दिल्ली के उत्तरी पश्चिमी में स्थित मुस्तफाबाद का नाम बदलने की चर्चा एक बार फिर शुरू होती नज़र आ रही है। रविवार 28 जून को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आयोजित विकसित भारत संकल्प सम्मेलन में कहा कि नाम बदलने की लड़ाई वह खुद लड़ेंगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या मुस्तफाबाद का नाम बदलने की सच में जरूरत है या फिर यहां पर जो विकास की कमी है उस पर काम करने की जरूरत है।

28 जून 2026 को दिल्ली के मुस्तफाबाद विधानसभा क्षेत्र में आयोजित ‘विकसित भारत संकल्प सम्मेलन’ में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और विधायक मोहन सिंह बिष्ट (फोटो साभार: X/@gupta_rekha)
दिल्ली का मुस्तफाबाद क्षेत्र जहां अधिकतर आबादी मुस्लिम समुदाय की है। भारतीय जनता पार्टी नाम बदलने को लेकर अक्सर चर्चा का केंद्र बन जाती है खासकर तब जब इलाके का नाम किसी एक समुदाय को दर्शाता हो। उदाहरण के तौर पर इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने साल 2025 में राज्यसभा में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की उन सड़कों और सार्वजनिक स्थानों के नामों का मुद्दा उठाया, जो मुगल और ब्रिटिश काल से जुड़े व्यक्तियों के नाम पर हैं जैसे अकबर रोड, लोधी रोड और मिंटो ब्रिज का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे नामों पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
इससे पहले उत्तरी पूर्वी दिल्ली के बाबरपुर विधानसभा क्षेत्र का नाम बदलने का मुद्दा उठाने की बात विधायक अजय महावर ने कही थी। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने नाम बदलने की वकालत करते हुए सुझाव दिया कि इसका नाम किसी हिंदू या मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानी या राष्ट्र के विकास में योगदान देने वाले किसी व्यक्ति के नाम पर रखा जा सकता है, जैसे कि पूर्व राष्ट्रपति और भारत रत्न से सम्मानित स्वर्गीय एपीजे अब्दुल कलाम।
मुस्तफाबाद विधानसभा क्षेत्र का नाम बदल कर शिव विहार
28 जून 2026 को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता उत्तरी पूर्वी दिल्ली के विधानसभा क्षेत्र मुस्तफाबाद में आयोजित ‘विकसित भारत संकल्प सम्मेलन’ के लिए आई हुई थीं। उन्होंने विधायक मोहन सिंह बिष्ट के काम की तारीफ की। इसी दौरान उन्होंने मुस्तफाबाद का नाम बदलने को लेकर बात की।
मुस्तफाबाद विधानसभा क्षेत्र में आयोजित ‘विकसित भारत संकल्प सम्मेलन’ में जनता से संवाद का अवसर मिला।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों में भारत ने सेवा, सुशासन और जनकल्याण की नई कार्यसंस्कृति स्थापित की है। गरीब, वंचित और जरूरतमंद तक योजनाओं… pic.twitter.com/CJQuLzJWkq
— Rekha Gupta (@gupta_rekha) June 28, 2026
उन्होंने अपने भाषण में कहा “मुस्तफाबाद को जो आप शिव विहार बनाना चाहते हो। भोले की नगरी बनाना चाहते हो। मैं आप के लिए इस नाम के लिए आपकी लड़ाई लड़ूंगी आप चिंता मत कीजिये।”
दिल्ली विधानसभा के डिप्टी स्पीकर मोहन सिंह बिष्ट ने कहा कि वह किसी भी क्षेत्र के नाम विरोधी नहीं है। वह आम लोगों के आह्वान पर मुस्तफाबाद क्षेत्र का नाम नहीं बदलेंगे, बल्कि विधानभा क्षेत्र का नाम बदलकर शिव विहार करेंगे।
हम आपको बता दें कि शिव विहार नाम का पहले से ही एक क्षेत्र उत्तरी पूर्वी दिल्ली में है जो मुस्तफाबाद से कुछ ही मीटर की दूरी पर है। इस नाम से एक मेट्रो स्टेशन भी जो पिंक लाइन पर मौजूद है।
2025 में दिल्ली विधानसभा में मुस्तफाबाद का नाम बदलने का रखा था प्रस्ताव
