क्या स्मार्ट मीटर ने लोगों का बिजली बिल बढ़ा दिया है? और विरोध के बाद सरकार क्यों पीछे हटी? पिछले कुछ हफ्तों में स्मार्ट मीटर (Smart meter) को लेकर खासकर उत्तर प्रदेश में बड़ा विवाद देखने को मिला। लोगों ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिल अचानक बढ़ गया। कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए, लोगों ने मीटर उखाड़कर फेंक दिए और सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया।
स्मार्ट मीटर को लेकर लोगों की समस्या
लोगों का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगने पर पहले के मुकाबले ज्यादा बिल आता है, बैलेंस खत्म होते ही अचानक बिजली कट जाती है। तकनीकी खराबी और गलत रीडिंग के आधार पर बिल आता है। कम पढ़े-लिखे लोगों के लिए सिस्टम समझना मुश्किल होता है। गर्मी में बिजली कटने से पानी, खाना और रोजमर्रा के काम प्रभावित होता है। कुल मिलाकर लोगों में डर और नाराजगी थी कि यह सिस्टम उनके लिए मुश्किल बन गया है। खबर लहरिया की रिपोर्टिंग के दौरान स्मार्ट मीटर पर लोगों से बातचीत की गई। बाँदा और वाराणसी में स्मार्ट मीटर को लेकर लोगों का गुस्सा बढ़ता दिखाई दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उनके बिजली बिल अचानक कई गुना बढ़ गए हैं।
लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि पहले जहां महीने का बिल 500 रुपए से 700 रुपए के करीब आता था आज 2000 से 3000 तक हो गया है। गरीब, मजदूर और किसान व्यक्ति कहां से इतना पैसा भर पाएगा और न भरने पर बिजली ही कट जाती है। बिजली न होने से घर के रोजमर्रा के काम भी रुक जाते हैं।
स्मार्ट मीटर में प्रीपेड (Prepaid) को हटाने की मांग
लोगों की मांग है कि पुरानी पोस्टपेड व्यवस्था (Postpaid meter) थी और आसान थी। क्योंकि यह मीटर लगने से बिजली अपने आप काट दी जाती है फिर लोग गर्मी में परेशान रहते हैं। पोस्टपेड (Postpaid meter) में था कि महीने में एक बार बिजली बिल आता था लेकिन इसमें हफ्ते हफ्ते रिचार्ज करवाना पड़ता है और रिचार्ज करने पर जल्दी खत्म हो जाता है।
स्मार्ट मीटर लगाने के पीछे सरकार का उद्देश्य
- बकाया बिल कम करना
- बिजली चोरी रोकना
- पारदर्शिता बढ़ाना
- उपभोक्ताओं को अपने खर्च पर नियंत्रण देना
यानी सरकार इसे एक सुधार के रूप में देखती है। लेकिन इसका उल्टा असर लोगों पर देखने को मिला जोकि प्रदर्शन के रूप में सड़कों पर दिखा।
वैसे तो पहले भी कई घरों में बिजली के भुगतान के लिए स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं लेकिन इस बार इसको लेकर इतना विवाद क्यों? विवाद सिर्फ स्मार्ट मीटर को लेकर ही नहीं बल्कि स्मार्ट मीटर के प्रीपेड होने से है। पहले जानते हैं स्मार्ट मीटर काम कैसे करता है? स्मार्ट मीटर एक डिजिटल बिजली मीटर होता है जो आपके घर की बिजली खपत को अपने-आप रिकॉर्ड करता है और बिजली कंपनी तक जानकारी भेजता है।
- यह आपके घर में इस्तेमाल हो रही बिजली को लगातार मापता रहता है।
- हर कुछ समय में यह डेटा इंटरनेट/नेटवर्क के जरिए बिजली विभाग को भेज देता है।
- आपको खुद रीडिंग देने की जरूरत नहीं पड़ती।
- कई स्मार्ट मीटर में मोबाइल ऐप या डिस्प्ले होता है, जिससे आप अपनी खपत देख सकते हैं।
स्मार्ट मीटर में दो तरह की व्यवस्था होती है। पोस्टपेड में हर महीने कर्मचारी घर आकर रीडिंग लेता था और उसके बाद बिल आता था। लेकिन अब स्मार्ट मीटर में यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल कर दी गई है। जिन घरों में स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं वो प्रीपेड मीटर है। इसमें पहले आपको प्रीपेड मीटर में रिचार्ज करवाना पड़ता है यानि जीतना पैसा डालोगे उतनी बिजली इस्तेमाल करने को आपको मिलेगी और पैसे खत्म होने पर बिजली का इस्तेमाल आप नहीं कर पाएंगे ठीक वैसे जैसे मोबाइल का रिचार्ज खत्म होते ही सेवा बंद हो जाती है।
स्मार्ट मीटर को लेकर फैसला
विरोध बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर सोमवार 4 मई को बड़ा फैसला लिया गया। अब प्रीपेड स्मार्ट मीटर को पोस्टपेड सिस्टम में बदला जाएगा। यानी अब उपभोक्ता पहले बिजली इस्तेमाल करेंगे, फिर बिल भरेंगे। इससे लोगों को तुरंत राहत मिलने की उम्मीद है।
भले ही उत्तर प्रदेश सरकार ने पुराने पोस्टपेड सिस्टम पर लौटने का फैसला लिया है, लेकिन असली चुनौती अभी बाकी है। क्योंकि लाखों घरों में पहले ही स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। अब यह देखना होगा कि इस फैसले को जमीन पर लागू करने में कितना समय लगेगा और क्या लोगों को वाकई राहत मिल पाएगी?
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