अयोध्या राम मंदिर में दान संबंधी कथित अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने मंगलवार 23 जून, 2026 को उत्तर प्रदेश सरकार को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी। मीडिया में दी गई जानकारी के आधार पर अब तक जाँच में सामने आया है कि दान में मिली धनराशि और कीमती वस्तुओं के संभालने, प्रबंधन और गिनती में गड़बड़ी हुई है। साथ ही, निगरानी की कमी और लापरवाही भी सामने आई है।
यह रिपोर्ट एसआईटी प्रमुख विजय विश्वास पंत, जो लखनऊ के आयुक्त भी हैं, ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंपी थी। रिपोर्ट देने के बाद उन्होंने बताया कि यह सिर्फ शुरुआती (प्रारंभिक) रिपोर्ट है। हालांकि रिपोर्ट की सामग्री को सार्वजनिक नहीं किया गया। मीडिया रिपोर्ट में जो भी दान चोरी में गड़बड़ियां बताई गई है वह किसी सूत्र के आधार पर कही गई है।
सूत्रों के अनुसार, अंतरिम रिपोर्ट में राम मंदिर ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों को लापरवाही का दोषी पाया गया है। यह भी माना जा रहा है कि रिपोर्ट में ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों के रिश्तेदारों की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए गए हैं
एसआईटी जाँच में 17 लोगों पर आरोप
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में सामने आया कि जांच रिपोर्ट में मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा, निर्माण प्रभारी गोपाल राव सहित कुल 17 लोगों को इस मामले में जिम्मेदार बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस मामले में एफआईआर दर्ज की जाए और मंदिर ट्रस्ट का पुनर्गठन किया जाए।
खबर लहरिया को सूचना मिली कि मंदिर के कामकाज को बेहतर तरीके से चलाने के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में नियुक्त किया जाए।
सेवादारों और कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में सुधार बना शक का कारण
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में एसआईटी ने इस मामले से जुड़े करीब 150 सेवादारों और कर्मचारियों की पहचान की है। आरोप है कि 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्रतिमा के अभिषेक समारोह के बाद इनमें से कई लोगों की आर्थिक स्थिति में अचानक बड़ा बदलाव आया। इनमें से कुछ लोग तो करोड़पति भी बन गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, चंपत राय के परिवार और करीबी भी इस दान चोरी में शामिल है। जानकारी के अनुसार चपंत के करीबी माने जाने वाले फूलकांत मिश्रा की संपत्ति में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। बताया जा रहा है कि उनके पास करीब 25 लाख रुपये की तीन लग्जरी कारें हैं और उनकी जीवनशैली में भी काफी बदलाव आया है। इसी कारण वे भी एसआईटी की जांच के दायरे में आ गए हैं।
200 किलो चांदी की ईंटें की दान, कोई हिसाब नहीं
इस मामले में एक और आरोप सामने आया है जो सिंधी समाज ने लगाया है। सिंधी समाज ने 2021 में 200 किलो की “चांदी की ईंटें” राम मंदिर में चढ़ाने के लिए ट्रस्ट को दी थी और इसकी कोई रशीद उन्हें आज तक नहीं मिली है। अब उन्हें भी चिंता हो रही है कि कहीं उनकी दान की गई चाँदी चोरी का हिस्सा तो नहीं बन गई।
सिंधी समाज ने 200 KG चांदी की ईंटों की Video जारी कर दी है, जो उन्होंने राम मंदिर अयोध्या को दी थीं। सिंधी समाज अब पूछ रहा है कि ये ईंटें कहां गईं? https://t.co/yyYlycay3M pic.twitter.com/3DoAmLU5Y1
— Sachin Gupta (@Sachingupta) June 24, 2026
हालांकि, जांच एजेंसियों ने अभी तक किसी निष्कर्ष या कोई आरोप साबित नहीं किये है और मामले को शुरुआती स्तर पर ही माना जा रहा है।
इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो पाएगी। बताया जा रहा है एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट एक हफ्ते में दी जाएगी।
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