मध्य प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के 16 शासकीय औद्यिगिक प्रशिक्षण संस्थानों आईटीआई (ITI) को निजी संस्थाओं को सौंपने या पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड़ पर संचालित करने की प्रक्रिया व योजना बनाई जा रही है जिसे अभी फ़िलहल किसी विशेष निजी कंपनी ता संस्था को अंतिम रूप से नहीं सौंपा गया है अभी ये प्रक्रिया प्रस्तावित है।
इसी निजीकरण की योजना का विरोध मध्य प्रदेश में अब तेज होता जा रहा है। इसी के विरोध में सिहोर जिले के चकल्दी और बड़वानी जिले के खेतिया के छात्र – छात्राएँ सड़कों पर उतरकर जमकर विरोध कर रहे हैं। इसी क्रम में छात्रों द्वारा सिहोर जिले के चकल्दी स्थित एकलव्य औद्यिगिक प्रशिक्षण संस्थान के छात्रों ने 5 अगस्त 2026 को गांव में जागरूकता रैली निकालकर सरकार के फैसले का विरोध किया। छात्रों ने लोगों को निजीकरण के संभावित असर के बारे में जानकारी दी और सरकार से इस निर्णय को वापस लेने की माँग की।
रैली के दौरान एक नुक्कड़ नाटक भी किया गया जिसका संदेश था कि सरकारी आईटीआई संस्थानों का निजीकरण सबसे ज़्यादा गरीब आदिवासी और ग्रामीण इलाकों के छात्रों पर होगा। बताया कि अगर सरकारी सरकारी संस्थान निजी हाथों में चले गए तो तकनीकी शिक्षा महंगी हो सकती है जिससे गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए पढ़ना मुश्किल हो सकता है।
दैनिक भास्कर के रिपोर्ट अनुसार सभा को संबोधित करते हुए छात्र संगठन की अध्यक्ष आरती बरकड़े, उपाध्यक्ष रामकिशोर उईके, सचिव गोविंद मसकोले और राज्य संयोजक संदीप द्वारा सरकार से निजीकरण का फैसला जल्द वापस लेने की मांग की गई। वक्ताओं द्वारा कहा गया कि शिक्षा को सभी के लिए सुलभ बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है और सार्वजनिक संस्थाओं को निजी क्षेत्र के हवाले करना इस दिशा में सही कदम नहीं है। रामकिशोर उईके द्वारा आरोप भी लगाया गया कि वार्षिक परीक्षाओं के दौरान निजीकरण का फैसला जारी कर छात्रों को मानसिक रूप से परेशान किया गया। उनके द्वारा चेतावनी दी गई है कि अगर सरकार द्वारा अपना फैसला नहीं बदला जाता है तो ये विरोध सिर्फ एक संस्थान तक नहीं होगा। इस मांग को लेकर पूरे प्रदेश में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
विधायक डॉ. हीरालाल अलावा का सरकार को पत्र
जयस (जय आदिवासी युवा शक्ति) के राष्ट्रीय संरक्षक और विधायक डॉ. हीरालाल अलावा द्वारा भी इस फैसले पर सवाल उठाते हुए सरकार से प्रस्तावित प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग की गई। उनके द्वारा राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार को पत्र भेज कर मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की।
अपने पत्र में डॉ. हीरालाल अलावा ने कहा है कि सरकारी आईटीआई को निजी संस्थानों को सौंपने जैसा बड़ा फैसला बिना पर्याप्त सार्वजनिक चर्चा और उसके सामाजिक असर का सही आकलन किए बिना किया जा रहा है और इस तरह के निर्णय से पहले यह देखना जरुरी है कि इसका गरीब आदिवासी दलित और पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों पर किस तरह से प्रभाव पड़ेग।
उन्होंने अपने पत्र में संविधान के कई प्रावधान का भी हवाला दिया। उनका कहना था कि संविधान राज्य को सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने, शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और एसटी, एससी और अन्य वर्गों के शैक्षणिक और आर्थिक हितों की रक्षा करने की जिम्मेदारी देता है। इसके अतिरिक्त, अनुच्छेद 14 समानता का अधिकार, अनुच्छेद 15 (4) (5) पिछड़े वर्गों के हित में विशेष प्रावधान तथा अनुच्छेद 21 गरिमामय जीवन के अधिकार की गारंटी देता है। डॉ. अलावा ने यह भी बताया कि धार, अलीराजपुर, झाबुआ, बड़वानी, डिण्डोरी, मंडला, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर जैसे दूरस्थ जिलों में शासकीय आईटीआई केवल प्रशिक्षण संस्थान नहीं हैं। उन्होंने प्रदेश में भर्ती परीक्षाओं को लेकर समय-समय पर उठे विवादों और पारदर्शिता से जुड़े सवालों का भी जिक्र किया है।
महामहिम राज्यपाल श्री मंगुभाई छ. पटेल, माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के माननीय अध्यक्ष श्री अंतर सिंह आर्य तथा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के माननीय अध्यक्ष श्री वी. रामासुब्रमणियन को पत्र लिखकर सागर जिले के ग्राम बहरोल में आदिवासी परिवार की वैध… pic.twitter.com/adocdah1i0
— Dr. Hiralal Alawa (@HIRA_ALAWA) August 6, 2026
विधानसभा क्षेत्र से मध्य प्रदेश विधानसभा के सदस्य का सरकार को पत्र