द प्रिंट की 27 मार्च 2025 की रिपोर्ट से पता चलता है कि मुस्तफाबाद नाम बदलने को लेकर बीजेपी विधायक मोहन सिंह बिष्ट ने पहले भी प्रस्ताव रखा था। रिपोर्ट के अनुसार बजट सत्र के दौरान दोपहर के भोजन के बाद वह (मोहन सिंह बिष्ट) एक निजी प्रस्ताव पेश करेंगे जिसमें कहा जाएगा, “यह सदन संकल्प लेता है कि निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए मुस्तफाबाद विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र का नाम बदलकर शिव विहार विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र कर दिया जाए।”
मुस्तफाबाद इलाके में दिल्ली दंगे
मुस्तफाबाद वही इलाका है जहां फरवरी 2020 में दिल्ली दंगे हुए थे। 2020 में विधानसभा चुनाव के तुरंत बाद उत्तर-पूर्वी दिल्ली के मुस्तफाबाद इलाके में सांप्रदायिक हिंसा हुई थी। इस हिंसा में 50 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।
विधायक मोहन सिंह बिष्ट
67 साल के मोहन सिंह बिष्ट वर्तमान विधानसभा में एक वरिष्ठ विधायक हैं। वे पहली बार 1993 में पड़ोसी करवाल नगर सीट से विधायक बने थे। 2025 दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा के मोहन सिंह बिष्ट ने आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार अदील अहमद खान को 17 हजार से अधिक वोटों से हराकर मुस्तफाबाद सीट जीती थी। इस चुनाव में भाजपा ने 70 में से 48 सीटें जीतकर दिल्ली में सत्ता में वापसी की।
नाम बदलना जरुरी या विकास
मुस्तफाबाद विधानसभा क्षेत्र में नाम बदलने से ज्यादा विकास की कमी महसूस होती है। इस इलाके में धूल भरी सड़क, सड़कों पर कूड़ा और सड़कों पर पड़ी गन्दी नाली देखने को मिलती है। सड़कों पर अवैध पार्किंग भी आपको दिख जाएगी जो ट्रैफिक जाम का कारण बनती है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 28 जून को अपने भाषण में कहा था कि 200 करोड़ रुपये की लागत से मुस्तफाबाद विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्य किए जा रहे हैं। हाँ, उत्तरी पूर्वी दिल्ली में नालों की सफाई का काम जोरों पर है। नालों का निर्माण भी किया जा रहा है। लेकिन नालों में से गंदगी निकालकर कई दिनों तक ऐसे ही पड़ी रहती है जिसकी वजह से लोगों का आना जाना मुश्किल हो जाता है और ऊपर से जाम और लग जाता है।
सड़क निर्माण
भजनपुरा से करावल नगर रोड पर कुछ दिनों से सड़क निर्माण कार्य चल रहा है। पहले ये सड़क टूटी हुई थी जिससे आने जाने में जाम भी लगता था। जब यह सड़क बननी शुरू हुई लोग काफी खुश थे कि सड़क बन गई अब जाम से राहत मिलेगी लेकिन ऐसी सड़क बनना भी कोई बनना है क्योंकि सड़क की शक्ल देखकर कोई भी बता देगा ये सड़क ज्यादा साल तक चलने वाली नहीं है। क्योंकि यह सड़क रातों रात बना दी जाती है इस पर किसी तरह का पानी का छिड़काव नहीं किया जाता ताकि सड़क मजबूत रहे। इसकी वजह से सड़क पर धूल उड़ने लगी है और सड़कों से कुछ कुछ बजरी गिटी अभी से निकलने लगी है। नीचे दी गई तस्वीर आज सुबह 1 जुलाई 2026 की है।
बारिश खोल सकती है पोल
दिल्ली में आजकल मौसम बारिश की सम्भावना वाला है। मौसम विभाग के अनुसार 2 जुलाई से मानसून रफ़्तार पकड़ सकता है। ऐसे में जब तेज बारिश होगी तो इस सड़क का क्या हाल होगा? सड़को पर जो नाले से निकाली गई कीचड़ है वो भी बहकर फिर से नालों में चली जाएगी। ऐसे काम करने का क्या मतलब जो जनता को लम्बे समय के लिए राहत नहीं दे सकती।
किसी भी क्षेत्र में सरकार यदि विकास का दावा करती है और अपनी सरकार के विधायकों के तारीफों के पुल बांधती है। तब जमीन पर रह रहे लोगों के मन में सवाल उठता है कि जब विधायकों को इतने करोड़ों रुपए क्षेत्र के विकास के लिए दिए गए हैं तो उनमें से कितना हिस्सा विकास के काम में लगाया जा रहा है? क्या यह काम सिर्फ कागज और मीडिया में या फिर नाम के लिए किया जा रहा है? क्या सच में यह विकास लोगों की सुविधा को सोच कर किया जा रहा है क्योंकि जमीनी स्तर पर विकास धुंधला नज़र आता है।
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