उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में स्थित गोसाईगंज स्टेशन पर पीने का पानी पर्याप्त मात्रा में उपलबध नहीं है। इसी तरह शौचालयों की स्थिति भी 4 महीने (जनवरी 2026) से चिंताजनक बनी हुई है। सफाई की कमी, पानी का अभाव और नियमित निगरानी न होने के कारण शौचालय गंदगी का अड्डा बन गए हैं। कई बार तो हालत इतनी खराब होती है कि यात्री उनका उपयोग करने से भी कतराते हैं। इससे खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
रिपोर्ट – संगीता, लेखन – सुचित्रा
गोशाईगंज एक कस्बा और नगर पंचायत है, जो जिला मुख्यालय अयोध्या से लगभग 30–35 किलोमीटर दूर है। यह क्षेत्र का एक पुराना और प्रमुख बाजार भी माना जाता है। आसपास के करीब 25–30 किलोमीटर के लोग अपने सफर के लिए गोसाईगंज रेलवे स्टेशन पर निर्भर हैं। पहले यहां सियालदह पैसेंजर सहित कई ट्रेनें रुकती थीं, जिससे हजारों गांवों के लोग आवागमन करते थे।
गोशाईगंज रेलवे स्टेशन पर अयोध्या, अकबरपुर, मालीपुर, जौनपुर और वाराणसी जैसे प्रमुख रूटों से ट्रेनों का आवागमन होता है। यहां एक बार में लगभग 1000 यात्री चढ़ते-उतरते हैं, जिनमें से कम से कम 10 या उससे अधिक लोगों को तत्काल शौचालय की आवश्यकता होती है। इस स्टेशन पर इंटरसिटी, पैसेंजर, एक्सप्रेस, मेल, सियालदह और राजधानी जैसी कई महत्वपूर्ण ट्रेनें रुकती हैं। इसके अलावा पिछले एक महीने से फरक्का एक्सप्रेस का ठहराव भी यहां शुरू हो गया है, जो सीधे दिल्ली तक जाती है। इतनी बड़ी संख्या में ट्रेनों और यात्रियों के बावजूद, यदि बुनियादी सुविधाएं दुरुस्त न हों तो यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
स्टेशन पर शौचालय का हाल
स्टेशन पर बुनियादी सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है। स्टाफ और कर्मचारियों के लिए बने शौचालय में भी पानी की सुविधा नहीं है। वहीं आम यात्रियों के लिए कुल तीन सार्वजनिक शौचालय (बड़े और छोटे) उपलब्ध हैं, लेकिन उनमें भी पानी और साफ-सफाई की समस्या बनी रहती है। पिछले कुछ वर्षों में स्टेशन का विकास भी हुआ है। करीब दो साल पहले एक नया प्लेटफॉर्म बना और चार रेलवे ट्रैक तैयार किए गए। पहले जहां यात्रियों को ठहरने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी और बारिश में भीगना पड़ता था, अब हालात कुछ बेहतर हुए हैं। आज यहां पैसेंजर ट्रेन, दून एक्सप्रेस, मेल और राजधानी जैसी ट्रेनें भी रुकने लगी हैं। लेकिन सुविधाओं के विस्तार के बावजूद एक बड़ी समस्या अब भी जस की तस बनी हुई है।
गंदगी की वजह से बीमार रहने का खतरा
गोसाईगंज रेलवे स्टेशन पर करीब 30 किलोमीटर दूर से आए यात्री अशोक कुमार ने स्टेशन की स्थिति पर नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि यहां गंदगी की भरमार है और हालात इतने खराब हैं कि अगर कोई व्यक्ति यहां नियमित रूप से आता-जाता रहे, तो उसके बीमार पड़ने की संभावना बढ़ जाती है। प्रशासन इसे गंभीरता से नहीं लेती है न ही ध्यान देती है। स्टेशन पर साफ-सफाई की उचित व्यवस्था की जाए और यात्रियों के लिए पर्याप्त पानी की सुविधा सुनिश्चित की जाए, ताकि लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
