न्यायालय का हवाला देते हुए कहना है कि संबंधित भूमि का एक हिस्सा किसी स्थगन आदेश के दायरे में नहीं आता इसके बावजूद पूरे रास्ते को विवादित बताकर करीब 140 से 150 परिवारों को आवागमन में बाधा उत्पन्न की जा रही है।
रिपोर्ट – सुशीला – लेखन – रचना
वाराणसी जिले के शिवपुर थाना क्षेत्र के सिद्धपुर ग्राम सभा में पिछले पांच वर्षों से स्थानीय लोग सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं। गांव लगभग 500 मीटर लंबी सड़क की हालत इतनी खराब है कि उस पर चलना भी मुश्किल हो गया है। इस सड़क के करीब 140 परिवार जुड़े हुए हैं जिन्हें रोजाना परेशानी झेलनी पड़ती है। खबर लहरिया द्वारा इस मुद्दे पर रिपोर्टिंग की गई और वहां के लोगों से बात की गई जिसमें ये सामने आया कि सड़क की मांग को लेकर गांव में लोगों द्वारा पोस्टर लगाए गए हैं और लोग लगातार सड़क की मांग के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। गांव वालों का कहना है कि कई बार अधिकरियों और जनप्रतिनिधियों को शिकायत दी गई लेकिन अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। लोगों का आरोप है कि विभाग उनकी समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
पांच साल से सड़क की मांग
ग्रामवासी अभय से बात करने पर सामने आया कि सड़क न बनने से भारी परेशानी बारिश के मौसम में होती है। सड़क पर जलभराव और कीचड़ से बच्चों का स्कूल जाना बंद हो जाता है। किसी के बीमार होने पर अस्पताल ले जाने के लिए दिक्कत होता है क्योंकि बड़ी गाड़ियों के साथ साथ साइकिल और बाइक भी खराब सड़क के कारण नहीं चल पाती। एंबुलेंस तक गांव के अंदर नहीं पहुंच पाती। लंबे समय तक कोई सुनवाई नहीं हुई तो अब ग्रामीणों ने गांव में धरना शुरू किया है। यहां भी कई दिनों तक धरना प्रदर्शन करने के बाद भी कोई समाधान नहीं निकला जिसके बाद ग्रामीण अपनी मांग को लेकर शास्त्री घाट पहुंचे और चेतावनी दी कि सड़क बनने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
वहीं गांव की रहने वाली सुमन ने बताया कि वे पिछले पांच साल से इसकी मांग कर रहे हैं लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला है। वे लोग प्रशासन से सिर्फ इतना चाहते हैं कि सड़क निर्माण को लेकर स्पष्ट जानकारी और लिखित आश्वासन दिया जाए। “चुनाव के समय नेता गांव में आते हैं, सड़क बनवाने का वादा करते हैं लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद समस्या जस की तस बनी रहती है।” उनका कहना है कि जब तक सड़क निर्माण की समय-सीमा तय कर लिखित में नहीं दिया जाता तब तक उनका धरना जारी रहेगा।
सिद्धपुर की रहने वाली रूप देवी का कहना है कि शादी विवाह या अन्य सामाजिक कार्यक्रमों के दौरान वाहन गांव के भीतर तक नहीं पहुंच पाते। “इस रास्ते का इस्तेमाल हज़ारों लोग रोजाना आवाजाही में करते हैं इसलिए सड़क निर्माण की मांग सिर्फ कुछ परिवारों के लिए नहीं है पूरे इलाके के लिए है।”
रूप देवी के मुताबिक तहसील, पुलिस प्रशासन और अन्य अधिकरियों ने कई बार ग्रामीणों से ज्ञापन लिया और आश्वासन दिया लेकिन अब लोग केवल आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं
वहीं वाराणसी के शिवपुर क्षेत्र के अधिकारी कानूनगो (राजस्व या भूमि प्रशासन विभाग का एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय अधिकारी होता है) मोहम्मद उल्लाह खान के अनुसार ग्रामीण पहले भी इस समस्या को लेकर उनके पास आए थे और मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी गई थी। हालही में मिले ज्ञापन के बाद प्रशासन को दोबारा अवगत कराया गया है और चार से पांच दिनों के भीतर एक टीम मौके का निरीक्षण करेगी। उनके द्वारा भरोसा दिलाया गया कि सड़क की स्थिति का आकलन कर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी ताकि लोगों को राहत मिल सके। गौरतलब है कि सड़क पर जलभराव और खराब सड़क की समस्या को लेकर गांव की महिलाएं और अन्य ग्रामीणों ने शास्त्री घाट पर शांतिपूर्ण धरना दिया और प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की।
महिलाओं का न्यायालय का हवाला देते हुए कहना है कि संबंधित भूमि का एक हिस्सा किसी स्थगन आदेश के दायरे में नहीं आता इसके बावजूद पूरे रास्ते को विवादित बताकर करीब 140 से 150 परिवारों को आवागमन में बाधा उत्पन्न की जा रही है। ग्रामीणों ने मांग की है कि राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंचे और सीमांकन करें और रास्ते की मरम्मत का काम शुरू करें।
चार पांच दिन में राजस्व टीम गठित कर समाधान का आश्वासन
धरने के दौरान शिवपुर थाना प्रभारी अजित वर्मा के माध्यम से तहसील प्रशासन से बातचीत हुई। इसके बाद कानूनगो मोहम्मद उल्लाह खान ने ग्रामीणों को लिखित रूप से कहा कि चार से पांच दिनों के भीतर राजस्व टीम गठित कर मामले की जांच की जाएगी और समाधान निकाला जाएगा।
हालांकि धरने में बैठे महिलाओं का कहना रहा कि अब वे केवल वादों से संतुष्ट नहीं होंगे और जल्द कार्यवाही नहीं हुई तो धरने को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
वहीं धरने में प्रियंका सिंह, रजनी तिवारी, रूपा सिंह, नूतन तिवारी, मुन्नी, चानमूनी देवी, धर्मावती देवी, विमला देवी, रेणु देवी, राधा देवी, बीना देवी, वंदना प्रजापति, गीता सिंह समेत बड़ी संख्या में महिलाएं धरने में शामिल रहीं।
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