परिवार वाले मुझे यहां नहीं भेजेंगे क्योंकि आने-जाने और रहने के खर्च के साथ-साथ अब ग्राउंड का अतिरिक्त शुल्क भी देना पड़ेगा।”

 

स्टेडियम ग्राउंड में फिजिकल प्रैक्टिस करती युवा (फोटो साभार: श्यामकली)

सुधा का कहना है कि जहां उन्हें प्रशिक्षण मिल रहा है, वहां से भी कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है, ऐसे में सरकारी स्टेडियम में ग्राउंड का पैसा लेना उचित नहीं है। उन्होंने मांग की कि यह एक सरकारी स्टेडियम है, इसलिए यहां प्रशिक्षण के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए, क्योंकि खिलाड़ी सीधे ग्राउंड में ही अभ्यास करके सीखते हैं।

जिम करने आने वाले युवाओं ने भी शुल्क लगाने पर जताया विरोध

स्टेडियम में जिम करने आने वाले युवाओं ने भी नई फीस व्यवस्था का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि फिलहाल वे खुलकर अपना नाम सामने नहीं लाना चाहते, लेकिन अगर आने वाले दिनों में पार्किंग और ग्राउंड शुल्क को लेकर दबाव बनाया गया तो सभी लोग एकजुट होकर विरोध करेंगे।

पुरानी व्यवस्था लागू करने की मांग

युवाओं का कहना है कि जिम की सुविधा के लिए लिया जाने वाला शुल्क उचित है और वे पहले भी उसे देते रहे हैं, आगे भी देते रहेंगे। लेकिन पार्किंग और ग्राउंड उपयोग के लिए पहले कभी कोई शुल्क नहीं लिया जाता था, इसलिए अब इसे लागू करना गलत है। उनका मानना है कि खिलाड़ियों और युवाओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं है और पुरानी व्यवस्था ही जारी रहनी चाहिए। स्टेडियम में बुंदेलखंड पूर्व सैनिक एकडमी द्वारा संचालित निःशुल्क वीर भूमि डिफेन्स एकडमी जनपद महोबा में ट्रेनिंग करवा रहे अरविन्द पाल ने कहा कि वह इस शुल्क को लेकर जिला अधिकारी तक अपनी बात रखेंगे ताकि यह व्यवस्था हटाई जाए और पहले जैसे निःशुल्क सुविधा दी जाए। 

जिला क्रीड़ा अधिकारी नियमों का मानना जरुरी 

महोबा के जिला क्रीड़ा अधिकारी संदीप गुप्ता से इस मामले पर खबर लहरिया ने कॉल पर बात की। जिला क्रीड़ा अधिकारी संदीप गुप्ता का कहना है कि अब आदेश आया है ठेके पर पार्किंग के लिए दिया गया है तो शुल्क देना होगा। पहले नहीं लिया गया वो अलग बात है लेकिन अब नियम है तो वो तो देना ही होगा। प्रैक्टिस, घूमने, फिरने के लिए पार्क बनाए गए हैं वहां सुविधा है लेकिन ये सरकारी स्टेडियम है यो यहां जो शुल्क तय है वो देना ही होगा। 

इस पूरे मामले में एक ओर प्रशासन नियमों और ठेके की व्यवस्था को आधार बनाकर शुल्क वसूली को जरूरी बता रहा है, वहीं दूसरी ओर खिलाड़ी और युवा इसे अपनी तैयारी के लिए बाधा मान रहे हैं। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि खेल सुविधाओं और युवाओं की आर्थिक स्थिति के बीच संतुलन बनाया जाए, ताकि प्रशिक्षण प्रभावित न हो और खेलों को भी बढ़ावा मिलता रहे। 

 

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