खबर लहरिया Blog MP News: छतरपुर में खबर कवरेज के दौरान पत्रकार के साथ मारपीट, पत्रकार की सुरक्षा पर फिर उठा सवाल

MP News: छतरपुर में खबर कवरेज के दौरान पत्रकार के साथ मारपीट, पत्रकार की सुरक्षा पर फिर उठा सवाल

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में पत्रकार राकेश रॉय के साथ मारपीट की घटना सामने आई है। यह घटना तब हुई जब वह 23 अप्रैल 2026 को एक धार्मिक कार्यक्रम से वापस लौट रहे थे। पत्रकार राकेश रॉय का खुद का यूट्यूब चैनल है जिसका नाम “साधना न्यूज़ और समाचार पत्र का नाम “राज्य एक्सप्रेस” है। हमले के बाद से जिले के कुछ सामाजिक संगठन और पत्रकारों ने निर्णय लिया कि वे प्रशासनिक कार्यों का बहिष्कार करेंगे और प्रदर्शन करेंगे। इस संबंध में आज 27 अप्रैल 2026 को पत्रकारों ने चक्का जाम और प्रदर्शन किया।

पत्रकार राकेश राय (फोटो साभार: सोशल मीडिया राकेश रॉय के फेसबुक अकाउंट से ली गई)

रिपोर्ट – अलीमा, लेखन – सुचित्रा 

पत्रकार पर हमले की खबर अब आम बात हो गई है क्योंकि जिस पत्रकार ने जमीनी सच्चाई और भ्रष्टाचार को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की उनकी या तो हत्या कर दी गई या फिर उनके साथ मारपीट की गई। मध्य प्रदेश के छतरपुर में पत्रकार राकेश रॉय के साथ बेहरमी से मारपीट की घटना एक ताजा उदाहरण है।

पत्रकार राकेश रॉय पर क्यों हुआ हमला

हमारी रिपोर्टर अलीमा द्वारा पूछताछ में उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के बिजावर ब्लॉक में तब घटी जब पत्रकार राकेश रॉय (39 वर्ष) 23 अप्रैल, गुरुवार को एक धार्मिक कार्यक्रम से अपने घर लौट रहे थे। रास्ते में पीपट गांव में कुछ लोगों के बीच विवाद हो रहा था। पूछने पर उन्हें बताया गया कि शराब की बोतलें तय कीमत से अधिक दाम पर बेची जा रही हैं।

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इस पर राकेश राय ने अपने मोबाइल से कवरेज शुरू कर दी। तभी वहां मौजूद कुछ लोगों ने उनका फोन छीन लिया और उनके साथ मारपीट की। मारपीट इतनी बुरी तरह से की गई कि उनके शरीर पर चोट के लाल निशान साफ़ नज़र आए। जब उन्होंने बचाव करने की कोशिश की, तो उनके खिलाफ ही मामला दर्ज कर दिया गया।

पत्रकारों में दिखा आक्रोश

इस घटना के बाद छतरपुर जिले के पत्रकारों में भारी आक्रोश देखा गया। 26 अप्रैल, रविवार को सर्किट हाउस में एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में पत्रकार शामिल हुए। वरिष्ठ पत्रकारों ने कहा कि यह हमला सीधे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर है और इसके खिलाफ वे संघर्ष करेंगे।

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प्रदर्शन की शुरुआत सर्किट हाउस से हुई, जहां से पत्रकार एसपी कार्यालय पहुंचे, लेकिन वहां एसपी नहीं मिले। इसके बाद वे कलेक्टर कार्यालय गए, जहां उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से चिता आंदोलन किया। कलेक्टर ने उनका आवेदन स्वीकार कर आश्वासन दिया।

चिता आंदोलन (फोटो साभार: अलीमा)

इसके बाद पत्रकार एसपी कार्यालय के सामने पहुंचे और वहां चक्का जाम कर विरोध दर्ज कराया।

एसपी कार्यलय के सामने चक्का जाम (फोटो साभार: अलीमा)

विरोध के दौरान पत्रकारों ने प्रतीकात्मक रूप से चिता लेकर प्रदर्शन किया और चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
मुकेश कुमार सिंह (आईसना पत्रकार संघ जिला अध्यक्ष) ने बताया कि जैसे ही उन्हें इस घटना की जानकारी मिली, उन्होंने गहरा दुख जताया। उनका कहना था कि आज यह घटना राकेश रॉय के साथ हुई है, कल किसी अन्य पत्रकार के साथ भी हो सकती है।

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उन्होंने कहा कि पत्रकार हर परिस्थिति में अपना काम करते हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिलती। इस मुद्दे को लेकर करीब 300 पत्रकार एकत्रित होकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

