खबर लहरिया जवानी दीवानी सबरीमाला मंदिर में अब सभी उम्र की महिलाओं के लिए खोले जायेंगे द्वार

सबरीमाला मंदिर में अब सभी उम्र की महिलाओं के लिए खोले जायेंगे द्वार

साभार: विकिमीडिया कॉमन्स

सामूहिक आत्महत्या” और व्यवधान के खतरों के बीच, केरल में प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर आज अपने द्वार खोलेगा – इस बार सभी उम्र की महिला श्रद्धालुओं को जाने की अनुमति भी दी गयी है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 10-50 आयु वर्ग की महिलाओं पर पुराने प्रवेश प्रतिबंध हटा दिए गए हैं जिसके चलते आज मंदिर के द्वार पहली बार उन महिलाओं के लिए भी खोले जाएँगे।

जबकि कई महिलाओं ने कहा कि अदालत का विश्वास के मुद्दों पर कोई अधिकार नहीं है। वहीँ कई का ये भी कहना है कि वे मंदिर में आना ज़रूर चाहती हैं लेकिन रूढ़िवादी सोच के कारण उन्हें ऐसा कदम उठाने में भी डर लगता है ।

जैसे-जैसे महिला श्रद्धालु मंदिर की तरफ बड़ रही हैं, इस फैसले को न स्वीकार करने वालो लोग रास्ते पर अपने वाहनों द्वारा उन महिलाओं को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। इन श्रधालुओं द्वारा विरोध का स्थान कम से कम मंदिर के मुख्य द्वार से 20 किलोमीटर की दूरी पर है।

कई महिलाओं का ये भी कहना है कि  मंदिर अधिकारियों को महिलाओं को इसके चलते सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए। पुरोहितों का तर्क ये है कि मंदिर में प्रवेश पर रोक भगवन अय्यप्पा के संस्कारों के लिए ज़रूरी है क्योकि वे शाश्वत ब्रह्मचारी माने जाते थे।

ऐसे में कई महिला श्रधालुओं का कहना है कि वे मंदर में प्रवेश ज़रूर करुँगी, ये उनका हक है और इस हक को कोई उनसे नहीं छीन सकता। दूसरी तरफ कई महिला श्रद्धालु ने इस रोक पर समर्थन जताते हुए कहा है कि अदालत का सबरीमाला मंदिर के फैसले पर कोई अधिकार नहीं है। जो भी वहां पालन किया जा रहा है वो मंदिर की परंपरा और विश्वास का स्त्रोत है । खुद को अय्यप्पा का भक्त बताते हुए उनका कहना है कि वे मंदिर में तभी प्रवेश करेंगी जब उनकी आयु नियमित मानी जाएगी।

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराययी विजयन द्वारा सबरीमाला में प्रवेश पर रोक लगाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी जा रही है। उनका ये भी कहना है कि हम सभी को सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे । किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं होगी ।

महिलाओं की प्रगतिशील संगठन की प्रतिनिधि के.संध्या का कहना है कि विवाद और विरोध के इस मौसम में सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की योजना पर तेलंगाना और आंध्रप्रदेश की महिलाओं को भयभीत किया जा रहा है। उनका ये भी कहना है कि ऐसी मानसिकता को बदलने के लिए कुछ समय लगेगा। जिसके चलते अभी कुछ स्पष्ट नहीं किया जा सकता है।