कमलेश्वर डोडियार मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के सैलाना विधानसभा क्षेत्र से मध्य प्रदेश विधानसभा के सदस्य हैं जो अनुसूचित जनजाति समुदाय के लिए आरक्षित है। उन्होंने भारत आदिवासी पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हुए 2023 का मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव जीता है। उन्होंने भी इस निजीकरण का विरोध किया है और पत्र लिखा है और रकारी आईटीआई के निजीकरण का विरोध करते हुए शासन से तत्काल फैसले को निरस्त करने की माँग की है।
अभी फिलहाल चकल्दी से उठी यह आवाज अब प्रदेश के अन्य आईटीआई संस्थानों तक पहुंचने लगी है। अब ये देखना होगा कि छात्रों के विरोध के बीच सरकार इस फैसले पर क्या रुख अपनाती है।
ये तो रही मध्य प्रदेश की बात अगर देश भर की तस्वीर देखें तो अलग – अलग राज्यों में छात्र शिक्षा से जुड़े मूलभूत मुद्दों को लेकर आवाज उठाते दिख रहे हैं। शिक्षा के सवाल बड़े स्तर पर आवाज हालही में दिल्ली के जंतर-मंतर से उठी थीं जहां छात्र और शिक्षक शिक्षा से जुड़े अलग-अलग मुद्दों को लेकर एक साथ आए। जिसमें छात्रों की जीत भी हुई शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा।
झारखंड
झारखंड में झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा को लेकर विवाद खड़ा हो गया। 2 जुलाई को जारी प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम में 2,204 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया गया और मुख्य परीक्षा 18 से 20 जुलाई के बीच प्रस्तावित थी। लेकिन परिणाम जारी होने के बाद कई सवाल उठे। अभ्यर्थियों का आरोप था कि आयोग ने श्रेणीवार कटऑफ जारी नहीं की। इसी दौरान सोशल मीडिया पर एक अभ्यर्थी की कथित ओएमआर शीट वायरल हुई जिसमें दावा किया गया कि उसने केवल 48 प्रश्न हल किए थे फिर भी उसका चयन हो गया। इसके अलावा छात्रों ने यह भी सवाल उठाया कि परिणाम आयोग के अध्यक्ष, सचिव या अन्य सदस्यों के हस्ताक्षर के बिना जारी किया गया जबकि सामान्य प्रक्रिया में ऐसा होना चाहिए। इस बढ़ते विरोध के बाद मुख्य परीक्षा रद्द कर दी गई।
अब छात्र कथित पेपर लीक, सीटों की खरीद-फरोख्त और भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं की जांच सीबीआई या ईडी जैसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग कर रहे हैं। यह आंदोलन सोशल मीडिया पर भी तेजी से फैल रहा है। धरना स्थलों पर हजारों छात्र जुट रहे हैं और कई प्रदर्शनकारी अनशन पर भी बैठे हुए हैं। इनमें देवेंद्र महतो का नाम सबसे अधिक चर्चा में है जिन्हें कई लोग “झारखंड का सोनम वांगचुक” कहकर संबोधित कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के किशनपुर कस्बे स्थित सर्वोदय इंटर कॉलेज में भी जुलाई 2026 के आखिर में करीब 1,500 से 1,800 छात्र-छात्राओं ने बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया। सोशल मीडिया पर इसे ‘जेन-अल्फा’ का पहला बड़ा छात्र आंदोलन भी कहा गया। छात्रों का कहना था कि स्कूल की कक्षाओं में बिजली और पंखों की व्यवस्था नहीं है कई बेंच टूटी हुई हैं पीने के लिए साफ पानी उपलब्ध नहीं है और शौचालयों की हालत भी खराब है। इसके अलावा मार्कशीट देने के नाम पर अवैध वसूली और प्रिंसिपल के कथित अभद्र व्यवहार के आरोप भी लगाए गए।
राजस्थान
राजस्थान की राजधानी जयपुर में भी 5 अगस्त 2026 को राजकीय सेठ आनंदीलाल पोद्दार मूक-बधिर उच्च माध्यमिक विद्यालय के छात्र-छात्राएं अपनी समस्याओं को लेकर सड़कों पर उतर आए। बोल और सुन नहीं सकने वाले इन छात्रों ने जर्जर हॉस्टल, बुनियादी सुविधाओं की कमी, गिरती शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ धरना दिया। छात्रों ने आरोप लगाया कि हॉस्टल की छत से पानी टपकता है कमरों का प्लास्टर उखड़ रहा है और आवश्यक सुविधाएं भी नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मूक-बधिर बच्चों को पढ़ाने के लिए ऐसे लोगों की नियुक्ति की गई है जो सांकेतिक भाषा तक नहीं जानते। प्रदर्शन और मीडिया में मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने स्कूल के प्रधानाचार्य के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित या स्थानांतरित कर दिया।
इन घटनाओं को एक साथ देखें तो साफ दिखाई देता है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्र अलग-अलग समस्याओं से लड़ रहे हैं लेकिन उनकी मांग एक ही है बेहतर, पारदर्शी और सभी के लिए सुलभ शिक्षा व्यवस्था। कहीं भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं कहीं स्कूलों और कॉलेजों में बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं तो कहीं सरकारी संस्थानों के निजीकरण का विरोध हो रहा है। ऐसे में छात्र किताब और कलम लेकर कक्षा में बैठने के बजाय अपनी शिक्षा और भविष्य की मांग के लिए सड़कों पर इतिहास लिख रहे हैं। सालों बाद ये पढ़ा जाएगा कि देश में शिक्षा के लिए लड़ाई लड़ी गई है।
यदि आप हमको सपोर्ट करना चाहते है तो हमारी ग्रामीण नारीवादी स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें और हमारे प्रोडक्ट KL हटके का सब्सक्रिप्शन लें’