“पत्रकारों के साथ इस तरह का अन्याय स्वीकार नहीं” – पत्रकार नेहा सिंह

वहीं समाजसेवी और पत्रकार नेहा सिंह (स्वयं का यूट्यूब चैनल नेहा सिंह के नाम से) ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही वह राकेश राय से मिलने पहुंचीं। उन्होंने देखा कि राकेश राय घायल थे और उनके परिवार की स्थिति भी काफी कठिन थी।
नेहा सिंह ने कहा कि पत्रकारों के साथ इस तरह का अन्याय स्वीकार नहीं किया जा सकता और इसके खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है।
उन्होंने पत्रकारों की तीन प्रमुख मांगें भी रखीं—

  • पत्रकार सुरक्षा कानून लागू किया जाए
  • पत्रकारों पर फर्जी मामले दर्ज न किए जाएं
  • कवरेज के दौरान वीडियो बनाने से रोका न जाए

हमले के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया

इस प्रदर्शन में कुछ राजनीतिक नेताओं ने भी भाग लिया। भीम आर्मी पार्टी के अध्यक्ष दामोदर यादव ने इस घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि पत्रकारों पर बढ़ते हमले बेहद चिंताजनक हैं और यह लोकतंत्र के लिए खतरे का संकेत है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आरोपियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो पार्टी भी आंदोलन में शामिल होगी।

इस मामले में पत्रकारों ने कलेक्टर संदीप जायसवाल को ज्ञापन सौंपा। कलेक्टर ने आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई की जाएगी और मामले को मुख्यमंत्री तक पहुंचाया जाएगा।

वहीं छतरपुर के एसपी आगम जैन ने भी कहा कि घटना में शामिल दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि संबंधित पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद पत्रकारों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर चक्का जाम हटा लिया।

प्रदर्शन समाप्त लेकिन करवाई न होने पर फिर करेंगे बड़ा आंदोलन

पत्रकारों ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा होती हैं, तो वे और अधिक मजबूती से विरोध करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाओं का सीधा असर पत्रकारों के मनोबल पर पड़ता है।

जब किसी पत्रकार के साथ मारपीट होती है और दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती, तो बाकी पत्रकारों में भी डर पैदा होना स्वाभाविक है। यह डर उनके काम करने के तरीके को प्रभावित करता है और वे संवेदनशील या जोखिम भरे मुद्दों पर रिपोर्टिंग करने से बचने लगते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि कई महत्वपूर्ण मुद्दे जनता तक नहीं पहुंच पाते।

इसके अलावा, ऐसी घटनाएं आम नागरिकों के सूचना के अधिकार पर भी असर डालती हैं। एक लोकतांत्रिक समाज में हर व्यक्ति को सही और निष्पक्ष जानकारी पाने का अधिकार होता है, लेकिन जब पत्रकारों की सुरक्षा खतरे में होती है, तो यह अधिकार भी कमजोर पड़ जाता है। इससे अफवाहों और गलत सूचनाओं के फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

पत्रकारों पर किए गए हमले की अन्य घटनाएं

पत्रकारिता करना अब खतरे का काम बन चुका है। आज के समय में ऐसे कई पत्रकार है जो अपना खुद का चैनल बनाकर लोगों की समस्या को सरकार तक पहुंचाते है और साथ ही सरकार से सवाल भी करते हैं। इसलिए ऐसे कई उदाहरण है जो इस बात का प्रमाण है कि आज के समय में यदि कोई पत्रकार गलत के प्रति आवाज उठा रहा है तो उसकी आवाज को दबाने के लिए कई प्रयास किए जाते हैं।

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स (IFJ) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 पत्रकारिता के लिए एक और घातक वर्ष साबित हुआ जिसमें विश्व भर में कुल 128 पत्रकारों और मीडियाकर्मियों की हत्या हुई। इनमें 10 महिला पत्रकार शामिल हैं और 9 मौतें दुर्घटनावश हुईं। पत्रकारों की सुरक्षा पर नज़र रखने वाली संस्था कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट के अनुसार 1992 से लेकर 2025 तक करीब 47 पत्रकारों की मौत दर्ज की गई है जिसमें से 33 मामले हत्या के हैं।

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पत्रकारों पर इस तरह के बढ़ते हमले काफी चिंताजनक है। यदि इस तरह के हमले लगातार बढ़ते रहे तो पत्रकार कैसे पत्रकारिता करेंगे? यदि वास्तविक रिपोर्टिंग की जा रही हैं तो उन्हें रोकना क्यों? क्या लोगों की आवाज बनना और लोगों की परेशानी दिखाना एक तरह का जुर्म है? क्या सच को दिखाने की कीमत पत्रकारों को जान दे कर चुकानी होगी?

 

 

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