निर्मला देवी जो यहां से ही सफर करती रहती हैं, उन्होंने रेलवे स्टेशन की मौजूदा स्थिति को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि स्टेशन का निर्माण हुए अभी लगभग 1–2 साल ही हुए हैं, लेकिन साफ-सफाई की कमी के कारण यहां बीमारी का खतरा बना रहता है। उन्होंने कहा कि पुरुष तो किसी तरह बाहर जाकर शौच कर लेते हैं, लेकिन महिलाओं के लिए यह एक बड़ी समस्या है कि वे कहां जाएं। शौचालयों की खराब स्थिति और पानी की कमी के कारण उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
निर्मला देवी ने यह भी बताया कि आम जनता के लिए अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाना आसान नहीं होता। अधिकारी थोड़ी देर के लिए आते हैं और फिर चले जाते हैं। लोगों को यह भी पता नहीं होता कि कौन सा अधिकारी कहां बैठता है और किससे अपनी समस्या बताई जाए। ऐसे में उनकी समस्याएं अनसुनी ही रह जाती हैं।
4 महीने से यही हाल
अंबेडकर नगर के भीटी ब्लॉक निवासी रामभवन निषाद ने बताया कि स्टेशन के शौचालयों की स्थिति लंबे समय से खराब बनी हुई है। उनका कहना है कि करीब चार महीने पहले भी शौचालयों की हालत यही थी और आज भी कोई सुधार नहीं हुआ है।
सरोजा देवी कहती हैं “हम सब अपने घर से ही निपट कर (शौच कर के) आते हैं क्योकि इतनी गंदगी में कौन जाए? यहां की बदबू से जी घबराने लगता है जाने की बात ही बहुत दूर है।”
स्टेशन पर काम करने वाले कर्मचारी भी परेशान
यह समस्या सिर्फ यात्रियों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्टेशन पर काम करने वाले कर्मचारी भी पानी की कमी से परेशान हैं। बताया जा रहा है कि स्टेशन पर पानी की टंकी तो बनी है, लेकिन उसमें पानी टिक नहीं पाता। सुबह भरी गई टंकी दोपहर तक खाली हो जाती है जिससे पूरे दिन पानी की किल्लत बनी रहती है।
इस मामले पर अयोध्या कैंट रेलवे स्टेशन के निर्माण निरीक्षक (आईडब्ल्यू) शिवदास चौधरी से बात हुई। उन्होंने बताया कि उन्हें इस समस्या की सूचना मिल चुकी है और इस संबंध में पत्र बनाकर भारतीय रेलवे के लखनऊ विभाग को भेज दिया गया है।
उन्होंने जानकारी दी कि पानी की समस्या को लेकर फीटर (पानी की फिटिंग करने वाला) द्वारा जांच की जा चुकी है। फिलहाल पानी का प्रवाह कम है जिसे सुधारने का कार्य जारी है। निर्माण निरीक्षक ने आश्वासन दिया है कि अगले दस दिनों के भीतर पानी की आपूर्ति और शौचालय से जुड़ी सभी समस्याओं का समाधान कर दिया जाएगाता कि यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
रेलवे स्टेशन पर इस तरह की गंदगी को देखते हुए लगता है रेलवे प्रशासन की जिम्मेदारी केवल निर्माण कार्य तक सीमित न रहे बल्कि इन सुविधाओं की नियमित निगरानी और रखरखाव भी सुनिश्चित करे। समय-समय पर सफाई, पानी की आपूर्ति और शिकायतों का त्वरित समाधान जरूरी है, ताकि यात्रियों को बेहतर अनुभव मिल सके।
यदि आप हमको सपोर्ट करना चाहते है तो हमारी ग्रामीण नारीवादी स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें और हमारे प्रोडक्ट KL हटके का सब्सक्रिप्शन लें’



